फ्री बीज से लेकर फसल बीमा तक! योगी सरकार दे रही किसानों को दोहरा लाभ, 31 अगस्त है लास्ट डेट

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एक साथ दो बड़ी सौगातें दी जा रही हैं। एक ओर जहां किसान फ्री में तिलहन बीज मिनीकिट (Oilseed Seed Minikit) पा सकते हैं। वहीं दूसरी ओर Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana (PMFBY) के तहत खरीफ फसलों का बीमा कराकर प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा (Protection from natural calamities) का फायदा उठा सकते हैं।

फ्री बीज से लेकर फसल बीमा तक! योगी सरकार दे रही किसानों को दोहरा लाभ, 31 अगस्त है लास्ट डेट

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के अन्नदाताओं के लिए राज्य सरकार की ओर से एक साथ दो बड़ी सौगातें दी जा रही हैं। एक ओर जहां किसान फ्री में तिलहन बीज मिनीकिट (Oilseed Seed Minikit) पा सकते हैं। वहीं दूसरी ओर Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana (PMFBY) के तहत खरीफ फसलों का बीमा कराकर प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा (Protection from natural calamities) का फायदा उठा सकते हैं। दोनों ही स्कीम के लिए अप्लाई करने की लास्ट डेट 31 अगस्त, 2025 तय की गई है। 

सिर्फ 2 किलो बीज से बदल सकते हैं किस्मत 

तोरिया (लाही) मिनीकिट

कृषि विभाग (Agriculture Department) की ओर से चल रही  ‘राज्य सहायतित निःशुल्क तिलहन बीज मिनीकिट वितरण, प्रदर्शन एवं प्रसार कार्यक्रम’ (‘State assisted free oilseed seed minikit distribution, demonstration and dissemination program’)  के तहत प्रदेश के सभी 75 ज़िलों के किसानों को तोरिया (लाही) फसल का दो किलोग्राम का फ्री बीज मिनीकिट दी जाएगी। इसका उद्देश्य तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देना और किसानों की आय में बढ़ोतरी करना है।

यूपी के कृषि निदेशक डॉ. पंकज कुमार त्रिपाठी  (UP Agriculture Director Dr. Pankaj Kumar Tripathi) के अनुसार, ये एक शानदार मौका है जिसके ज़रिए किसान बिना कोई लागत लगाए एक अतिरिक्त फसल का फायदा उठा सकते हैं। तोरिया की फसल कम अवधि (Short duration) की फसल है, जिसकी बुवाई सितंबर के पहले हफ्ते में की जा सकती है। ये उन क्षेत्रों के लिए ख़ासतौर से फायदेमंद है जहां कई प्राकृतिक आपदाओं (Natural Disasters) के कारण ख़रीफ फसल की बुवाई नहीं हो पाई या फसल नष्ट हो गई है। ये फसल रबी की मुख्य फसलों से पहले कटाई के लिए तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को एक्स्ट्रा आमदनी होती है।

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कैसे करें आवेदन?

इच्छुक किसानों (Interested Farmers) को 31 अगस्त, 2025 तक कृषि विभाग के पोर्टल (Agriculture Department Portal) agridarshan.up.gov.in पर जाकर ऑनलाइन अप्लाई करना होगा। ध्यान रहे, एक किसान केवल एक ही मिनीकिट पाने के पात्र हैं।  लाभार्थियों (Beneficiaries) का चयन ऑनलाइन लॉटरी के ज़रिये से किया जाएगा। चयनित किसानों को राजकीय कृषि बीज भंडारों (Government agricultural seed stores) से पीओएस मशीन (POS Machine) के जरिए बीज वितरित किया जाएगा।

प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा का कवच: PM फसल बीमा योजना

सरकार की दूसरी बड़ी पहल ख़रीफ फसलों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) है। इस स्कीम के तहत 31 अगस्त, 2025 तक फ़सल बीमा रजिस्ट्रेशन कराना Mandatory है। इस योजना का फायदा ये है कि यह किसानों को प्रकृति की मार से बचाती है।

स्कीम का फायदा 

इस स्कीम में सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, तूफान, भूस्खलन, आकाशीय बिजली और रोग-कीटों से फसल को होने वाले नुकसान की भरपाई की जाती है। इसके अलावा, अगर बुवाई न हो पाने या कटाई से पहले व बाद में फसल को नुकसान होता है, तो भी बीमा सुरक्षा दी जाती है।

कितना जमा करना होगा प्रीमियम?

इस स्कीम की सबसे बड़ी खासियत है किसानों का सिर्फ 20 फीसदी प्रीमियम देना। बाकी प्रीमियम का भुगतान सरकार करती है। इस ख़रीफ सीज़न में ज़िलों के लिए धान, मक्का, मूंगफली और उर्द (जायद फसल) को अधिसूचित किया गया है।  

कैसे करें रजिस्ट्रेशन? 

किसान अपने नजदीकी बैंक, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या सीधे योजना के आधिकारिक पोर्टल www.pmfby.gov.in पर जाकर ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं।

अवसर का उठाएं फायदा

31 अगस्त की अंतिम तिथि एक सुनहरे अवसर की तरह है। एक तरफ निःशुल्क बीज है जो अतिरिक्त आय का जरिया बन सकता है, तो दूसरी तरफ फसल बीमा है जो मेहनत की सुरक्षा करता है। जागरूक किसान इन दोनों योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी कृषि यात्रा को और अधिक सुरक्षित एवं लाभप्रद बना सकते हैं। समय सीमा समाप्त होने से पहले ही ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपना आवेदन करें और सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठाएं।

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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