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शेखावटी में प्याज़ की खेती भले ही जुआँ हो, लेकिन है फ़ायदे का दाँव

खेती-किसानी का तरीका सही हो तो प्याज़ की खेती में काफ़ी फ़ायदा है

प्याज़ की खेती में बीज के बाद सबसे ख़ास चीज़ है सिंचाई, क्योंकि खेत में नमी के कम या ज़्यादा होने का पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। पैदावार की अच्छी क्वालिटी होने पर ही उपज का बढ़िया दाम मिल पाता है। वर्ना, किसान की उम्मीदों पर पानी फिरने का जोख़िम रहता है।

शेखावटी में प्याज़ की खेती (Onion cultivation in Shekhawati): महाराष्ट्र का नासिक ज़िला और इसकी लासलगाँव मंडी का प्याज़ की पैदावार और इसके कारोबार में भले ही ऊँचा मुकाम हो, लेकिन राजस्थान के सीकर ज़िले के प्याज़ का डंका भी कम नहीं बजता। सीकर यानी शेखावटी इलाके के प्याज़ का स्वाद अपने मीठेपन की वजह से पूरे देश में ख़ास पहचान रखता है।

गर्मियों में शेखावटी का प्याज़ उत्तर भारतीय राज्यों में बहुतायत में बिकता है। सीकर कृषि उपज मंडी से रोज़ाना दर्ज़नों ट्रक शेखावटी का प्याज़ लेकर जम्मू, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, दिल्ली  और उत्तर प्रदेश की तमाम मंडियों के लिए निकलते रहते हैं।

शेखावटी में प्याज़ की खेती (Onion cultivation in Shekhawati)
शेखावटी में प्याज़ की खेती (Onion cultivation in Shekhawati)

शेखावटी के प्याज़ से अपनी खेती-किसानी को चमकाने वाले किसान बाबू लाल ने किसान ऑफ़ इंडिया से अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि शेखावटी प्याज़ की लागत ज़्यादा नहीं है। लेकिन बुआई से लेकर कटाई तक कई सावधानियाँ रखना ज़रूरी है। सबसे ख़ास ध्यान बीज बनाते वक़्त रखना पड़ता है क्योंकि उस वक़्त रोग लगने का खतरा सबसे ज़्यादा होता है। इसके लिए बाबू लाल नर्सरी में पौधे तैयार करने से पहले जैविक खेती की तकनीकों और प्याज़ की खेती में गोबर खाद का इस्तेमाल करते है।

बुआई के बाद प्याज़ के पौधों को रोपाई लायक बनने में करीब 45 दिन लगते हैं। इस दौरान खेतों को तैयार करना और सही ढंग से पौधे लगाने की चुनौती होती है। प्याज़ की खेती में सबसे ख़ास चीज़ है सिंचाई, क्योंकि खेत में नमी के कम या ज़्यादा होने का पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। पैदावार की अच्छी क्वालिटी होने पर ही उपज का बढ़िया दाम मिल पाता है। वर्ना, किसान की उम्मीदों पर पानी फिरने का जोख़िम रहता है।

Babu Lal - Sikar, Rajasthan
Babu Lal – Sikar, Rajasthan

बाबू लाल छोटी जोत वाले किसान हैं। उनके पास करीब 15 बीघा जमीन है। इसमें से 5-6 बीघे में वो प्याज़ की खेती करते हैं। बाकी में गेहूँ, रिजका (चारा) और सब्ज़ियाँ उगाते हैं। बाबू लाल का कहना है कि बढ़िया मुनाफ़ा की उम्मीद के बावजूद प्याज़ की खेती किसी जुएँ से कम नहीं, क्योंकि बेमौसम की बारिश या ओला वृष्टि से प्याज़ की फसल को ज़बरदस्त नुकसान होता है। इससे फसल की लागत का निकलना भी भारी पड़ जाता है। यही वजह है कि अन्य राज्यों के प्याज़ उत्पादक किसानों की तरह शेखावटी के किसानों को भी हर साल उचित दाम नहीं मिलने की चुनौती से जूझना पड़ता है।

प्याज़ की खेती

बाबू लाल का मानना है कि यदि खेती-किसानी के सही तरीके अपनाये जाएँ तो इससे काफ़ी फ़ायदा हो सकता है। आज का किसान पढ़ा-लिखा और समझदार है। सही बीज और खाद का चयन करके वो खेती को बेहतर बना रहा है। खेती-बाड़ी में आधुनिक कृषि उपकरणों का प्रयोग भी अच्छी पैदावार पाने में बहुत उपयोगी साबित होता है।

राजीव सिन्हा, सीकर, किसान ऑफ इंडिया

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