गेहूं की फसल में कब करे सिंचाई, कीटों और खरपतवार से बचाव के तरीके, जाने यहां..

गेहूं की फसल में आवश्यकता से ज्यादा सिंचाई करने पर उत्पादन पर प्रभाव पड़ सकता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, […]

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गेहूं की फसल में आवश्यकता से ज्यादा सिंचाई करने पर उत्पादन पर प्रभाव पड़ सकता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र इंदौर ने गेहूं उत्पादक किसानों को अच्छे उपज के लिए ये सलाह दी है। संस्थान के अनुसार जरूरत से ज्यादा सिंचाई करने से फसल गिर सकती है, दानों में दूधिया धब्बे आ सकते हैं और उपज कम हो सकती है। बालियां आने के बाद फव्वारा विधि से सिंचाई न करें, नही तो फूल गिरने, दानों का मुंह काला पड़ने, करनाल बंट या कंडुआ रोग का डर रहता है।

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कब-कब करें सिंचाई

  • संस्थान की सलाह के मुताबिक गेहूं के मध्य क्षेत्र की काली मिट्टी और 3 सिंचाई वाली खेती में पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद दें।
  • दूसरी 35-40 दिन और तीसरी सिंचाई 70-80 दिन में करना उपयोगी होता है।पूर्ण सिंचित वाले फसल में बुवाई से 20-20 दिन के अंतराल पर 4 सिंचाई करें।
  • सर्दी वाले दिनों में फसलों में स्प्रिंकलर से हल्की सिंचाई करना सही होता है।
  • 500 ग्राम थायो यूरिया 1000 लीटर पानी में घोल कर छिडक़ाव करना चाहिए।
  • एक एकड़ में 8-10 किलोग्राम सल्फर पाउड का भुरकाव करें या घुलनशील सल्फर 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिडक़ाव करें।

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खाद-उर्वरक की मात्रा

  • गेहूं में नत्रजन, स्फुर और पोटाश 4:2:1 के अनुपात में दें। असिंचित खेती में 40:20:10, सीमित सिंचाई में 60:30:15 या 80:40:20, सिंचित खेती में 120:60:30 तथा देर से बुवाई में 100:50:25 किलोग्राम/ हेक्टेयर के अनुपात में उर्वरक दें।
  • पूर्ण सिंचित खेत में नत्रजन की आधी मात्रा तथा स्फुर व पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई से पहले मिट्टी में ओर दें। बचे हुए नत्रजन को पहली सिंचाई के साथ दें।
  • खेत के उतने हिस्से में ही यूरिया दें, जितने में उसी दिन सिंचाई दे सकें। यूरिया को सही से फैलाएं।

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खरपतवार नियंत्रण पर दें ध्यान

  • गेहूं फसल में दो प्रकार के खरपतवार होते हैं। चौड़ी पत्ती वाले बथुआ, सेंजी, दूधी ,कासनी, जंगली पालक, जंगली मटर, कृष्ण नील, हिरनखुरी। पतली पत्ती वाले मोथा, जंगली जई और कांस।
  • खरपतवारनाशक का उपयोग नहीं करने की स्थिति में 40 दिन से पहले डोरा, कुल्पा या हाथ से निंदाई-गुड़ाई कर खरपतवार निकाल दें।
  • खरपतवारनाशक के उपयोग में , चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार के लिए 2 ,4 डी की 0.65 किग्रा. या मैटसल्फ्यूरॉन मिथाइल की 4 ग्राम मात्रा/हे. की मात्रा में दें। बुवाई के 30-35 दिन बाद, जब खरपतवार दो-चार पत्ती वाले हों, छिडक़ाव करें।
  • पतली पत्ती वाले खरपतवार के लिए प्रति हेक्टेयर में क्लौडीनेफॉप प्रौपरजिल 60 ग्राम की दर से 25-35 दिन में फसल में छिडक़ाव करने से दोनों तरह के खरपतवारों पर नियंत्रण किया जा सकता है।

मोहू कीट के प्रकोप से बचाव

इन दिनों फसल पर जड़ मोहू कीटों का प्रकोप देखने को।मिल रहा है। यह कीट गेहूं के पौधे को जड़ से काट देते हैं। इसके नियंत्रण के लिए प्रति हेक्टेयर में क्लोरोपाइरीफॉस 20 ईसी दवाई का 5 लीटर बालू रेत में मिलाकर खेत में नमी होने पर डालें। या फिर इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल 250 मिली लीटर या थाई मैथोक्सेम की 200 ग्राम/हे. की दर से 300-400 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें।

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