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भारत अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर चल रही अटकलों के बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में किसानों के हितों से समझौता नहीं किया गया है और न ही किया जाएगा। जयपुर से दिए गए अपने बयान में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार हर फैसले में किसान हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार कृषि मंत्री के रूप में वह देश के किसानों को आश्वस्त करना चाहते हैं कि किसी भी समझौते में भारतीय कृषि को नुक़सान पहुंचाने वाला कोई निर्णय नहीं लिया गया है। शिवराज सिंह चौहान ने साफ शब्दों में कहा कि गेहूं, चावल और मक्का जैसी संवेदनशील फ़सलों के मामले में आयात के लिए दरवाजा पूरी तरह बंद है।
खाद्यान्न सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों पर कोई समझौता नहीं
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत आज चावल उत्पादन में दुनिया में अग्रणी स्थान पर पहुंच चुका है। ऐसे में ऐसी कोई नीति स्वीकार नहीं की गई है जिससे घरेलू किसानों को नुक़सान हो। उन्होंने दोहराया कि खाद्यान्न सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में भारत आत्मनिर्भर है और इन फ़सलों पर आयात की अनुमति नहीं दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट है कि जहां देश आत्मनिर्भर है, वहां बाहरी निर्भरता बढ़ाने का कोई सवाल ही नहीं उठता। शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि यह निर्णय सीधे किसानों की आय और देश की खाद्य सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
डेयरी क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित
डेयरी उत्पादों को लेकर भी मंत्री ने स्पष्ट रुख अपनाया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश हैं कि दूध, घी, दही, पनीर या किसी भी डेयरी उत्पाद का आयात किसी भी क़ीमत पर भारतीय बाज़ार में नहीं होने दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि देश का डेयरी क्षेत्र करोड़ों छोटे किसानों की आजीविका से जुड़ा है, इसलिए इस क्षेत्र की सुरक्षा सरकार की प्राथमिक ज़िम्मेदारी है। शिवराज सिंह चौहान ने इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया।
सेब आयात पर संतुलित दृष्टिकोण
सेब के मुद्दे पर उठे सवालों का जवाब देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत को हर वर्ष लगभग 5.5 लाख मीट्रिक टन सेब की आवश्यकता होती है, जिसका एक हिस्सा पहले से ही तुर्की और ईरान जैसे देशों से आता है। यदि इसी मात्रा में से सीमित हिस्सा अमेरिका से लिया जाता है, तो इससे भारतीय उत्पादकों को कोई नुक़सान नहीं होगा।
उन्होंने बताया कि आयात पर शुल्क और कोटा तय किया गया है, जिससे घरेलू किसानों की सुरक्षा बनी रहेगी। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह केवल स्रोत में मामूली बदलाव है, न कि नीति में बदलाव।
सोयाबीन और मक्का पर कोई रियायत नहीं
शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि सोयाबीन और मक्का जैसी महत्वपूर्ण फ़सलों पर किसी प्रकार की छूट नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि इन फ़सलों का देश की खाद्य और पशु आहार व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान है, इसलिए इनके मामले में कोई समझौता नहीं किया गया।
उन्होंने पूर्व सरकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले कृषि आयात अधिक हुए थे, जबकि वर्तमान नीति में घरेलू उत्पादन की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। शिवराज सिंह चौहान ने इसे किसान हित में लिया गया निर्णायक कदम बताया।
कपास आयात उद्योग की ज़रूरत के अनुसार
कपास के विषय में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश में उत्पादन कभी-कभी उद्योग की ज़रूरत से कम पड़ जाता है, इसलिए सीमित आयात की आवश्यकता होती है। इससे टेक्सटाइल उद्योग चलता है, रोज़गार बढ़ता है और निर्यात को मज़बूती मिलती है।
उन्होंने बताया कि भारत का टेक्सटाइल निर्यात वर्तमान में लगभग 4 लाख करोड़ रुपये का है और इसमें और वृद्धि की संभावना है। शिवराज सिंह चौहान के अनुसार इसका अंतिम लाभ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ही मिलेगा।
मसालों के आयात पर रोक, निर्यात को बढ़ावा
राजस्थान सहित देश में पैदा होने वाले जीरा, मेथी और इसबगोल जैसे मसालों के आयात के लिए कोई स्थान नहीं छोड़ा गया है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इन उत्पादों के आयात की अनुमति नहीं दी जाएगी, बल्कि इनके निर्यात को बढ़ाने की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने बताया कि अमेरिका जैसे बाज़ारों में इन मसालों को शून्य शुल्क के साथ पहुंचाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं, जिससे किसानों की आय सीधे बढ़ेगी। शिवराज सिंह चौहान ने इसे कृषि निर्यात को मज़बूत करने की रणनीति का हिस्सा बताया।
किसान फर्स्ट दृष्टिकोण पर अडिग सरकार
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार हर वैश्विक समझौते को किसान फर्स्ट दृष्टिकोण से देखती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो वादों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत कभी नहीं झुकेगा और किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं किया जाता, वैसे ही कृषि और किसानों के हितों पर भी कोई समझौता नहीं होगा। शिवराज सिंह चौहान ने भरोसा दिलाया कि हर निर्णय देश की आत्मनिर्भरता और किसानों की समृद्धि को ध्यान में रखकर लिया जा रहा है।
किसानों को भरोसा देने की कोशिश
चल रही चर्चाओं और आशंकाओं के बीच शिवराज सिंह चौहान का यह बयान किसानों और संबंधित क्षेत्रों को आश्वस्त करने वाला माना जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समझौते में कोटा, शुल्क और प्रतिबंध जैसे उपायों के जरिए घरेलू उत्पादकों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।
सरकार का कहना है कि भारत की खाद्यान्न आत्मनिर्भरता, डेयरी संरचना और प्रमुख कृषि क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित हैं। शिवराज सिंह चौहान ने दोहराया कि किसानों के हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिक ज़िम्मेदारी है और इसी दिशा में सभी निर्णय लिए जा रहे हैं।
कृषि आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का संतुलन
सरकार की रणनीति यह संकेत देती है कि एक ओर घरेलू किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है, वहीं दूसरी ओर निर्यात और उद्योग को भी मज़बूत बनाया जा रहा है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यही संतुलन भारत को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
इस तरह सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि व्यापार समझौते हों या अन्य नीतियां, हर कदम का केंद्र भारतीय किसान ही रहेगा।
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