किसानों का Digital अड्डा

‘किसान सारथी’ एप ने किसानों को कृषि विज्ञान केन्द्रों और बाज़ार से जोड़ा

किसानों को उनकी भाषा में जानकारियाँ देगा ‘किसान सारथी’

‘किसान सारथी’ एप ऐसा डिज़िटल प्लेटफॉर्म है जो किसानों को फसल और खेती से जुड़ी तमाम जानकारियाँ देने में सहायक होगा। इसकी मदद से किसानों को अपनी फसल और फल-सब्ज़ियों को बेचने में भी सहूलियत होगी। ‘किसान सारथी’ की बदौलत किसानों को खेती-किसानी से जुड़ी आधुनिक तकनीक सीखने और दुनिया भर में खेती के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम प्रयोगों के बारे में जानने में भी मदद मिलेगी।

भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद (ICAR) ने देश भर में फैले कृषि विज्ञान केन्द्रों (KVK) से किसानों के जुड़ने के लिए किसान सारथी नामक एप तैयार किया है। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी भाषा में सही वक़्त पर सटीक वैज्ञानिक सलाह सुलभ करवाना है। किसान सारथी एप को पहले चरण में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, और मध्यप्रदेश के किसानों के लिए शुरू किया है, लेकिन जल्द ही इसका विस्तार अन्य राज्यों के लिए भी किया जाएगा।

किसान सारथी एप ऐसा डिज़िटल प्लेटफॉर्म है जो किसानों को फसल और खेती से जुड़ी तमाम जानकारियाँ देने में सहायक होगा। इसकी मदद से किसानों को अपनी फसल और फल-सब्ज़ियों को बेचने में भी सहूलियत होगी। किसान सारथी की बदौलत किसानों को खेती-किसानी से जुड़ी आधुनिक तकनीक सीखने और दुनिया भर में खेती के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम प्रयोगों के बारे में जानने में भी मदद मिलेगी।

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किसानों को बाज़ार से भी जोड़ेगा किसान सारथी

ICAR के 93 वें स्थापना दिवस के मौके पर 16 जुलाई को केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से किसान सारथी एप को लॉन्च किया। इस मौके पर वैष्णव ICAR के वैज्ञानिकों से कहा कि वो किसानों की फसल को उनके खेतों से गोदामों, बाज़ारों और उन स्थानों पर तक पहुँचाने के लिए नयी तकनीकों पर शोध करें जहाँ से उन्हें न्यूनतम नुकसान के साथ अपने कृषि उत्पादों को उचित दाम पाने की सुविधा मिल सके।

उन्होंने विश्वास जताया कि ‘किसान सारथी’ एप न सिर्फ़ किसानों से संवाद क़ायम करने में सहायक होगी, बल्कि ICAR की कृषि विस्तार, शिक्षा और अनुसन्धान से जुड़ी गतिविधियों के लिए भी बेहद मूल्यवान साबित होगी। उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय किसान कल्याण, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालयों की सभी आवश्यक सहायता के लिए हमेशा तैयार रहेगा। वैष्णव ने बताया कि उनके मातहत ही काम कर रहा रेल मंत्रालय भी फसलों की ढुलाई में लगने वाले समय को घटाने की योजनाएँ बना रहा है।

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खेती-किसानी में आईटी सेक्टर की बढ़ती भूमिका

बदलते वक़्त के साथ खेती-किसानी लगातार आधुनिक होती जा रही है। कई तरह की मॉडर्न फ़ार्मिंग टेक्नोलॉजी विकसित हो रही है। पिछले कुछ सालों में किसानों को देश में खेती को कुशल बनाने के लिए अनेक नयी तकनीकों से रूबरू कराया जा रहा है। खेती को सुरक्षित, आर्थिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में सूचना प्रौद्योगिकी यानि आईटी सेक्टर मुख्य भूमिका निभा रहा है।

किसान भी खेती से जुड़ी अपनी समस्याओं से निपटने, कृषि की नयी तकनीकों और प्रयोगों को सीखने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। किसानों के लिए ऐसे कई पोर्टल जहाँ खेती-किसानी से जुड़ी जानकारियाँ सुलभ हैं। सरकार की ओर से संचालित ई-चौपाल, ग्रामीण ज्ञान केन्द्र, ई-कृषि, किसान कॉल सेंटर जैसी योजनाएँ सूचना प्रौद्योगिकी की ही देन हैं।

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