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चौधरी चरण सिंह की स्मृति में मनाया जाता है ‘राष्ट्रीय किसान दिवस’, खत्म की थी देश में जमींदारी प्रथा

चौधरी चरण सिंह ने जमींदारी उन्मूलन विधेयक बनाया था जिसके आधार पर उत्तरप्रदेश में 1 जुलाई 1952 को जमींदारी प्रथा खत्‍म हुई थी और गरीबों को उनका अधिकार मिला था। इसके बाद इन सुधारों को पूरे देश में लागू किया गया।

बहुत कम लोग जानते हैं कि ‘राष्ट्रीय किसान दिवस’ प्रसिद्ध किसान नेता तथा देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की स्मृति में मनाया जाता है। चौधरी चरण सिंह के जन्मदिवस को ही ‘किसान दिवस’ के रूप में मनाने की शुरूआत वर्ष 2001 में तत्कालीन वाजपेयी सरकार द्वारा की गई थी। चौधरी चरण सिंह ने अपने जीवनकाल में किसानों के जीवन और स्थितियों को बेहतर बनाने के लिए कई नीतियों की शुरूआत की थी।

किसान परिवार में जन्मे थे चौधरी चरण सिंह

उनका जन्म एक पारंपरिक किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने एक राजनीतिज्ञ के रूप में अपनी भूमिका को बखूबी निभाया और किसानों के हित में कई नई योजनाएं शुरु की। देश में सबसे पहले चौधरी चरण सिंह ने जमींदारी उन्मूलन विधेयक बनाया था जिसके आधार पर उत्तरप्रदेश में 1 जुलाई 1952 को जमींदारी प्रथा खत्‍म हुई थी और गरीबों को उनका अधिकार मिला था। इसके बाद इन सुधारों को पूरे देश में लागू किया गया।

1952 में बनाए गए कृषि मंत्री

इसके अलावा भी उन्होंने कई सुधारवादी विधेयक लागू करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1949 में उन्होंने यूपी विधानसभा में कृषि उत्पादन बाजार विधेयक पेश किया। इसके बाद वर्ष 1952 में कृषि मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला और अगले ही वर्ष उन्होंने जमींदारी प्रथा को समाप्त कर दिया। स्वयं के जन्मदिन अर्थात् 23 दिसंबर 1978 को उन्होंने किसान ट्रस्ट की स्थापना की और देश के किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जुलाई 1979 से जनवरी 1980 तक चौधरी चरण सिंह ने देश के पांचवे प्रधानमंत्री के रूप में भी कार्यभार संभाला। किसानों के हितार्थ किए गए उनके कार्यों से प्रेरित होकर ही सरकार ने उनके जन्मदिवस को ‘राष्ट्रीय किसान दिवस’ के रूप में मनाने की शुरुआत की।

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