पिछले एक दशक में भारत का समुद्री शैवाल (See Weed) उत्पादन 300 फीसदी से अधिक बढ़ा है! 2015 में जहां ये प्रोडक्शन सिर्फ 18,890 टन था, वहीं 2024 में ये बढ़कर 74,083 टन हो गया है। ये आंकड़ा केवल संख्या नहीं, बल्कि देश के तटीय इलाकों में हो रही एक ‘Blue Agricultural Revolution’ की गवाही दे रहा है। अब सीवीड सिर्फ एक समुद्री पौधा नहीं, बल्कि रोजगार, अर्थव्यवस्था और इनोवेशन (Employment, economy and innovation) का एक शक्तिशाली स्तंभ बनता जा रहा है।
इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (Indian Chamber of Commerce), ICAR-CMFRI और CSIR– (CSMCRI) की ओर से कोच्चि में 7वां इंडिया इंटरनेशनल सीवीड एक्सपो और समिट ’26 ( 7th India International Seaweed Expo and Summit ’26 ) आयोजित किया गया। IFFCO के चीफ मैनेजर (डिस्ट्रीब्यूशन और PO) डॉ. प्रदीप कुमार ने इस कार्यक्रम को संबोधित किया और सीवीड सेक्टर में IFFCO के योगदान पर प्रकाश डाला।
योजनाओं से मिल रही रफ्तार
केंद्रीय मत्स्य पालन राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन (Union Minister of State for Fisheries, George Kurian) के अनुसार, भारत अब सीवीड खेती और उद्योग (Seaweed farming and industry) के विस्तार की दहलीज पर खड़ा है। इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई ठोस कदम उठाए हैं-
1.प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना में समावेश: सीवीड को अब इस योजना के ‘आउटपुट घटक’ के रूप में शामिल किया गया है, जिससे 100 आकांक्षी जिलों में इसकी खेती को बढ़ावा मिलेगा। केरल के कोझिकोड, कन्नूर और कासरगोड जिले पहले ही इसमें शामिल कर लिए गए हैं।
2. लक्षित नीतियां और निवेश: सरकार की योजना है कि लक्षित योजनाओं और नीतिगत समर्थन से बड़े पैमाने पर सीवीड खेती को बढ़ावा दिया जाए। इससे प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ेगी और तटीय मछुआरों व महिलाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।

सिर्फ खाने तक नहीं, बहुत काम का है सीवीड
हाल ही में कोच्चि में आयोजित सातवें इंडिया इंटरनेशनल सीवीड एक्सपो ने इसके व्यापक उपयोग को दुनिया के सामने रखा। यहां सीवीड से बने 50 से अधिक तरह के उत्पाद प्रदर्शित किए गए, जैसे:
1.खाद्य उत्पाद: पोषण पाउडर, पकौड़े, जैम, सॉस, दूध गाढ़ा करने वाला एजेंट।
2.गैर-खाद्य उत्पाद: सीवीड आधारित बायोप्लास्टिक, हस्तनिर्मित कागज, बायो-फर्टिलाइजर, पशु आहार, साबुन और यहां तक कि एयर फ्रेशनर जेल!
ये विविधता दिखाती है कि सीवीड कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, कॉस्मेटिक, फार्मास्यूटिकल और पैकेजिंग (Seaweed farming, food processing, cosmetics, pharmaceuticals, and packaging) जैसे कई उद्योगों की जरूरतें पूरी कर सकता है।
अगला कदम: Processing Plants And Global Partnerships
नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड के सीईओ बी.के. बेहरा ने एक अहम सुझाव दिया। उनका कहना है कि इस क्षेत्र को व्यावसायिक मजबूती देने के लिए बड़े प्रोसेसिंग प्लांट लगाना जरूरी है। साथ ही, विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय से ही इस क्षेत्र की विकास गति को तेज किया जा सकता है।
इस एक्सपो में अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस समेत 10 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने भारत को वैश्विक सीवीड मानचित्र पर एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया। यह कार्यक्रम निवेश, साझेदारी और व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा।
समुद्र से Empowerment तक का सफर
भारत के लिए ये ‘Blue Economy’ को साकार करने का एक सुनहरा अवसर है। सही नीतियों, निवेश और इनोवेशन के साथ, See Weed न केवल हमारी अर्थव्यवस्था का समुद्री मोती बनेगा, बल्कि दुनिया को भारत की समुद्री संपदा और कौशल (Marine resources and skills) से रूबरू भी कराएगा। ये समुद्र की गोद से उपजी हरित क्रांति का आगाज है।