बैंगन की खेती (Brinjal Farming) पार्ट 2: कैसे करें बैंगन में लगे मुख्य कीट एवं रोगों का इलाज? इन तरीकों के इस्तेमाल से अच्छी होगी पैदावार 

बैंगन की खेती में अलग-अलग रोगों का खतरा रहता है। इस लेख में हम आपको ICAR द्वारा निर्देशित किए गए उपचारों के बारे में बताने जा रहे हैं। 

बैंगन की खेती

मैंने आपको बैंगन की खेती (Eggplant Farming) पार्ट 1 में इसकी खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी से जुड़ी जानकारी दी थी। साथ ही अच्छी पैदावार के लिए बैंगन की उन्नत किस्मों के बारे में भी बताया था। इस बीच बैंगन की खेती करने वाले कुछ किसानों ने हमसे संपर्क किया। उनके सवालों में से एक मुख्य सवाल बैंगन की फसल में लगने वाले रोगों को लेकर था कि कैसे रोगों की रोकथाम की जाए। इसके बारे में जानने के लिए फिर मैंने अपनी खोज शुरू की। पहले मैंने बैंगन के मुख्य रोगों के बारे में जाना। इसमें मेरी मदद संयंत्र संरक्षण, संगरोध और भंडारण निदेशालय (Directorate of Plant Protection, Quarantine & Storage) की आधिकारिक वेबसाइट ने की। इसके बाद, मैं ICAR की आधिकारिक वेबसाइट पर पहुंचा, जहां मुझे बैंगन की खेती से जुड़े रोकथाम के तरीकों के दस्तावेज मिले। इन सभी को एक साथ रखकर,  आज मैं इस लेख में आपको बैंगन की खेती में लगने वाले मुख्य कीट एवं रोगों से रोकथाम से जुड़ी प्रमुख बातें बताने जा रहा हूं।

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बैंगन की खेती में यांत्रिक नियंत्रण (Mechanical Control)

बैंगन की खेती (Brinjal Farming) पार्ट 2: कैसे करें बैंगन में लगे मुख्य कीट एवं रोगों का इलाज? इन तरीकों के इस्तेमाल से अच्छी होगी पैदावार 
तस्वीर साभार: Krishisewa(Right)

बैंगन की खेती (Brinjal Farming) पार्ट 2: कैसे करें बैंगन में लगे मुख्य कीट एवं रोगों का इलाज? इन तरीकों के इस्तेमाल से अच्छी होगी पैदावार 

  • फेरोमोन ट्रैप (Pheromone Trap): बैंगन को तना एवं फल छेदक (Fruit and Shoot Borer) से बचाने के लिए इसे इस्तेमाल किया जाता है। ये एकीकृत कीट प्रबंधन (Integrated Pest Management) में से एक है। इसमें लार्वा पैरासिटोइड्स (larval parasitoids) या लयूसिन ल्योर को छोड़ दिया जाता है। इस उपकरण में लार्वा यानि ल्योर और एक ट्रैप का इस्तेमाल किया जाता है। ल्योर का उपयोग कीड़ों को आकर्षित करने के लिए किया जाता है। ट्रैप के अंतर्गत ऊपर एक ढकन होता है, जो ल्योर को बारिश और सूरज की रोशनी से बचाता है। नीचे की तरफ एक छला रहता है, जिसमें कीटों को एकत्र करने के लिए थैली फसाई जाती है। ये उपकरण केवल एक ही बार खरीदना होता है। इसमें लगने वाले फेरोमोन गंध वाले ल्योर को दो से तीन हफ़्ते में बदलना पड़ता है। इस तरीके से कीड़े अपनी संख्या नहीं बढ़ा पाते हैं और बैंगन की फ़सल को नुकसान नहीं पहुंचता है। इसे फसल की ऊंचाई से 1 या 2 फ़ीट ऊपर लगाया जाता है। ICAR के मुताबिक, 4 से 5 ट्रैप प्रति एकड़ लगाने चाहिए। एक फेरोमोन ट्रैप की कीमत बाज़ार में लगभग 45 रुपये तक पड़ती है।

