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मध्य प्रदेश में भी बायो-सीएनजी और बायोफर्टिलाइजर का उत्पादन शुरू

गोबर, पराली और ग्रामीण कचरे के इस्तेमाल की योजना

रायसेन में बायोगैस और फर्टिलाइजर्स बनाने का मॉडल प्लांट लगाने की योजना बनाई जा रही है। इस प्लांट में कच्चे माल के रूप में प्रतिदिन लगभग 10 मी.टन गोबर और पराली के मिश्रण से 400 किलोग्राम बायो सीएनजी और 3 मीट्रिक टन सॉलिड ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर और 1000 लीटर लिक्विड ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर बनाई जाएगी।

मध्यप्रदेश में सरकार गोबर और पराली (Dung and Straw) को रिसायकल करके सीएनजी और बायोफर्टिलाइजर / जैव उर्वरक (CNG and Biofertilizer) का उत्पादन करेगी। भारत बायोगैस एनर्जी लिमिटेड (Bharat Bio Energy Limited) इस प्रोजेक्ट पर सरकार के साथ काम करेगी। इस योजना के तहत बायो सीएनजी और ऑर्गेनिक सॉलिड व लिक्विड फर्टिलाइजर्स का उत्पादन किया जाएगा।

रायसेन में बायोगैस और फर्टिलाइजर्स (Biogas and Fertilizers) बनाने का मॉडल प्लांट लगाने की योजना बनाई जा रही है। इस प्लांट में कच्चे माल के रूप में प्रतिदिन लगभग 10 मी.टन गोबर और पराली के मिश्रण से 400 किलोग्राम बायो सीएनजी और 3 मीट्रिक टन सॉलिड ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर और 1000 लीटर लिक्विड ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर बनाई जाएगी।

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत बायोगैस एनर्जी लिमिटेड के पदाधिकारियों की बैठक में कहा कि गुजरात में इन दोनों प्रोजेक्ट पर सफलतापूर्वक कार्य किया जा रहा है। उसी तर्ज़ पर मध्य प्रदेश में भी तेजी से काम को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभी सालरिया गो-अभयारण्य में 4000 गाय हैं, जबकि इसकी क्षमता 10000 गायों की है। भविष्य में यहां गायों की संख्या बढ़ाई जाएगी।

भारत बायोगैस के चेयरमैन भरत पटेल ने बताया कि इस योजना को तीन से पांच वर्ष तक चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि सालरिया गो-अभ्यारण में रोज़ाना 70 मीट्रिक टन कच्चा माल  लगता है। इसमें गोबर, पराली, घास और ग्रामीण कचरा शामिल हैं। इससे रोज़ाना करीब 3000 किलोग्राम बायो सीएनजी का, 25 मीट्रिक टन सॉलिड ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर और 7000 लीटर लिक्विड ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर का उत्पादन होता है।

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