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गए वो दिन जब खेती को सिर्फ़ मेहनत से जोड़कर देखा जाता था, अब सिर्फ़ मेहनत नहीं, बल्कि स्मार्टनेस और डिजिटलाइजेशन से ही खेता का विकास होगा। Nurture.farm के रिटेल हेड अंकित लाढ़ा का कहना है कि खेती अब एक स्मार्ट मिशन बन गया है, इसलिए इसे विकसित करने के लिए किसानों को भी बदलना होगा। Nurture.retail कैसे किसानों को तकनीक से जोड़कर उन्हें आगे बढ़ने में मदद कर रहा है और कैसे वक्त के साथ किसान बदल रहे हैं। इन सभी मुद्दों पर अंकित लाढ़ा ने विस्तार से चर्चा की किसान ऑफ इंडिया के संवाददाता सर्वेश बुंदेली के साथ।
कैसे किया एग्रीकल्चर का रुख? (How did you turn to agriculture?)
1990 के दशक के आसपास जब भारत की अर्थव्यवस्था का ग्लोबलाइजेशन हुआ, उस समय हर मिडिल क्लास माता-पिता का सपना होता था कि जो वो नहीं कर पाए वो उनके बच्चे करें। Nurture.farm ऐप शुरू करने वाले अंकित लाढ़ा के पिता भी उन्हें डॉक्टर ही बनाना चाहते थे, मगर वो बायोलॉजी में अच्छे नहीं थे, तो डॉक्टर बन संभव नहीं हो पाया।
फिर अपने एक अंकल की सलाह पर उन्होंने बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई की। वो कहते हैं कि इसमें आने के बाद उन्हें एक चीज़ क्लियर हो गई कि खेती एक बिज़नेस है और ज़मीन एक फैक्ट्री है। उन्होंने बीएससी एग्रीकल्चर के बाद MBA की पढ़ाई की और खेती से जुड़ा काम करने लगे, क्योंकि उन्हें खेती में बहुत अच्छा बिज़नेस दिख रहा था।
एग्रीकल्चर से जुड़कर बहुत खुश हैं (Happy to be associated with agriculture)
अंकित बताते हैं कि एग्रीकल्चर के चुनाव पर वो बहुत खुश हैं। क्योंकि इसमें उन्हें अलग-अलग राज्यों में रहने और अलग-अलग भाषाएं सीखने का मौका मिलता है। वो कहते हैं कि जब वो हर क्षेत्र के किसानों से उनकी भाषा में बात करते हैं, तो बहुत म़जा आता है। इसके अलावा इस फील्ड से जुड़े रहने के कारण ही वो पेड़ से आम और संतरे तोड़कर खाने का अद्भुत आनंद ले पाए। वो बताते हैं कि सिर्फ़ देश ही नहीं, बल्कि दूसरे देश के गावों का अनुभव भी उन्हें मिला। किसानों के साथ चलना कंधा से कंधा मिलाकर चलने का अनुभव अलग ही होता है। एग्रीकल्चर ने अलग-अलग कल्चर को फील करने का मौका मिला।
एग्रीकल्चर में भी आ रहा है ग्लैमर (Glamour is coming in agriculture too)
आमतौर पर हर मां-बाप अपने बच्चे को मेडिकल, इंजीनियरिंग, सीए, एमबीए जैसा कोर्स ही कराना चाहते हैं, मगर एग्रीकल्चर के बारे में शायद ही कोई सोचता है, क्योंकि यहां बाकी प्रोफेशन वाला ग्लैमर नहीं है। अंकित लाढ़ा का कहना है कि ये बात सच है कि खेती में पहले ग्लैमर नहीं था, इसमें करने के लिए लोगों के पास बहुत ज़्यादा और कुछ अलग नहीं था, इसलिए इस फील्ड ने युवाओं को आकर्षित नहीं किया। किसान पहले ब्रांड बना नहीं पाए, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है, खेती में ब्रांड बन रहे हैं। पॉलीहाउस ने खेती का पारंपरिक तरीका बदल दिया है, इसका कमर्शिलाइजेशन हो रहा है, खेती में नए स्टार्टअप आ रहे हैं।