स्टिकी ट्रैप - बैंगन की खेती

  • स्टिकी ट्रैप (Sticky Trap): बैंगन की खेती को सफेद मक्खी (White Fly), एफ़िड (Afid) और थ्रिप्स (Thrips) से बचाने के लिए इसे इस्तेमाल किया जाता है। इसमें दो रंग की शीट का इस्तेमाल होता है, जिसपर कोई चिपचिपा पदार्थ लगाया जाता है। इसमें कीट रंग से आकर्षित होकर इससे चिपक जाते हैं और नष्ट हो जाते हैं। पीले रंग की शीट को सफेद मक्खी और एफ़िड कीट के लिए, नीले रंग की शीट को थ्रिप्स के लिए प्रयोग किया जाता है। इस ट्रैप से लगभग 50 प्रतिशत तक कीटों से नियंत्रण मिल जाता है। ICAR के मुताबिक, लगभग 8 से 12 स्टिकी ट्रैप प्रति हेक्टेयर लगाने चाहिए। स्टिकी ट्रैप की कीमत बाज़ार में लगभग 20 से 25 रुपये तक पड़ती है।
  • लाइट ट्रैप (Light Trap): बैंगन की खेती को तना एवं फल छेदक से बचाने के लिए इसका भी इस्तेमाल किया जाता है। इस ट्रैप के लिए रात में बल्ब जलाकर, नीचे एक बर्तन में पानी और केरोसिन तेल डालकर रखते हैं। इस ट्रैप का सौर ऊर्जा, बैट्री और बिजली द्वारा संचालित कर सकते हैं। इसे सूर्य अस्त के बाद दो से तीन घंटे तक चालू रखा जाता है। एक लाइट ट्रैप को प्रति हेक्टेयर लगाना चाहिए। लाइट ट्रैप से लगभग 50 से 60 प्रतिशत तक कीट नियंत्रण हो जाता है।

बैंगन की खेती में सूत्रकृमि (Nematode) से कैसे बचाएँ? 

बैंगन की खेती में सूत्रकृमि यानि नेमाटोड (Nematode) एक गंभीर समस्या है। ICAR की तरफ से किसानों को एकीकृत प्रबंधन (Integrated Management) को अपनाने की सलाह दी जाती है। इसके लिए फसल चक्र (Crop Rotation) को अपनाना चाहिए। खेत की गर्मी (मई-जून) में गहरी जुताई करें। इसके बाद मिट्टी के सौरकरण (Soil Polarization) के लिए 4 से 5 सप्ताह मिट्टी को काली पॉलीथीन शीट से ढककर रख दें। बुवाई और रोपाई से पहले मिट्टी में 5 किलोग्राम पैसिलोमायस लिलासिनस (Paecillomyces lilacinus) के साथ 100 किग्रा एफवाईएम (FYM) प्रति हेक्टेयर डालना चाहिए। इसके अलावा, 2.5 टन नीम या अरंडी की खली(Castor Cake) डाल सकते हैं। बैंगन की सूत्रकृमि प्रतिरोधी किस्मों का प्रयोग करना चाहिए जैसे काली सुंदरता (Black Beauty), विजया (Vijaya), बनारस (Banaras) और जयंती (Jayanti)।

बैंगन की खेती में मुख्य रोग एवं कीट

बैंगन की खेती (Brinjal Farming) पार्ट 2: कैसे करें बैंगन में लगे मुख्य कीट एवं रोगों का इलाज? इन तरीकों के इस्तेमाल से अच्छी होगी पैदावार 

बैंगन की खेती को मुख्य कीट एवं रोगों से कैसे बचाएँ?

