हमसे ज़्यादा बड़े शोधकर्ता तो किसान हैं, ICAR ने किसानों के अनुभव को दिया नया मंच: डॉ. राजर्षि बर्मन

डॉ. राजर्षि बर्मन बताते हैं कि साइंटिस्ट पहले थ्योरी पढ़ते हैं, फिर एक्सपेरिमेंट करते हैं। लेकिन किसान का रास्ता इससे उल्टा है। उनका एक्सपीरियंस पहले होता है, खेत में काम करते हुए वो जो सीखते हैं, उससे एक थ्योरी खुद-ब-खुद निकलकर सामने आती है।

हमसे ज़्यादा बड़े शोधकर्ता तो किसान हैं, ICAR ने किसानों के अनुभव को दिया नया मंच: डॉ. राजर्षि बर्मन

दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (Indian Agricultural Research Institute) ने हमेशा से ही देश की कृषि प्रगति में अग्रणी भूमिका निभाई है। लेकिन ICAR के ADG (Additional Director General) डॉ. राजर्षि बर्मन जी एक बहुत ही अहम बात याद दिलाते हैं – ‘हम मानते हैं कि हमसे ज्यादा बड़े शोधकर्ता तो हमारे किसान हैं।’ ये विचार ही आज Indian Council of Agricultural Research (ICAR) की नई दिशा की आधारशिला है।

किसान: पहले प्रैक्टिकल, फिर थ्योरी

डॉ. बर्मन बताते हैं कि साइंटिस्ट पहले थ्योरी पढ़ते हैं, फिर एक्सपेरिमेंट करते हैं। लेकिन किसान का रास्ता इससे उल्टा है। उनका एक्सपीरियंस पहले होता है, खेत में काम करते हुए वो जो सीखते हैं, उससे एक थ्योरी खुद-ब-खुद निकलकर सामने आती है। ये ‘प्रैक्टिकल से थ्योरी’ वाली नॉलेज बेहद मूल्यवान है। ICAR ने इसी सोच को सराहते हुए 2006 से ही IARI फेलो फार्मर और इनोवेटिव फार्मर अवार्ड्स देना शुरू कर दिया था। हर साल 30-35 इनोवेटर्स किसानों को ये सम्मान मिलते हैं।

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‘किसान ऑफ इंडिया’ के मंच से मिली नई एनर्जी

‘किसान ऑफ इंडिया’ के सम्मान 2025 (Kisan of India Samman 2025) के चीफ गेस्ट रहे डॉ. राजर्षि बर्मन ने बताया कि ICAR किसानों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। हाल ही में मई-जून में चलाए गए ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ में पूरे देश के वैज्ञानिकों ने गांव-गांव जाकर किसानों से सीधा संवाद किया। इस दौरान दो बड़ी बातें सामने आईं।

1.500 Researchable Issues: किसानों ने करीब 500 ऐसी समस्याएं बताईं जिन पर तत्काल शोध की जरूरत है। इन मुद्दों को अब हर राज्य में वर्कशॉप करके, राज्य सरकारों और विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर सुलझाया जाएगा।

2.More than 300 innovations: देशभर के किसानों के करीब 300 इनोवेशन देखने को मिले। इनमें से 110 सबसे प्रभावशाली Innovations को एक किताब का रूप दिया गया है, ताकि उन्हें पूरे देश में फैलाया जा सके।

किसानों की किस्मों को भी मिलेगी राष्ट्रीय पहचान

डॉ. बर्मन एक बहुत ही रोमचक पहल की ओर इशारा करते हैं। कई किसानों ने अपने स्तर पर रीसर्च करके नई और बेहतर फसल किस्में डेवलप की हैं, जिन्हें उन्होंने अपना नाम भी दिया है। अब ICAR की प्लानिंग है कि इन ‘किसान-विकसित किस्मों’ को भी Formal multi-location trials में शामिल किया जाए। अगर ये किस्में अलग-अलग जगहों पर अच्छा प्रदर्शन करती हैं, तो उन्हें आधिकारिक तौर पर उस जोन के लिए रखा जाएगा और बीज का उत्पादन बढ़ाया जाएगा।

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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