जिससे एग्रीकल्चर में भी करियर की संभावनाएं बढ़ी हैं। इज़ाराइल का उदाहरण देते हुए अंकित कहते हैं कि इज़राइल जैसे छोटे से देश ने नई तकनीक को अपनाकर अपना कृषि उत्पादन बहुत बढ़ा लिया है। जल्द ही हमारा देश भी इसी दिशा में आगे बढ़ेगा। कृषि हमारी अर्थव्यवस्था का आधार है और रहेगी। वो कहते हैं कि किसानों को लेकर एक अवधारणा है कि वो फटे-पुराने कपड़े पहने होगा, कीचड़ में सना होगा, मगर अब तस्वीर बदल रही है।
कुछ किसान अच्छी कमाई कर रहे हैं, वो बड़ी-बड़ी गाड़ियों में चलते हैं, आलीशान घरों में रहते हैं। कोरोना काल के बाद युवाओं का रुझान खेती-किसानी में बढ़ा है। अब लोगों को समझ आया कि ये एग्रीकल्चर इंडस्ट्री एवर ग्रोइंग है और इसमें बहुत से विकल्प मौजूद हैं।
एग्रीकल्चर साइंस, मैथ और आर्ट का मिश्रण है (Agriculture is a combination of science, math and art)
अंकित का मानना है कि कृषि को किसी एक विषय से जोड़कर नहीं देखा जा सकता, वो सबका मिश्रण है। वो कहते हैं कि जब कोई फ़सल देखकर रोग की पहचान कर रहा होता है, फंगस, कीड़े की पहचान कर रहे होते हैं तो उस इंसान में डॉक्टर का जज्बा है। यहां साइंटिस्ट बनने का जज्बा भी दिखता है जब किसान रोज अपने पौधे को बड़ा होते उसमें बदलाव होते देखेता है और उसे बहतर बनाने की कोशिश करता है।
खेती आर्ट यानी कला भी है जब आप देखते हैं कि कैसे कटाई होती है, खरपतवार नियंत्रण होता है, तो ये सबका मिश्रण है। एक व्यवसाय के रूप में अगर कृषि की भव्यता की बात करें तो इसका ग्रॉस वैल्यू आउटपुट 2010-11 में 15 लाख करोड़ था जो पिछले एक-दो साल में बढ़कर 48 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
Nurture.farm कृषि क्षेत्र में कैसे सुधार लाने में मदद कर रहा है? (How Nurture.farm is helping improve the agriculture sector?)
अंकित कहते हैं कि लोगों के मन एक डर रहता है कि डिजिटलाइजेशन से नौकरी का संकट आ जाएगा। जैसे पहले जब कंप्यूटर आया तो कहा गया कि गया कि लोगों की कम ज़रूरत होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, कंप्यूटर की मदद से लोग अपना काम आसानी से और कम समय में करने लगे। खेती में मजदूरों के साथ स्किल या प्रोडक्टिविटी की समस्या है यानी दक्ष मज़दूरों की कमी है। इस समस्या को Nurture.farm दूर करने की कोशिश कर रहा है। वो बताते हैं कि इस ऐप के ज़रिए किसान स्किल्ड लेबर से अपना काम करवा सकते हैं।
वो बताते हैं कि उनके पास 8-10 हजार स्किल्ड लेबर हैं, जो आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल करना जानते हैं। मान लीजिए एक आम मजदूर जिस खेत में छिड़काव के लिए 4 घंटे का समय लेता है, वहीं स्किल्ड लेबर आधुनिक मशीन की मदद से वही काम 7 मिनट में पूरा कर देता है। यानी कम समय में ज़्यादा असरदार तरीके से काम होता है। किसान एक क्लिक पर मशीनें मंगवा सकता है औक जितना स्प्रे हुआ उस हिसाब से किसानों को पैसे देने होते हैं।
Nuture.farm किस तरीके से काम करता है? (How does Nuture.farm work?)
