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हरियाणा में 9 फ़सलों की बीमा-दरें तय, 31 जुलाई तक कराएँ फ़सल बीमा

जानें, इस बार कितनी होगी बीमे की किस्त, कितना मिलेगा नुकसान होने पर मुआवज़ा?

फसल बीमा योजना के ज़रिये किसानों को प्राकृतिक आपदाओं की वजह से होने वाले नुकसान की भरपाई की जाती है। किसानों को अपने नज़दीकी बैंक या बीमा कम्पनी या किसान ग्राहक सेवा केन्द्र से सम्पर्क करके फसल बीमा ज़रूर करवाना चाहिए। किसानों को बीमा की रकम को भी खेती की अनिवार्य लागत की तरह ही देखना चाहिए।

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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) के लिए हर साल बीमा की दरें यानी प्रीमियम का निर्धारण किया जाता है। इसी सिलसिले में हरियाणा सरकार ने साल 2021 के लिए 9 फ़सलों को बीमा लाभ के दायरे में रखने का निर्णय लिया है। इसके तहत, किसान चाहें तो खरीफ सीज़न में धान, मक्का, बाजरा और कपास के खेतों को बीमा करवा सकते हैं। इसी तरह, आगामी रबी सीज़न में गेहूँ, जौ, चना, सरसों और  सूरजमुखी की फसलों का बीमा करवाया जा सकता है।

फसल बीमा योजना के ज़रिये किसानों को प्राकृतिक आपदाओं की वजह से होने वाले नुकसान की भरपाई की जाती है। किसानों को अपने नज़दीकी बैंक या बीमा कम्पनी या किसान ग्राहक सेवा केन्द्र से सम्पर्क करके फसल बीमा ज़रूर करवाना चाहिए। किसानों को बीमा की रकम को भी खेती की अनिवार्य लागत की तरह ही देखना चाहिए। इस साल भी फसल बीमा करवाने की आख़िरी तारीख़ 31 जुलाई ही रखी गयी है।

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फसल बीमा से जुड़ी सावधानी

किसानों के लिए फसल बीमा योजना से ख़ुद को सुरक्षित करना भले ही स्वैच्छिक हो, लेकिन खेती-किसानी के लिए बैंकों से कर्ज़ लेने वाले किसानों को स्वाभाविक रूप से बीमा के लाभ से जोड़ा जाता है। इसलिए यदि कोई कर्ज़धारक किसान ख़ुद को फसल बीमा से अलग रखना चाहता है तो उसे 24 जुलाई तक अपने बैंक को इसके बारे में लिखित तौर पर बताना होगा। इसी तरह यदि कोई किसान अपने खेत के लिए पहले से तय की गयी फसल को बदलना चाहता है तो भी उसे ऐसे बदलाव के बारे में 29 जुलाई तक बैंक को लिखित रूप से सूचना देनी होगी।

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