Goat Farming: अपने क्षेत्र के अनुसार चुनें बकरियों की उन्नत नस्लें, ऐसे करें सफल बकरी पालन

भारत में खेती के साथ-साथ पशुपालन की परंपरा भी बहुत पुरानी है। आमतौर पर बड़े और मध्यम किसान गाय-भैंस जैसे […]

Goat Farming

भारत में खेती के साथ-साथ पशुपालन की परंपरा भी बहुत पुरानी है। आमतौर पर बड़े और मध्यम किसान गाय-भैंस जैसे पशु पालने में रूचि रखते हैं, जबकि भूमिहीन, सीमांत और लघु किसान अधिकतर बकरी पालन (Goat Farming) की ओर झुकाव रखते हैं। ये भी देखा गया है कि कम बारिश और कम उपजाऊ वाले क्षेत्रों में बकरी पालन अधिक लाभकारी साबित होता है। ऐसे क्षेत्रों में छोटी जोत वाले किसानों, मजदूरों और गरीब परिवारों के लिए बकरी पालन रोज़गार का महत्वपूर्ण साधन बन जाता है। इसी कारण बकरी को ‘गरीबों की कामधेनु’ भी कहा जाता है।

भारत में बकरियों की संख्या और स्वदेशी नस्लें

बकरी को एशिया महाद्वीप का पशुधन भी माना जाता है। यदि हम भारत की स्वदेशी नस्लों की बात करें, तो देश में बकरियों की लगभग 37 नस्लें रजिस्टर्ड हैं। मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की वर्ष 2022-23 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बकरियों की कुल संख्या लगभग 148.88 मिलियन है।

Goat Farming: अपने क्षेत्र के अनुसार चुनें बकरियों की उन्नत नस्लें, ऐसे करें सफल बकरी पालन

अपनी ज़रूरत और क्षेत्र अनुसार बकरी नस्ल चुनें

बकरी पालन (Goat Farming) शुरू करते समय सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि अपने क्षेत्र के अनुसार किस नस्ल की बकरी का चयन किया जाए। बकरियों की नस्लों को मुख्य रूप से दो तरीकों से विभाजित किया जाता है- उपयोगिता के आधार पर और जलवायु के आधार पर।

उपयोगिता के आधार पर बकरियों की नस्लें तीन प्रकार की होती हैं:

1. दूध देने वाली नस्लें
इनमें जमुनापारी, बीटल, जखराना जैसी नस्लें शामिल हैं।

2. दोगुनी उपयोग वाली (द्वि-उद्देशीय) नस्लें
वो नस्लें जिन्हें दूध और मांस दोनों के लिए पाला जाता है।
इसमें मुख्य रूप से बरबरी, उस्मानाबादी, मारवाड़ी जैसी नस्लें आती हैं।

3. केवल मांस वाली नस्लें
इस श्रेणी में मुख्य रूप से ब्लैक बंगाल नस्ल शामिल है, जो अपनी उच्च मांस उत्पादन क्षमता के लिए जानी जाती है।kisan of india instagram

जलवायु के आधार पर बकरी नस्लों का चयन

जलवायु के आधार पर बकरी नस्लों को चार प्रमुख समूहों में बांटा जाता है:

1. उत्तरी ठंडे पर्वतीय क्षेत्र
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में मुख्य रूप से गद्दी, चांगथांगी और चेगू नस्लें पाई जाती हैं। इस क्षेत्र की बकरियों में पश्मीना ऊन और उच्च गुणवत्ता वाला मांस, दोनों ही पाए जाते हैं।

2. उत्तर-पश्चिमी शुष्क क्षेत्र
राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में सिरोही, मारवाड़ी, जखराना, बीटल, बरबरी, जमुनापारी, मेहसाना, गोहिलवाड़ी, झालावाड़ी, कच्छी और सूरती नस्लें पाई जाती हैं। ये नस्लें मुख्य रूप से दूध और मांस दोनों के उत्पादन के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं।

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3. दक्षिणी क्षेत्र
महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों में मुख्य रूप से संगमनेरी, उस्मानाबादी और मालाबारी नस्लें पाई जाती हैं। ये नस्लें मुख्यतः मांस उत्पादन के लिए पाली जाती हैं।

4. पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्र
बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम तथा देश के पूर्वोत्तर राज्यों में गंजम और ब्लैक बंगाल नस्लें पाई जाती हैं। इनमें से ब्लैक बंगाल नस्ल अपने उत्कृष्ट मांस उत्पादन और उच्च प्रजनन क्षमता के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

Goat Farming: अपने क्षेत्र के अनुसार चुनें बकरियों की उन्नत नस्लें, ऐसे करें सफल बकरी पालन

बकरी पालन (Goat Farming) के लिए आवास

बकरी पालन में आवास का निर्माण इस तरह किया जाता है कि बकरियों को रहने के लिए सुरक्षित जगह के साथ-साथ खुला मैदान भी उपलब्ध हो। आवास बनवाते समय यह ध्यान रखना आवश्यक है कि संरचना ऊंचे स्थान पर हो, जहाँ बरसात का पानी इकट्ठा न हो सके। उम्र के अनुसार प्रति पशु को बाहर और अंदर लगने वाली जगह कुछ इस प्रकार है:

उम्र (माह में) अंदर लगने वाली जगह वर्ग मीटर में बाहर लगने वाली जगह वर्ग मीटर में
0-3 0.2-0.25 0.4-0.5
3-6 0.5-0.75 1.0-1.5
6-12 0.75-1.0 1.5-2.0
12 माह से अधिक 1.0 2.0
वयस्क बकरी के लिए 1.5 3.0
ग्याभिन और दुधारू पशु और बकरा के लिए 1.5-2.0 3.0-4.0

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सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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