अंकित लाढ़ा का कहना है कि उनका ऐप किसानों की निर्णय क्षमता को आसान करने के लिए बनाया गया है। ये एक ऐप कई तरह से किसानों की मदद करता है जैसे वो जमा डेटा के आधार पर सही निर्णय ले पाएंगे, बस एक क्लिक पर वो कौन-सी फ़सल उगानी है या उनके लिए जो भी ज़रूरी बातें हैं उसके बारे में सही जानकारी प्राप्त कर पाएंगे। किसान पता लगा सकते हैं कि वो किस कंपनी के उत्पादों का इस्तेमाल कर रहे हैं। पौधों में कोई समस्या होने पर उसके पत्ते का फोटो खींचकर ऐप पर डालने पर उन्हें ये पता चल जाएगा कि पौधों में कौन सी बीमारी है और इसका उपचार कैसे करना है।
खेती में कई तरह की मशीनों की ज़रूरत पड़ती है ऐसे में ज़रूरी नहीं है कि किसान 15-20 लाख की मशीन खरीदे। वो इस ऐप के ज़रिए अपनी ज़रूरत के हिसाब से मशीन मंगवा सकता है और जितना इस्तेमाल हुआ उस हिसाब से पेमेंट कर सकता है। किसान भाई प्ले स्टोर से ये ऐप डाउनलोड करके आसानी से इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
क्लाइमेट चेंज से परेशान किसान (Farmers worried about climate change)
ग्लोबल वॉर्मिंग की समस्या से हर कोई परेशान है। अंकित लाढ़ा कहते हैं कि साल-दर-साल मौसम गर्म होता जा रहा है जो खेती के लिए सही नहीं है। इसकी वजह से भीषण गर्मी पड़ रही है और बारिश के दिन कम हो गए है यानी बारिश कम दिनों के लिए होती है मगर इतने असामान्य तरीके से होती है कि तुरंत बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिसे फ्लैश फ्लड कहा जाता है, ऐसी बारिश खेती में काम नहीं आती है, बल्कि इससे फ़सलों को नुकसान ही पहुंचता है।
ऐसे समय में किसानों को नई तकनीकों की ज़रूरत होती है। अंकित बताते हैं कि उनकी कंपनी ने जीवा नामक एक उत्पाद तैयार किया था जो पौधों की पानी को एकत्र (वॉटर होल्डिंग) किए रहने की क्षमता को बढ़ाता है, ये एक वॉटर बैंक का काम करता है, किसानों ने इसे अपनाया और अच्छी तरह से इससे जुड़ गए। तो इस तरह के उत्पाद की मांग आने वाले समय में और बढ़ेगी।
फ़सल बीमा है ज़रूरी (Crop insurance is necessary)
अंकित का मानना है कि खेती में इंश्योरेंस बहुत ज़रूरी है, क्योंकि एक बार की भी फ़सल अगर बर्बाद हो जाए तो किसानों के लिए परिवार चलाना मुश्किल हो जाता है। मगर पारंपरिक बीमा में किसानों को मुआवजा मिलने में दिक्कत होती थी क्योंकि एग्रीकल्चर इंश्योरेंस में मापदंड तय करना थोड़ा मुश्किल काम था जैसे कहां कितनी बारिश हुई कैसे पता लगया जाए। मगर अब डेटा सिस्टम और बीमा की प्रक्रिया दोनों ही मज़बूत हो गए हैं। अब सरकार के पास डेटा रहता है कि कहां बारिश हो रही है, कहां नहीं हुई है इससे सही निर्णय ले पाना आसान हुआ है।
कृषि वितरकों के लिए फ़ायदेमंद है ऐप (The app is beneficial for agricultural distributors)
अंकित का मानना है किसानों के लिए वितरक यानी रिटेलर बहुत अहम व्यक्ति होता है क्योंकि वही उन्हें समय पर बीज, खाद आदि उपलब्ध करता है। किसान सबसे ज़्यादा उनपर ही विश्वास करते हैं, ऐसे में ज़रूरी है कि वितरकों तक सही जानकारी पहुंचाए जाए ताकि वो उसे किसानों तक पहुंचा सके।
उनका कहना है कि वितरकों को चाहिए कि वो खेत पर जाकर किसानों की समस्याओं को सुने और समझे, मगर उनके पास समय ही नहीं होता क्योंकि वो अपने सामान के फॉलोअप को लेकर व्यस्त रहते हैं। ऐसे में Nurture.farm ऐप वितरकों की इस समस्या को हल करती है, उन्हें अब सही समय पर माल मिल जाता है और माल का स्टेटस भी अपडेट होता रहता है। जिससे अब व किसानों की समस्या दूर पर ज़्यादा समय ख़र्च कर सकते हैं।
सस्टेनेबल एग्रीकल्चर कैसे विकसित कर सकते हैं? (How can we develop sustainable agriculture?)
