Table of Contents
भारत में खेती आज भी ज़्यादातर छोटे और सीमांत किसानों के भरोसे चल रही है। एक या दो एकड़ ज़मीन पर खेती करने वाला किसान नई और महंगी तकनीक को अपनाना चाहता तो है, लेकिन पूंजी, भरोसा और जानकारी की कमी उसे रोक देती है। इसी ज़मीन से जुड़े सवाल को समझते हुए Nurture.farm ने किसानों के लिए खेती को आसान, किफायती और टिकाऊ बनाने की दिशा में काम शुरू किया।
किसान ऑफ़ इंडिया के ख़ास पॉडकास्ट में Nurture.farm के हेड तुषार त्रिवेदी ने खुलकर बताया कि कैसे फ़ार्म मैकेनाइजेशन को “सर्विस” के रूप में किसानों तक पहुंचाया जा सकता है। इन सभी मुद्दों पर तुषार त्रिवेदी ने विस्तार से चर्चा की किसान ऑफ़ इंडिया के संवाददाता सर्वेश बुंदेली के साथ।
छोटे खेत, बड़ी चुनौती और समाधान की शुरुआत
तुषार त्रिवेदी बताते हैं कि भारत और अमेरिका या ब्राजील जैसी खेती में बड़ा फ़र्क़ है। वहां एक किसान हजारों एकड़ में खेती करता है, जबकि भारत में एक किसान एक या दो एकड़ में ही सीमित होता है। ऐसे में 10–15 लाख रुपये की मशीन खरीदना उसके लिए संभव नहीं होता।
यहीं से Nurture.farm का मूल विचार सामने आया— अगर किसान मशीन खरीद नहीं सकता, तो उसे मशीन की सर्विस मिलनी चाहिए। इसी सोच के साथ Nurture.farm ने फ़ार्म मैकेनाइजेशन को डिजिटाइज कर, सर्विस मॉडल में बदल दिया।
तुषार त्रिवेदी की एग्रीकल्चर जर्नी
तुषार त्रिवेदी पेशे से केमिकल इंजीनियर हैं और पिछले 20 वर्षों से यूपीएल ग्रुप से जुड़े हुए हैं। उन्होंने मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और यूरोप में एग्रीकल्चर ऑपरेशंस को करीब से देखा। विदेशों में आधुनिक खेती देखने के बाद उन्हें साफ़ समझ आया कि भारत में तकनीक की कमी नहीं है, बल्कि उसे किसान तक पहुंचाने के सही मॉडल की ज़रूरत है। यूपीएल की “फ़ार्मर फर्स्ट” सोच के तहत Nurture.farm की शुरुआत हुई, जहां किसान को केंद्र में रखकर समाधान तैयार किए गए।
Farm Mechanization as a Service Concept क्या है?
Nurture.farm ने खेती में एक नया कॉन्सेप्ट पेश किया- Mechanization as a service इसका मतलब ये है कि किसान को ट्रैक्टर, स्प्रेयर या हार्वेस्टर खरीदने की ज़रूरत नहीं है। वह सिर्फ़ ज़रूरत के समय, ज़रूरत की मशीन सर्विस के रूप में मंगा सकता है।
इस मॉडल से
- किसान का ख़र्च कम हुआ
- मजदूरों पर निर्भरता घटी
- काम तेज और सटीक हुआ
Self-propelled sprayer बना बदलाव की शुरुआत
तुषार त्रिवेदी बताते हैं कि Nurture.farm की सबसे ज़्यादा असर डालने वाली मशीन रही सेल्फ प्रोपेल स्प्रेयर। ये मशीन 12–15 लाख रुपये की होती है, जिसे कोई भी छोटा किसान खरीद नहीं सकता। लेकिन सर्विस मॉडल के जरिए किसान सिर्फ़ बटन दबाकर इसे अपने खेत तक बुला सकता है। जहां पहले एक घंटे में स्प्रे होता था, वहीं अब वही काम 7–8 मिनट में हो जाता है, वो भी बिना किसान को धूप में खड़े हुए।
Phygital Model से आसान बनी खेती
Nurture.farm सिर्फ़ डिजिटल ऐप पर निर्भर नहीं है। यहां Phygital Model अपनाया गया है, यानी
- फिजिकल मौजूदगी (ग्राउंड टीम, ऑपरेटर)
