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कार्प मछली फिंगरलिंग उत्पादन से किसान कर सकते हैं अच्छी कमाई, लगातार बढ़ रही मांग

कार्प मछलियों का विकास तेज़ी से होता है

कृषि के बाद अगर किसी क्षेत्र की तरफ किसानों की दिलचस्पी बढ़ी है, तो वो है मछली पालन। क्योंकि धीरे-धीरे इसकी मांग बढ़ रही है, जिससे इस क्षेत्र से अधिक मुनाफा कमाने की उम्मीद है। मछली पालन के लिए फिंगरलिंग की काफी मांग होती है, ऐसे में कार्प फिंगरलिंग उत्पदान किसानों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

पिछले कुछ सालों में मछली पालन एक बेहतरीन व्यवसाय के रूप में सामने आया है। इससे किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं। कार्प मछली फिंगरलिंग मीठे पानी की मछली को कहते हैं और इसका पालन आसान है। साथ ही इनका वज़न भी तेज़ी से बढ़ता है,जिससे ये किसानों के लिए फ़ायदेमंद है। व्यवसायिक तौर पर कार्प मछलियों को पालना अन्य मछलियों की तुलना में बहुत आसान है। इसे छोटी ज़मीन या घर की छत पर भी पाला जा सकता है। कार्प मछलियों की खासियत है कि ये भोजन के लिए आपस में नहीं लड़ती हैं। इनकी रोगप्रतिरोधक क्षमता भी अधिक होती है। बाज़ार में मछलियों के साथ ही उत्पादन के लिए इनके फिंगरलिंग की मांग भी तेज़ी से बढ़ रही है, ऐसे में किसान कार्प मछली फिंगरलिंग उत्पादन से भी कमाई कर सकते हैं।

कार्प मछली फिंगरलिंग उत्पादन के लिए तालाब का आकार

कार्प मछलियों के बीज हैचरी से लेने के बाद नर्सरी तालाब में 15-20 दिनों के लिए पाला जाता है। 25 से 30 मिलीमीटर आकार की होने के बाद इन्हें रेयरिंग तालाब में 2-3 महीने के लिए पाला जाता है। तब इनका आकार अंगुली जितना हो जाता है। इसलिए इन्हें अंगुलिका या फिंगरलिंग कहा जाता है। इन्हें छोटे मौसमी या बारहमासी तालाब में भी पाला जा सकता है। तालाब का आकार कम से कम 0.02-0.10 हेक्टेयर और गहराई 1.0-1.5 मीटर तक होनी चाहिए। नर्सरी तालाब 50-100 मीटर वर्ग के क्षेत्र में सीमेंट से बनाया जा सकता है। इसकी गहराई 1.0-1.2 मीटर तक होनी चाहिए। कार्प मछली पालन के लिए तालाब से जलीय खरपतवारों को हटा देना चाहिए।

कार्प मछली फिंगरलिंग
तस्वीर साभार: indiamart

तालाब में खाद डालना

मछली पालन के लिए तालाब में खाद डालना ज़रूरी है। इसमें कार्बनिक और अकार्बनिक दोनों तरह की खाद डाली जाती है। कोई भी दूसरी खाद डालने से 2 हफ़्ते पहले तालाब में सबसे पहले गोबर की खाद 2 टन प्रति हेक्टेयर के हिसाब से डाली जाती है। इसके बाद ध्यान रहे कि तालाब में प्लवक का होना ज़रूरी है, क्योंकि कार्प मछलियां इसे ही खाती हैं। प्लवक की मात्रा बढ़ाने के लिए तालाब में यूरिया और सिंगल सुपर फॉस्फेट 10 और 15 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से हर 15 दिन में डाला जाता है।

कार्प मछली फिंगरलिंग उत्पादन के लिए पूरक आहार कितना ज़रूरी?

अगर आप भी कार्प फिंगरलिंग उत्पादन की सोच रहे हैं तो आपको उनके पूरक आहार (Supplementary Food) की भी जानकारी होनी चाहिए। फ्राई (बिल्कुल छोटी मछली) को पहले महीने में उनके वज़न के अनुसार 8-10 प्रतिशत के हिसाब से पूरक आहार दिया जाता है। दूसरे महीने में 6-8 प्रतिशत और तीसरे महीने में 4-6 प्रतिशत के हिसाब से पूरक आहार दिया जाता है। चावल की भूसी और मूंगफली व सरसों की खली के मिश्रण को पूरक आहार के रूप में दिया जाता है। इसके अलावा, मछली का चूरा, सोयाबीन का आटा भी दिया जाता है।

कार्प मछली फिंगरलिंग उत्पादन
तस्वीर साभार: mahabahufisheries
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कार्प मछली फिंगरलिंग उत्पादन में इन बातों का रखें ध्यान

कार्प मछली फिंगरलिंग उत्पादन के दौरान तालाब में अवांछित मछलियां भी आ सकती हैं जिसका प्रबंधन ज़रूरी है। इसके लिए सबसे अच्छा तरीका है तालाब को सूखा देना, लेकिन जब तालाब का पानी निकालना और सुखाना संभव न हो, तो ऐसी मछलियों को खत्म करने के लिए कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है। तालाब में महुआ तेल खली या चाय बीज खली 2500 किलो प्रति हेक्टेयर के हिसाब से हर महीने डालें। महुआ खली कीटनाशक का काम करता है। इसके अलावा, कमर्शियल ब्लीचिंग पाउडर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ध्यान रहे ये काम तालाब में मछलियों के बीज या फ्राई डालने के पहले करें।

बड़ी मछलियों की तुलना में फिंगरलिंग और फ्राई को बेचने वक़्त उनकी पैकिंग का ख़ास ध्यान रखना पड़ता है। फिंगरलिंग को ऑक्सीजन से भरे बैग में पैक किया जाना चाहिए। परिवहन के दौरान किसी तरह का नुकसान न हो इसके लिए ऑक्सीजन वाले बैग को कंटेनर, टिन, पेपर कर्टन, बांस की टोकरी आदि में डालकर भेजना चाहिए। फिंगरलिंग का वजन जब 8-10 ग्राम हो जाए तो उन्हें पानी से निकालकर बेचा जा सकता है।

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