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पारंपरिक खेती की राह में अक्सर मौसम और मंडी की मार झेलने वाले किसान अब एक नई दिशा की ओर बढ़ रहे हैं। लोहरदगा, झारखंड (Lohardaga, Jharkhand) के किसान अब जरबेरा फूल की खेती (Gerbera Flower Farming) कर न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति मज़बूत कर रहे हैं, बल्कि गांव के लोगों को रोज़गार देकर पलायन रोकने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस बदलाव की प्रेरणादायक कहानी लिख रहे हैं सदर प्रखंड के रामपुर गांव के प्रगतिशील किसान शंभू सिंह (Shambhu Singh, a progressive farmer of Rampur village)।
पारंपरिक खेती को कहना ‘ना’
किसान शंभू सिंह ने पारंपरिक फसलों के साथ-साथ जरबेरा फूल की खेती शुरू कर एक मिसाल कायम की है। उन्होंने गांव में लीज़ पर ज़मीन लेकर पॉलीहाउस (Polyhouse) को बनाया और जरबेरा की खेती की शुरूआत की। शंभू सिंह बताते हैं, ‘पर्व-त्योहार के मौके पर जरबेरा के फूलों की मांग काफी बढ़ जाती है। इसकी बाज़ार में अच्छी कीमत मिलती है, जिससे पारंपरिक खेती के मुकाबले कई गुना अधिक मुनाफ़ा होता है।’
कम मेहनत, ज्यादा मुनाफ़ा
शंभू सिंह (Shambhu Singh) करीब 25 डिसमील ज़मीन में जरबेरा की खेती (Gerbera Flower Farming) कर रहे हैं। जरबेरा की ख़ासियत है कि इसमें एक बार पौधा लगाने के बाद करीब दो साल तक लगातार फूल मिलते रहते हैं। इसकी देखभाल भी आसान है और बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है, ख़ासकर शादी-विवाह, पूजा-पाठ और अन्य समारोहों के दौरान। इससे कम मेहनत और कम लागत में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।
रोज़गार के नए अवसर
इस खेती (Gerbera Flower Farming) का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि लोकल लेवल पर रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। गांव के कई लोग अब शंभू सिंह के फार्म पर काम करते हैं। मजदूर राजेश उरांव और अभय कुमार बताते हैं कि जरबेरा फूल की खेती में कम लोगों की जरूरत होती है, लेकिन प्रोडक्शन बेहतर होता है। इससे हमें गांव में ही काम मिल गया है, जिससे पलायन रुका है और उनके जीवनस्तर में सुधार आया है।
सरकारी योजनाओं का सहयोग
केंद्र सरकार की राष्ट्रीय बागवानी मिशन (National Horticulture Mission) जैसी योजनाओं ने किसानों के इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है। उद्यान पदाधिकारी संतोष कुमार बताते हैं, कि उनका विभाग किसानों को परंपरागत कृषि को छोड़ वैज्ञानिक कृषि प्रणाली को अपनाने के लिए जागरूक कर रहा है। हम लोग समय-समय पर प्रशिक्षण भी किसानों को देते हैं। लोहरदगा के किसान बागवानी को अपनाकर कम लागत में अच्छी आमदनी कमा पा रहे हैं।
आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम
लोहरदगा ((Lohardaga, Jharkhand)) के किसानों की ओर से जरबेरा फूल की खेती अपनाना सिर्फ एक आर्थिक बदलाव नहीं, बल्कि एक सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत है। इससे न केवल किसान आर्थिक रूप से सशक्त बन रहे हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है। ये साबित करता है कि सही मार्गदर्शन, तकनीक और सरकारी सहयोग से कृषि भी एक फायदा का बिज़नेस बन सकती है। शंभू सिंह जैसे किसान पूरे region के लिए एक प्रेरणा हैं, जो दिखाते हैं कि innovation और मेहनत से खेती की दशा और दिशा दोनों बदली जा सकती है।
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।
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