- डिजिटल टेक्नोलॉजी (ऐप, ट्रैकिंग, बुकिंग)
किसान ऐप से बुकिंग करता है और देख सकता है कि मशीन कहां है, कब आएगी और काम कैसे होगा। साथ ही गांव स्तर पर टीम किसान को समझाने और भरोसा दिलाने का काम करती है।
गांव से निकली गिग वर्क फोर्स
Nurture.farm ने गांवों के युवाओं को ट्रेन कर 5000 से ज़्यादा ऑपरेटर तैयार किए। ये लोग मशीन चलाते हैं, सर्विस देते हैं और गांव में ही रोज़गार पाते हैं।
इससे
- युवाओं को काम मिला
- किसानों को भरोसेमंद सेवा
- खेती में स्थानीय भागीदारी बढ़ी
भरोसा सबसे बड़ी चुनौती था
तुषार त्रिवेदी बताते हैं कि शुरुआत में 15 दिन तक एक भी ऑर्डर नहीं आया। किसान डर रहा था कि मशीन खेत खराब कर देगी। लेकिन जैसे ही पहला एकड़ का काम हुआ और रिजल्ट सामने आया, मुंह-जबानी प्रचार शुरू हो गया। आज हालत ये है कि कई गांवों में किसान मशीन हटने नहीं देते और लाइन लगाकर सर्विस लेते हैं।
कहां-कहां काम कर रहा है Nurture.farm?
आज Nurture.farm पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक जैसे राज्यों में सक्रिय है और 30 लाख से ज़्यादा किसानों को सेवा दे चुका है।
स्प्रे से आगे की सोच
Nurture.farm अब सिर्फ़ स्प्रे तक सीमित नहीं है।
यह काम कर रहा है—
- हार्वेस्टिंग मशीन
- ग्राउंडनट हार्वेस्टर
- एग्री एडवाइजरी
- क्रॉप डॉक्टर
- मौसम आधारित इंश्योरेंस
- मंडी प्राइस जानकारी
- फ़ार्म ट्रेसबिलिटी
तुषार त्रिवेदी बताते हैं कि आने वाले समय में किसान को एक ही प्लेटफॉर्म पर पूरी खेती का समाधान मिलेगा।
मार्केट से जुड़ना अगला बड़ा कदम
किसान उगाता तो है, लेकिन सही दाम नहीं मिल पाता। इसी समस्या को हल करने के लिए Nurture.farm वैल्यू चेन और ट्रेसबिलिटी पर काम कर रहा है। हाल ही में अनार और आलू के किसानों को प्रोसेसर और एक्सपोर्टर से जोड़ा गया, जहां QR कोड के जरिए पूरी जानकारी उपलब्ध कराई गई।
फ़ार्म मैकेनाइजेशन और रोज़गार
कई लोग कहते हैं कि मशीनें रोज़गार छीन लेंगी। लेकिन तुषार त्रिवेदी कहते हैं इसे कंप्यूटर क्रांति से जोड़ते हैं। जैसे कंप्यूटर ने नई नौकरियां पैदा कीं, वैसे ही Nurture.farm का मैकेनाइजेशन नए स्किल, नए रोज़गार, नई भूमिकाएं पैदा कर रहा है।
तुषार त्रिवेदी का किसानों के लिए संदेश
पॉडकास्ट के अंत में तुषार त्रिवेदी किसानों को तीन बातें कहते हैं—
- तकनीक अपनाएं, उससे खेती आसान होगी
- पानी, मिट्टी और पर्यावरण बचाएं
- समूह में खेती करें और सीखते रहें
निष्कर्ष
Nurture.farm सिर्फ़ मशीनों की कंपनी नहीं है, ये किसानों की सोच बदलने का प्रयास है।
तुषार त्रिवेदी के नेतृत्व में ये प्लेटफॉर्म दिखा रहा है कि अगर तकनीक भरोसे, सेवा और समझ के साथ आए, तो भारतीय खेती भी नई ऊंचाइयों तक जा सकती है। ये बातचीत साफ़ बताती है कि आने वाले समय में खेती का भविष्य मैकेनाइजेशन + डिजिटल + किसान-केंद्रित मॉडल में ही है।
इसे भी पढ़िए: Nurture.farm किसानों-विक्रेताओं को डिजिटल सपोर्ट देने वाला ऐप, जो बना रहा है खेती को एक स्मार्ट मिशन
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

