नौकरी छोड़कर शुरू की सब्जियों की नर्सरी, अमृतसर से पंजाब के किसानों तक पहुंचा रहे पौधे

सब्जियों की नर्सरी से किसान मज़बूत शुरुआत कर रहे हैं, अमृतसर के भूपिंदर सिंह गिल की सफल पहल से बढ़ रही है मांग और मुनाफ़ा।

अमृतसर के भूपिंदर सिंह गिल

फूलों और पेड़ों की नर्सरी के साथ-साथ सब्जियों की नर्सरी की मांग भी किसानों में तेज़ी से बढ़ रही है। तैयार पौधे लेकर किसान अपनी फ़सल की शुरुआत मज़बूती से कर सकते हैं और नुक़सान कम होता है।

ऐसी ही एक सफल मिसाल हैं अमृतसर के गांव सोहियां कलां के भूपिंदर सिंह गिल, जिन्होंने सीड लाइन कंपनी की नौकरी छोड़कर अपनी सब्जियों की नर्सरी शुरू की। आज उनके फ़ार्म से तैयार नर्सरी सीधे किसानों के खेतों तक पहुंच रही है।

कब शुरू की सब्जियों की नर्सरी?

नौकरी छोड़कर शुरू की सब्जियों की नर्सरी, अमृतसर से पंजाब के किसानों तक पहुंचा रहे पौधे

भूपिंदर सिंह गिल बताते हैं कि खेती के साथ उनका जुड़ाव शुरू से ही था। नौकरी करते हुए भी वे खेतीबाड़ी से जुड़े रहे। इसी रुचि के चलते उन्होंने 2014 में नौकरी के साथ-साथ नर्सरी का काम शुरू किया। कुछ वर्षों के अनुभव के बाद 2017 की शुरुआत में उन्होंने नौकरी पूरी तरह छोड़कर नर्सरी को अपना मुख्य पेशा बना लिया।

सब्जियों की नर्सरी में कैसे हुए सफल?

उनके ‘बाबा बुड्ढा नर्सरी फ़ार्म’ पर किसान बड़ी संख्या में सब्जियों की नर्सरी लेने आते हैं। यहां टमाटर, गोभी, प्याज सहित कई तरह की सब्जियों के पौधे तैयार किए जाते हैं। कुछ फल, जैसे पपीता आदि की नर्सरी भी उपलब्ध है, लेकिन मुख्य रूप से फ़ार्म की पहचान सब्जियों की व्यापक वैरायटी है।

उनके अनुसार नर्सरी के क्षेत्र में कामयाब होने के लिए बीज की जानकारी बहुत ज़रूरी है क्योंकि सारा काम बीज पर ही निर्भर करता है। किसान अच्छे और स्वस्थ पौधे के लिए ही आता है और यदि बीज सही इस्तेमाल किया जाएगा तभी अच्छा पौधा तैयार किया जा सकता है। खेती के शौक और फिर सीड लाइन में नौकरी ने उन्हें अच्छा अनुभव दिया, लेकिन नए किसान के लिए वे कहते हैं कि पहले बीज की समझ बनाना बहुत ज़रूरी है।

हाई टेक नर्सरी

नौकरी छोड़कर शुरू की सब्जियों की नर्सरी, अमृतसर से पंजाब के किसानों तक पहुंचा रहे पौधे

उन्होंने अपने फ़ार्म में पॉलीहाउस बनाया हुआ है। और साथ ही फुहारा सिस्टम तथा अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं के साथ नर्सरी को बेहतर और तकनीकी ढंग से चला रहे हैं।

वे कहते हैं कि बीज की लागत अधिक होने के कारण इन व्यवस्थाओं का उपयोग ज़रूरी हो जाता है। बीज का एक भी दाना खराब होना नर्सरी के लिए नुक़सान ही है। इसलिए जितने सुव्यवस्थित तरीके से काम किया जाएगा, नर्सरी में घाटा कम होगा और असफल होने का खतरा भी खत्म होगा।

पानी की देखरेख

उनके अनुसार पानी नर्सरी के काम के लिए एक बड़ा पहलू है। क्योंकि थोड़ा भी अधिक पानी पौधे को खत्म कर देता है। चाहे पौधा नर्सरी में हो या किसान ने अपने खेत में लगा लिया हो। इसलिए पानी की देखरेख ज़रूरी है। इससे किसान और नर्सरी संचालक दोनों अपने नुक़सान से बच सकते हैं।

सही ढंग से खेती

नौकरी छोड़कर शुरू की सब्जियों की नर्सरी, अमृतसर से पंजाब के किसानों तक पहुंचा रहे पौधे

उनके नर्सरी फ़ार्म में कई कर्मचारी 2014 से काम कर रहे हैं। उनके अनुसार दर्जनों की संख्या में खेती से जुड़े मजदूर काम हासिल कर रहे हैं और उनके लिए भी यह गर्व की बात है। अब उन्हें पूरे पंजाब से सब्जियों के काश्तकार किसान फोन के माध्यम से संपर्क करके नर्सरी प्राप्त कर लेते हैं। जिससे किसानों को घर बैठे अच्छी वैरायटी मिल जाती है। लोग अच्छी चीज की मांग करते हैं और बेहतर चीज लेने के लिए खुद पहल करते हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य अच्छा उत्पादन करना है।

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सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुंचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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