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आज के दौर में अगर कोई फसल सचमुच में ‘ग्रीन गोल्ड’ यानी ‘हरा सोना’ कहलाने लायक है, तो वो है बांस (National Bamboo Mission)। ये सिर्फ एक पौधा नहीं, बल्कि आय बढ़ाने, पर्यावरण बचाने और नए उद्योग खड़े करने का जीता-जागता फॉर्मूला है। बिहार सरकार (Bihar government) भी अब किसानों को इस ‘हरे सोने’ की खेती के लिए आगे ला रही है और उनकी जेब पर 50 फीसदी तक का खर्चा भी खुद उठा रही है।
सिर्फ बल्ले या चारपाई नहीं, अब बांस से बन रहा है ‘बिजनेस एम्पायर’
पहले बांस का इस्तेमाल सिर्फ टोकरी या फर्नीचर तक सीमित था। लेकिन अब दुनिया बदल चुकी है। आज बांस से बनता है:
1.कपड़ा (टेक्सटाइल): बांस के रेशे से बना कपड़ा नरम, एंटी-बैक्टीरियल और इको-फ्रेंडली होता है।
2.कागज़ और रेयॉन: जंगल काटने की जरूरत कम।
3.निर्माण (कंस्ट्रक्शन): बांस से मजबूत और लचीले स्ट्रक्चर बनाए जाते हैं।
4.दवा और खाना: बांस के अंकुर (शूट) स्वादिष्ट और पौष्टिक सब्जी हैं, जबकि इसके अर्क का इस्तेमाल दवाइयों में होता है।
पर्यावरण का ‘सुपरहीरो’ है बांस
बांस सिर्फ पैसा ही नहीं, हमारा भविष्य भी बचाता है:
- तेज़ी से बढ़ता है: ये आम पेड़ों के मुकाबले कई गुना तेजी से बढ़ता है, जल्दी कटाई के लिए तैयार हो जाता है।
- प्रदूषण खाता है: यह कार्बन डाईऑक्साइड को तेजी से सोखता है और ऑक्सीजन छोड़ता है, जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मददगार।
- मिट्टी बचाता है: इसकी जड़ें मिट्टी को बहने से रोकती हैं, खेतों के कटाव को कम करती हैं।
‘मुनाफे का सौदा’ आंकड़े खुद बोलते हैं
बांस का बाजार दुनिया भर में फैल रहा है:
1.ग्लोबल मार्केट 2025 तक हर साल 5 फीसदी की दर से बढ़ेगा।
2.भारत का एक्सपोर्ट साल 2018-19 के 720 करोड़ रुपये से बढ़कर 2023-24 में 1,163 करोड़ रुपये हो गया।
3.आयात घटा, किसानों को फायदा हुआ: इस दौरान बांस के आयात में कमी आई, जिसका मतलब है कि देश की मांग अब हमारे अपने किसान पूरी कर रहे हैं।
27 ज़िलों में ‘National Bamboo Mission’
बिहार सरकार ने राष्ट्रीय बांस मिशन (National Bamboo Mission) को राज्य के 27 जिलों में लागू किया है। इसमें अररिया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, सीतामढ़ी जैसे जिले शामिल हैं। मकसद साफ है: किसानों की आमदनी को बढ़ाना और Self-employment पैदा करना।
कैसे मिलेगा फायदा? योजना की ख़ास बातें
1.कौन ले सकता है लाभ? –
- कोई भी किसान। पति-पत्नी अलग-अलग जमीन होने पर दोनों लाभ ले सकते हैं। पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर।
2.कितनी जमीन चाहिए? दो तरीके
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- घने बांस के बगीचे के लिए: कम से कम 0.04 हेक्टेयर (लगभग 1 कट्ठा) से लेकर अधिकतम 0.2 हेक्टेयर (लगभग 5 कट्ठा) जमीन।
- खेत की मेड़ पर: कम से कम 10 पौधे लगाने होंगे।
3.कितना अनुदान?
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- घने बागान: एक हेक्टेयर पर लगभग 1.2 लाख रुपये के खर्च में से 60 हज़ार रुपये (50%) सरकार देगी। यह रकम दो साल में मिलेगी।
- मेड़ पर पौधे: हर पौधे पर 300 रुपये के खर्च में से 150 रुपये सरकार देगी।
4.कैसे करें आवेदन?
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- ज़रूरी कागज़: भूमि का मालिकाना हक (भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र), पिछले दो साल की राजस्व रसीद।
- आवेदन प्रक्रिया: ऑनलाइन आवेदन करना होगा। बिहार बागवानी विभाग की वेबसाइट https://horticulture.bihar.gov.in/ पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं।
- पौधे कहां से? सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त सप्लायर से, जो जलवायु के अनुकूल अच्छी किस्म के पौधे उपलब्ध कराएंगे।
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