  • तना एवं फल छेदक (Fruit and Shoot Borer)

ये कीट बैंगन को काफी नुकसान पहुंचाता है। इसका लार्वा या ल्योर पत्ती पर छेद बना देते हैं। इसके बाद उसे अंदर से खाते हैं जिससे टहनी का विकास रुक जाता है। फिर आगे का भाग सुख जाता है। फल आने पर कीट इनमें छेद कर गुदे एवं बीज को खा जाते हैं।

उपचार: इसकी रोकथाम के लिए प्रभावित शाखाओं को कीट सहित तोड़कर नष्ट कर देना चाहिए। फसल में फेरोमोन ट्रैप लगाकर इस कीट के प्रभाव को कम किया जा सकता है। बैंगन पर कीट का प्रकोप दिखाई देने पर नीम के रस का 4 प्रतिशत की दर से 1 लीटर पानी में घोल बनाकर 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करना चाहिए। पूर्ण नियंत्रण न होने की दशा में कीटनाशी दवा जैसे डेल्टामेथ्रिन (डेसिस 2.8 ईसी) (deltamethrin (Decis 2.8 EC) 1 मिलीलीटर को 1 लीटर पानी में घोल बनायें और छिड़काव करें। इसके अलावा, मैलाथियान 50ईसी (malathion50EC) 1.5 मिलीलीटर को 1 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं।

  • जैसिड्स (Jassids)

ये हरे रंग के कीट पत्तियों की निचली सतह से लगकर रस चूसते हैं। इससे पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और पौधे कमजोर हो जाते हैं।

उपचार: इससे नियंत्रण के लिए रोपाई से पहले पौधों की जड़ों को कांफिडर(Confidor) दवा की 1.25 मिलीलीटर मात्रा को प्रति 1 लीटर पानी की दर से बने घोल में 2 घंटे तक डूबोयें।

  • डैम्पिंग ऑफ़ या आर्द्र गलन (Damping off or Wet thawing)

ये पौधशाला का प्रमुख फफूंद जनित रोग है। इसका प्रकोप दो अवस्थाओं में देखा गया है। पहली अवस्था में पौधे ज़मीन की सतह से बाहर निकलने के पहले ही मर जाते हैं। दूसरी अवस्था में अंकुरण के बाद पौधे ज़मीन की सतह के पास गल कर मर जाते हैं।

उपचार: इसकी रोकथाम के लिए बाविस्टिन (Bavistin) नाम की फफूंदनाशी दवा को 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचार करें। साथ ही अंकुरण के बाद 3 मिलीलीटर ब्लूकॉपर-50 (Blue Copper-50) दवा को प्रति 1 लीटर पानी में मिलाकर क्यारी की मिट्टी को भिगो दें।

  • जीवाणु –जनित मुरझा रोग (Bacterial wilt disease)

यह बैंगन की खेती में प्रमुख रोगों में से एक है। इसके प्रकोप से पौधे मर जाते हैं।

उपचार: इसके बचाव के लिए प्रतिरोधी किस्में जैसे-स्वर्ण प्रतिभा, स्वर्ण श्यामली लगानी चाहिए। लगातार बैंगन को एक जगह पर न लगाकर अन्य सब्जियों का फसल चक्र अपनाना चाहिए। रोपाई के पहले पौधों की जड़ों को स्ट्रेप्टोसाइक्लिन (streptocycline) को 500 मिलीग्राम प्रति 1 लीटर पानी के घोल में आधे घंटे तक डुबाएं।

  • बैंगन में घुन के संक्रमण को नियंत्रण करने के लिए प्रोपरगाइट 57% ईसी (Proprigite 57% EC)  को 400 मिलीलीटर की दर से 200 लीटर पानी में प्रति एकड़ छिड़काव कर सकते हैं।

इन सभी रोगों एवं कीटों से उपचार के लिए पहले एकीकृत कीट प्रबंधन पद्धति को अपनाना चाहिए ताकि कम लागत में अच्छी और रसायन-रहित बैंगन का उत्पादन किया जा सके। कोई भी रासायनिक कीटनाशक का छिड़काव करने से पहले आर्थिक क्षति स्तर का आकलन कर लेना चाहिए।

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