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पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में सरकारें दे रही हैं कपास की खेती को विशेष प्रोत्साहन

बीटी कपास की खेती पर जोर, ताकि किसानों की बढ़े कमाई

केन्द्रीय कपास अनुसन्धान केन्द्र की ओर हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के लिए बीटी कपास की 51 किस्मों का अनुमोदन

कपास की माँग और इसकी खेती से किसानों को होने वाली बेहतर कमाई को देखते हुए पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की सरकारें विशेष प्रोत्साहन और जागरूकता अभियान की तैयारी में है। तीनों राज्यों में करीब 11 लाख हेक्टेयर पर कपास की खेती होती है। यक़ीनन, सरकार की कोशिशें रंग लायीं तो इन राज्यों में कपास की खेती का रक़बा बढ़ेगा और किसानों की आमदनी भी बेहतर होगी।

पंजाब में प्रोत्साहन

दरअसल, कपास की बुआई के लिए अप्रैल-मई का वक़्त सबसे मुफ़ीद है। हालाँकि, इसे जून के शुरुआती दिनों तक भी बोया जाता है। इसे देखते हुए पंजाब के कृषि विशेषज्ञों ने संकर नस्ल ‘बीटी कपास’ के साथ ही 10 प्रतिशत ज़मीन में ‘गैर-बीटी कपास’ यानी देसी नस्ल की बुआई करने की सलाह किसानों को दी है। क्योंकि ऐसा करने से कपास की फसल पर कीटों का हमला कम होता है।

पंजाब बीज निगम रियायती दरों पर कपास के बीज बेच रहा है। जिन किस्मों की सरकार सिफ़ारिश करती है, उसके बीजों पर प्रति बैग 1,000 रुपये की सब्सिडी भी मिल रही है। पंजाब के कृषि विस्तार विभाग के प्रवक्ता के मुताबिक, सरकार ने चालू मौसम में 2 लाख एकड़ को कपास की खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। इसीलिए बम्पर पैदावार पाने के लिए किसानों को उपजाऊ ज़मीन चुनने और प्रति एकड़ 18-20 हज़ार पौधे लगाने की सलाह दी गयी है।

कपास की खेती
कपास की खेती – तस्वीर साभार: agrifarming

हरियाणा में प्रशिक्षण अभियान

हरियाणा का सिरसा ज़िला कपास की खेती में सबसे आगे है। यहाँ 2.08 लाख हेक्टेयर पर कपास की खेती होती है। इसे राज्य भर में प्रोत्साहित करने के लिए हरियाणा कृषि विभाग के विशेषज्ञों ने अपने अफ़सरों को प्रशिक्षित किया ताकि वो गाँव-गाँव में जाकर किसानों के शिविर लगाकर उन्हें ज़रूरी मशविरा दे सकें। एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में किसानों को कपास की खेती से जुड़ी समस्याओं और उसके निदान के बारे में बताया जाएगा।

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नागपुर स्थित केन्द्रीय कपास अनुसन्धान केन्द्र ने हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के लिए बीटी कपास की 51 किस्मों को अनुमोदित किया है। इनकी बुआई के लिए ही राज्य में किसानों को जागरुक किया जाएगा ताकि किसानों को अच्छी पैदावार मिल सके। कृषि विकास केन्द्र के विशेषज्ञों के मुताबिक, लम्बी अवधि वाली संकर किस्मों की बुआई 15 मई से पहले करना लाभकारी होगा, क्योंकि अगेती कपास में बीमारियों का डर कम रहता है। कपास की शुरुआती अवस्था में भी ज़्यादा जहरीले कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करें, क्योंकि इससे फसल के मित्र कीट भी कम हो जाते हैं।

Kapas Ki Kheti - Kisan of India
हरियाणा का सिरसा ज़िला कपास की खेती में सबसे आगे

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  • बीटी कपास बीज की अनुमोदित किस्में
  • अमर बायोटेक लिमिटेड: ABCH 243, ABCH 4899, ABCH 254
  • अजीत सीड्स प्राइवेट लिमिटेड: ACH 133-2, ACH 155-2, ACH 177-2, ACH 33-2
  • अंकुर सीड्स प्राइवेट: अंकुर 3224, अंकुर 3228, अंकुर 3244, अंकुर 8120, अंकुर जस्सी
  • बायोसिड श्रीराम जेंटिस प्राइवेट लिमिटेड: BIO 2113-2, BIO 2510-2, BIO 311-2, BIO 841-2, BIO 846-2
  • जेके सीड्स प्राइवेट लिमिटेड: JKCH 0109, JKCH 1050, JKCH 1947, JKCH 8935, JKCH 8940
  • कोहिनोर: KSCH 207
  • माहिको प्राइवेट लिमिटेड: MRC 7041, MRC 7365
  • न्यूचिवूड: NCS 495, NCS 855, NCS 9013, NCS 9024
  • टिएरा एग्रोटेक: NSPL 2223, NSPL 252, NSPL 531
  • प्रभात एग्री बायोटेक लिमिटेड: PCH 877, PCH 9611
  • प्रवरदान सीड्स लिमिटेड: PRCH 333
  • रासी सीड्स लिमिटेड: RCH 314, RCH 602, RCH 650, RCH 653, RCH 773, RCH 776, RCH 791, RCH 809, शक्ति 9
  • सौर कृषि प्राइवेट लिमिटेड: सौर 75
  • सुपर सीड्स प्राइवेट लिमिटेड: SUPER 965
  • विक्रम सीड्स प्राइवेट लिमिटेड: VICH 308
  • सीड्स वक्र्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड: SWCH 4704, SWCH 4711, SWCH 4744, SWCH 4755
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