अंकित बताते हैं कि सस्टेनेबल एग्रीकल्चर का मतलब है कि क्या हम आने वाली 10 पीढ़ियों के लिए ज़मीन को उसी हालत में छोड़ सकते हैं जैसी अभी वो है या नहीं, क्योंकि इसका दोहन बहुत हुआ है। ज़्यादा फर्टिलाइजर डालने से एक बार के लिए भले ही फ़सल अधिक हो, मगर हमेशा ऐसा नहीं होगा। ज़्यादा कीटनाशक डालने से पहली बार में शायद सारे कीट मर जाएंगे, मगर कुछ सालों बाद उसका असर कीटों पर होना बंद हो सकता है। ऐसे में किसानो को ये समझना होगा कि किसी समस्या का तुरंत समाधान ढूढ़ंने की बजाय उसका लंबा समाधान तलाशे।
डॉक्यूमेंटेशन/ऑर्गनाइज़्ड तरीके से चीज़ों को उपलब्ध करना समस्या है (Documentation/making things available in an organized way is the problem)
खेती में किसी कंपनी या फैक्ट्री की तरह डेटा को स्टोर करने का रिवाज नहीं रहा है। कृषि से मुनाफ़ा कमाने के लिए ये भी ज़रूरी है। माना कि किसान फ़सल की को नियंत्रित नहीं कर सकता है, मगर वो लेबर और प्रोडक्टिविटी को कंट्रोल कर सकता है, मगर इसके लिए कई सालों का डेटा चाहिए। अंकित की कंपनी किसानों का डेटा डिजिटली सेव करती है। ताकि 2-3 साल बाद वो ये जान सके कि कौन सी फ़सल से ज़्यादा फ़ायदा होगा, यानी अब वो पूरी प्लानिंग के साथ खेती कर सकते हैं।
आज के किसान कीवी भी उगा रहे हैं और फिश फार्मिंग भी कर रहे हैं। जो आज से दो दशक पहले कम ही देखा जाता था। अंकित का मानना है कि आज भी बहुत से किसान तकनीक से दूर है, सिर्फ़ प्रगतिशील किसान ही नई तकनीक को अपना रहे हैं, मगर विकसित भारत के लिए खेती का विकास ज़रूरी है और इसके लिए किसानों को डिजिटल होना पड़ेगा।
Nurture app से रिटेलर कैसे ले सकते हैं लोन का लाभ? (How can retailers avail loan from Nurture app?)
अंकित का कहना है कि ये ऐप रिटेलर्स के लिए बहुत फ़ायदेमंद है। इसका इस्तेमाल करने या इसका लाभ उठाने के लिए वो सबसे पहले तो प्ले स्टोर से ये ऐप डाउनलोड करें और इस बात का सबूत दें कि वो बिज़नेस करते हैं यानी केवाईसी आदि भरं। फिर ऐप पर उत्पाद का चयन करें, जो भी उन्हें चाहिए। फिर प्रोडक्ट कार्ट में डालकर ऑर्डर प्लेस करें, वहां उन्हें क्रेडिट का विकल्प दिखता है जिस पर क्लिक करना होगा, इससे वो जान पाएंगे कि क्या वो क्रेडिट के योग्य हैं। क्लिक करते ही उनसे जीएसटी नंबर के जरिए कुछ चीज़ें वेरिफाई होंगी और उनका सिविल कितना बन रहा है, बेसिस कितना है आदि पता चलेगा।
अगले आधे घंटे में उन्हें लोन की सुविधा मिल जाती है जो 30 हजार से 5 लाख तक होती है। इस तरह के लोन का फ़ायदा ये होता है कि रिटेलर ज़रूरत का सामान खरीदकर ले आए और जब सामान बिक जाए तो पैसा लौटा देते हैं, अच्छे रिटेलर। 15 दिन तक उनसे कोई इंटरेस्ट नहीं लिया जाता है। इस तरह से वितरक बैंक में जाकर लोन लेने के लंबे प्रोसीज़र से बच सकते हैं। Nuture.farm बदलते वक़्त में कृषि की दिशा बदलने में बहुत अहम भूमिका निभा रहा है।
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