New World Screwworm: क्या है न्यू वर्ल्ड स्क्रूवॉर्म? जानिए भारत के 30 करोड़ पशुओं पर क्यों है मंडराता संकट!

न्यू वर्ल्ड स्क्रूवॉर्म (New World Screwworm) कोई साधारण कीट नहीं, बल्कि एक ख़तरनाक परजीवी है जो जीवित पशुओं के शरीर को अंदर से खा जाता है, उन्हें असहनीय पीड़ा देता है और फिर मौत के घाट उतार देता है। अमेरिकी सरकार और वैज्ञानिक (US government and scientists)इसके  प्रसार को रोकने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं

New World Screwworm: क्या है न्यू वर्ल्ड स्क्रूवॉर्म? जानिए भारत के 30 करोड़ पशुओं पर क्यों है मंडराता संकट!

अमेरिका (America) में इन दिनों एक ऐसा खतरनाक कीट तेजी से फैल रहा है जो पशुपालन के लिए एक बुरा सपना बन गया है। इसका नाम है न्यू वर्ल्ड स्क्रूवॉर्म (New World Screwworm)। ये कोई साधारण कीट नहीं, बल्कि एक ख़तरनाक परजीवी है जो जीवित पशुओं के शरीर को अंदर से खा जाता है, उन्हें असहनीय पीड़ा देता है और फिर मौत के घाट उतार देता है। अमेरिकी सरकार और वैज्ञानिक (US government and scientists)इसके  प्रसार को रोकने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं, लेकिन भारत के लिए चिंता की सबसे बड़ी वजह ये है कि अगर ये कीट यहां पहुंच गया, तो इसके रिज़ल्ट काफी ख़तरनाक होंगे।

क्या है ये न्यू वर्ल्ड स्क्रूवॉर्म (NWS)?

न्यू वर्ल्ड स्क्रूवॉर्म (Cochliomyia hominivorax) एक तरह की मक्खी (New World Screwworm) है, लेकिन इसकी आदतें किसी हॉरर फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं हैं। ये मक्खी अपने अंडे किसी भी जीवित पशु (गाय, भैंस, भेड़, बकरी, यहां तक कि कुत्ते और इंसानों के भी) के खुले घावों पर देती है। अंडों से निकलने वाले छोटे-छोटे कीड़े (लार्वा) घाव में घुसकर स्वस्थ मांस और ऊतकों को खाना शुरू कर देते हैं। ये प्रक्रिया घाव को और गहरा और बड़ा बना देती है, जिससे पशु को भारी पीड़ा होती है। टाइम पर इलाज न मिलने पर संक्रमण फैलता है, जिससे पशु की मृत्यु हो जाती है।

अमेरिका में कहर: एक चेतावनी

अमेरिका के कई राज्यों में इस कीट ने पशुपालकों के लिए संकट पैदा कर दिया है। पशुओं की अचानक मौत, दूध उत्पादन में भारी गिरावट, और मांस उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव की रिपोर्ट्स आ रही हैं। अमेरिका ने इसकी रोकथाम के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया हुआ है। जिसमें कीटनाशकों का छिड़काव, संक्रमित पशुओं को अलग करना और जागरूकता फैलाना शामिल है। लेकिन इसका लगातार फैलना ये साबित कर रहा है कि एक बार ये आबादी में घर कर ले, तो इसे कंट्रोल करना काफी मुश्किल और महंगा है।

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भारत के लिए ख़तरा क्यों है?

भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है और यहां पशुधन की आबादी काफी ज़्यादा है। लगभग 30 करोड़ से अधिक गाय-भैंस और करोड़ों की संख्या में बकरियां व भेड़ें इस कीट के लिए आसान शिकार बन सकती हैं। भारत की जलवायु और कई क्षेत्रों में पशुपालन की Traditional practices इस कीट के फैलने के लिए आइडियल कंडीशन देती हैं। अगर NWS भारत पहुंच गया, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे:

पशुओं की बड़े पैमाने पर मौत, संक्रमण तेजी से फैल सकता है।

आर्थिक तबाही: दूध और मांस का प्रोडक्शन घटेगा, जिससे किसानों को भारी नुकसान होगा और इन उत्पादों की कीमतें आसमान छू सकती हैं।

खाद्य सुरक्षा संकट: दूध की कमी एक National crisis पैदा कर सकती है।

बचाव ही एकमात्र उपाय

एक्सपर्ट का मानना है कि इस कीट को भारत की सीमा में प्रवेश करने से रोकना ही सबसे बुद्धिमानी भरा कदम होगा।

इसके लिए Vigilance and awareness सबसे ज़रूरी हथियार हैं।

घावों का तुरंत इलाज: किसी भी पशु के शरीर पर छोटा से छोटा घाव भी नजरअंदाज न करें। उसे तुरंत साफ करके दवा लगाएं और पट्टी बांध दें।

सफाई का ख़ास ध्यान: पशुशालाओं और आस-पास के area की नियमित सफाई करें। गंदगी और नमी मक्खियों को अट्रैक्ट करती हैं।

मक्खी नियंत्रण: मक्खियों की population कम करने के लिए वैज्ञानिक तरीके (जैसे कीटनाशक, जाल) अपनाएं।

तत्काल सूचना: अगर किसी पशु के घाव में सफेद कीड़े (लार्वा) दिखाई दें, तो तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें। उन्हें अलग कर दें।

न्यू वर्ल्ड स्क्रूवॉर्म का खतरा वास्तविक और गंभीर है। अमेरिका में उठाए गए कदम हमारे लिए एक चेतावनी हैं। सरकार को चाहिए कि वह सीमाओं पर सख्त निगरानी रखे और आयात नीतियों को इस खतरे के अनुरूप ढाले। लेकिन सबसे बड़ी जिम्मेदारी पशुपालकों की है। उनकी सजगता, पशुओं की नियमित देखभाल और छोटी सी सावधानी ही भारत के विशाल पशुधन और डेयरी उद्योग को इस भयानक संकट से बचा सकती है। समय रहते सचेत हो जाना ही सबसे बड़ा बचाव है। 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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