Nanotechnology नहीं, मिट्टी के सूक्ष्म जीव हैं खेती के असली सुपरहीरो: रूसी वैज्ञानिक विष्णु डी. राजपूत ने बताया

विष्णु डी. राजपूत, जो रूस की प्रतिष्ठित साउदर्न फेडरल यूनिवर्सिटी में नैनो टेक्नोलॉजी पर रिसर्च कर रहे हैं। ‘किसान ऑफ इंडिया सम्मान 2025’ (Kisan of India Samman 2025) के मंच पर उन्होंने भारतीय किसानों के लिए टिकाऊ खेती का एक व्यावहारिक और वैज्ञानिक रोडमैप (Practical and scientific roadmap) पेश किया।

Nanotechnology नहीं, मिट्टी के सूक्ष्म जीव हैं खेती के असली सुपरहीरो: रूसी वैज्ञानिक विष्णु डी. राजपूत ने बताया

‘हमारी मिट्टी में छुपे हैं असली सुपरहीरो, नैनो टेक्नोलॉजी (Nanotechnology) से पहले, आइए अपनी मिट्टी के सूक्ष्म जीवों (Microorganisms) को मजबूत करें। ये उम्मीद भरी बातें कह रहे हैं विष्णु डी. राजपूत, जो रूस की प्रतिष्ठित साउदर्न फेडरल यूनिवर्सिटी में नैनो टेक्नोलॉजी पर रिसर्च कर रहे हैं। ‘किसान ऑफ इंडिया सम्मान 2025’ (Kisan of India Samman 2025) के मंच पर उन्होंने भारतीय किसानों के लिए टिकाऊ खेती का एक व्यावहारिक और वैज्ञानिक रोडमैप (Practical and scientific roadmap) पेश किया।

Nanotechnology: भविष्य की संभावना, आज की रीसर्च 

विष्णु डी. राजपूत  नैनो टेक्नोलॉजी (Nanotechnology) को एग्रीकल्चर के लिए एक Exciting Possibilities के रूप में देखते हैं। वे बताते हैं कि किसी पदार्थ को नैनो स्तर तक सूक्ष्म बनाने पर उसके नए गुण विकसित होते हैं, जो पौधों की बढ़ोतरी में मददगार हो सकते हैं। हालांकि, वे इस बात पर जोर देते हैं कि अभी ये Technology research के स्टेप में है।

विष्णु कहते है कि ‘हमारा टारगेट ये पता लगाना है कि किस फसल के लिए, किस मौसम में और किस आकार का नैनो मटेरियल सही रहेगा। उनका मानना है कि सही रीसर्च और टेस्टिंग के बाद ही ये तकनीक किसानों के खेतों तक पहुंच पाएगी। फिलहाल, उनकी रिसर्च इस बात पर फोकस करती है कि ये टेक्नोलॉजी पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी हो।

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सस्टेनेबल खेती की नींव: मिट्टी का स्वास्थ्य

विष्णु के अनुसार, किसी भी नई टेक्नोलॉजी से पहले हमें अपनी मिट्टी के Basic health पर ध्यान देना चाहिए। वे रूस और भारत की मिट्टी का उदाहरण देते हैं।

‘रूस की मिट्टी में ऑर्गेनिक मैटर 4-6 फीसदी है, जबकि भारत में ये औसत 1 फीसदी से भी कम है। ये अंतर ही हमारी मेन चुनौती है’, वे समझाते हैं। इस डिफरेंस की वजह है दशकों तक लगातार केमिकल फर्टिलाइजर का यूज और मिट्टी में Microorganisms की कमी।

Bio-Based Products और Crop Diversification 

विष्णु भारतीय किसानों के लिए दो क्लियर और प्रभावी समाधान सुझाते हैं- 

1.Bio-Based प्रोडक्ट्स को अपनाएं: ट्राइकोडर्मा, माइकोराइजा जैसे Organic Products मिट्टी में सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ाते हैं। ये जीव मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और पोषक तत्व पौधों तक पहुंचाने में मदद करते हैं।

2.Crop Diversification को प्राथमिकता दें: विष्णु कहते हैं, अगर हम अपने चावल के उत्पादन का 25 फीसदी  हिस्सा दलहनी फसलों की ओर मोड़ दें, तो न सिर्फ पानी की बचत होगी, बल्कि मिट्टी की हेल्थ भी सुधरेगी। रूस जैसे देशों में सरकार की नीतियां Crop Diversification को प्रोत्साहित करती हैं, जो एक Balanced agricultural system की नींव है।

किसानों के लिए सीधा संदेश

विष्णु डी. राजपूत का किसान भाइयों के लिए संदेश साफ और क्लियर है- 

  • चाहे आपके पास एक हेक्टेयर ज़मीन हो या आधा, सबसे पहले अपनी मिट्टी के दोस्तों यानी Organic products को अपनाएं। 
  • फसलों में विविधता लाएं। इससे न सिर्फ आपका जोखिम कम होगा, बल्कि मिट्टी भी ताकतवर बनेगी।
  • नई तकनीकों के लिए उत्सुक रहें, लेकिन उन्हें अपनाने से पहले पूरी जानकारी और भरोसेमंद सलाह ज़रूर लें।

विष्णु की बातें एक वैज्ञानिक की सोच और एक किसान की प्रेक्टिकल समझ का बेहतरीन मेल हैं। उनका ये पॉजिटिव सोंच बताता है कि पारंपरिक ज्ञान और मॉर्डन रिसर्च को मिलाकर ही भारत की खेती सही मायने में समृद्ध और टिकाऊ बन सकती है। 

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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