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27 नवंबर को आयोजित किसान ऑफ़ इंडिया सम्मान 2025 में एग्री–स्टार्टअप श्रेणी का सम्मान पाने वाले रविंद्र माणिकराव मेटकर की कहानी हर उस किसान के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ा सपना देखता है। महाराष्ट्र के अमरावती जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने पोल्ट्री फ़ार्मिंग को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए ऐसा मॉडल खड़ा किया, जो आज देश के सबसे उन्नत पोल्ट्री फ़ार्म्स में गिना जाता है।
उनकी यात्रा 16 साल की उम्र में घर की छत से शुरू हुई थी—और आज वही सफ़र पांच मंज़िला, ऑटोमेटेड पोल्ट्री यूनिट तक पहुंच चुका है। इसी नवाचार और निरंतर मेहनत के लिए रविंद्र माणिकराव मेटकर को किसान ऑफ़ इंडिया सम्मान 2025 से सम्मानित किया गया।
सीमित ज़मीन, बड़ी ज़िम्मेदारी और मज़बूत इरादा
रविंद्र माणिकराव मेटकर का परिवार साधारण था। तीन भाइयों के परिवार के पास केवल एक एकड़ ज़मीन थी, जिससे गुज़ारा करना आसान नहीं था। कई बार रोज़मर्रा की ज़रूरतें भी मुश्किल से पूरी होती थीं। लेकिन उन्होंने हालात को अपनी कमज़ोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने समाधान की तलाश की और खेती के साथ एक ऐसे व्यवसाय की ओर बढ़े, जो कम ज़मीन में भी आगे बढ़ सके—पोल्ट्री फ़ार्मिंग।
100 मुर्गियों से व्यवसाय की नींव
साल 1984 में, महज़ 16 वर्ष की उम्र में रविंद्र माणिकराव मेटकर ने अपने पिता के पीएफ से मिले 3,000 रुपये से 100 ब्रॉयलर मुर्गियों के साथ शुरुआत की। पढ़ाई के साथ-साथ काम जारी रखा और धीरे-धीरे संख्या 400 तक पहुंची।1992 में उन्होंने कॉमर्स में पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा किया। पढ़ाई ने उन्हें हिसाब–क़िताब, बाज़ार और जोख़िम समझने में मदद की। शादी के बाद अमरावती में एक एकड़ ज़मीन खरीदी और बैंक से कर्ज़ लेकर 4,000 मुर्गियों का फ़ार्म खड़ा किया। यही वह दौर था, जब उनके व्यवसाय ने रफ़्तार पकड़ी।
बर्ड फ्लू का झटका और वापसी की कहानी
2006 में बर्ड फ्लू ने पूरे पोल्ट्री सेक्टर को हिला दिया। रविंद्र माणिकराव मेटकर को भी भारी नुक़सान उठाना पड़ा और 16,000 ब्रॉयलर मुर्गों को कम दामों पर बेचना पड़ा। यह समय कठिन था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 2008 में उन्होंने 25 लाख रुपये का कर्ज़ लेकर 20,000 मुर्गियों से फिर शुरुआत की। यही साहस आगे चलकर उनकी पहचान बना।
आधुनिक तकनीक से बदला पोल्ट्री फ़ार्मिंग का तरीक़ा
आज रविंद्र माणिकराव मेटकर का पोल्ट्री फ़ार्म 50 एकड़ में फैला है। यहां कुल 1.8 लाख लेयर बर्ड्स हैं—जिसमें 30,000 की फुली ऑटोमेटेड और 1,20,000 की सेमी-ऑटोमेटेड यूनिट शामिल है। बैटरी केज और एनवायरनमेंटल कंट्रोल तकनीक के कारण मौसम या संक्रमण का जोख़िम काफ़ी हद तक कम हो जाता है। तापमान, हवा और साफ-सफाई—सब कुछ तकनीक से नियंत्रित होता है।
इसी वजह से फ़ार्म से रोज़ाना लगभग 1.2 लाख अंडों का उत्पादन होता है। इस नवाचार ने रविंद्र माणिकराव मेटकर को एग्री–स्टार्टअप की श्रेणी में अलग पहचान दिलाई और किसान ऑफ़ इंडिया सम्मान 2025 तक पहुंचाया।
पोल्ट्री के साथ जैविक खेती का संतुलन
रविंद्र माणिकराव मेटकर सिर्फ़ पोल्ट्री तक सीमित नहीं हैं। उनकी 50 एकड़ ज़मीन में से 20 एकड़ से ज़्यादा क्षेत्र में वे जैविक खेती करते हैं। संतरा, मौसमी, नारियल, केला, सेब, सोयाबीन, गेहूं, कपास, दालें और सब्ज़ियां—फ़सलों की विविधता उनकी ताकत है। पोल्ट्री से मिलने वाली प्राकृतिक खाद को वे खेतों में उपयोग करते हैं, जिससे मिट्टी की सेहत बेहतर होती है और लागत घटती है। सिंचाई के लिए ड्रिप और फव्वारा पद्धति अपनाई गई है, जिससे पानी की बचत भी होती है।
कम लागत, बेहतर उत्पादन और स्थिर आय
रविंद्र माणिकराव मेटकर बताते हैं कि उनकी सालाना कमाई 41 से 50 लाख रुपये के बीच रहती है। इसका राज है—लागत पर नियंत्रण, तकनीक का सही उपयोग और संसाधनों का पूरा इस्तेमाल। आधुनिक कृषि उपकरणों से श्रम बचता है और काम तेज़ होता है। इसी स्मार्ट मैनेजमेंट ने उनके व्यवसाय को स्थिर और लाभकारी बनाया है।
नए किसानों के लिए संदेश
रविंद्र माणिकराव मेटकर का मानना है कि किसान अगर कम ख़र्च में अच्छा उत्पादन करने पर ध्यान दें, तो मुनाफ़ा अपने आप बढ़ेगा। वे सलाह देते हैं कि खेती के साथ छोटे-छोटे व्यवसाय—जैसे पोल्ट्री, पशुपालन, मधुमक्खी पालन या डेयरी—जोड़े जाएं, ताकि आय के कई स्रोत बन सकें।
“एक ही खेत से एक से ज़्यादा आमदनी संभव है, बस सही तकनीक और सही दिशा चाहिए,” वे कहते हैं।
सम्मान जो प्रेरणा बन गया
किसान ऑफ़ इंडिया सम्मान 2025 में मिला सम्मान रविंद्र माणिकराव मेटकर की चार दशकों की मेहनत का परिणाम है। यह सिर्फ़ एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस सोच की जीत है जिसमें किसान नवाचार अपनाकर एग्री–स्टार्टअप के ज़रिये आगे बढ़ता है।
निष्कर्ष
रविंद्र माणिकराव मेटकर की कहानी बताती है कि अगर इरादा मज़बूत हो, तो छत से शुरू हुआ सपना भी पांच मंज़िला सफ़लता में बदल सकता है। तकनीक, धैर्य और मेहनत—इन तीनों के मेल से उन्होंने पोल्ट्री फ़ार्मिंग को नई ऊंचाई दी और किसान ऑफ़ इंडिया सम्मान 2025 में देशभर के किसानों के लिए एक मज़बूत उदाहरण पेश किया।
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