Beetal Goat Farming: पशुपालन में नई उम्मीद, किसानों की आय बढ़ाने में बन रही मज़बूत आधार

Beetal Goat Farming: भारत में पशुपालन क्षेत्र लगातार बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इसको ध्यान में रखते हुए […]

Beetal Goat Farming

Beetal Goat Farming: भारत में पशुपालन क्षेत्र लगातार बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इसको ध्यान में रखते हुए Department of Animal Husbandry & Dairying की ओर से  पशुपालन और पशु कल्याण जागरुकता माह का आयोजन कर रहा है। ये आयोजन 14 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा। इसको ध्यान में रखते हुए किसान ऑफ़ इंडिया आप से रुबरु कराने जा रहा है ऐसी बकरी की नस्ल के बारे में जो किसानों के लिए फ़ायदे का सौदा होने वाली है। बदलते मौसम, सीमित भूमि और बढ़ती लागत के बीच किसान अब ऐसी पशु नस्लों की तलाश में हैं, जो कम संसाधनों में अधिक मुनाफ़ा दे सकें। इन्हीं परिस्थितियों में बीटल बकरी नस्ल देश के कई राज्यों में पशु पालकों के लिए आशा की किरण बनकर उभरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, सही देखभाल और वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ बीटल बकरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूती देने में अहम भूमिका निभा सकती है।

Beetal Goat का पंजाब से पूरे देश तक का सफ़र

बीटल बकरी की उत्पत्ति पंजाब क्षेत्र में मानी जाती है। ऐतिहासिक रूप से यह नस्ल पंजाब और उससे लगे क्षेत्रों में पाली जाती रही है। समय के साथ इसकी उपयोगिता को देखते हुए यह नस्ल अब राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश में पाई जाती है । बीटल बकरी विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में खुद को ढालने की अच्छी क्षमता रखती है, जिससे यह अन्य नस्लों की तुलना में अधिक व्यावहारिक साबित होती है।

Beetal Goat पहचान में अलग, बनावट में मज़बूत

बीटल बकरी अपनी विशिष्ट शारीरिक बनावट के कारण दूर से ही पहचानी जा सकती है। इसके लंबे लटकते कान, उभरी हुई नाक और मजबूत शरीर इसे खास बनाते हैं। आमतौर पर इसका रंग काला, भूरा या चितकबरा होता है। वयस्क मादा बकरी का औसत वजन लगभग 45 से 65 किलोग्राम, जबकि नर बकरे का वजन लगभग 70 किलोग्राम या उससे अधिक हो सकता है। मजबूत कद-काठी के कारण यह नस्ल मांस उत्पादन के लिए भी उपयुक्त मानी जाती है।

दूध और मांस – दोनों में उपयोगी

विशेषज्ञों के अनुसार, बीटल बकरी एक दुग्ध एवं मांस उत्पादन वाली मिश्रित नस्ल है। सामान्य देखभाल में एक बीटल बकरी प्रतिदिन 2 से 3 लीटर दूध देने में सक्षम होती है। स्तनपान अवधी में 1. 5 से 1.9 लीटर तक दूध का उत्पादन देती है। यह बकरी सामान्य पशुओं की तरह चार खाना ज्यादा पसंद करती है। अगर इसके कीमत की बात की जाए तो पहली ब्यात की यह बकरी 20 से 25 हज़ार रुपए तक आसानी से बिक जाती है।  इनके बच्चों का भी तेज़ी से वज़न बढ़ता है, जिससे मांस उत्पादन में भी अच्छा लाभ मिलता है। बाजार में बीटल नस्ल के बकरे और बच्चों की मांग अधिक होने के कारण पशुपालकों को बेहतर दाम मिलते हैं।

किसानों की आय में हो रहा इज़ाफा

पशुपालन से जुड़े जानकार बताते हैं कि बीटल बकरी पालन से किसान कम समय में स्थायी आय अर्जित कर सकते हैं। एक पशुपालक, जो 10 से 15 बीटल बकरियों का पालन करता है, वह दूध, बच्चे और मांस बिक्री से सालाना अच्छी कमाई कर सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह नस्ल खासतौर पर उन किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है, जिनके पास सीमित भूमि है और जो खेती के साथ-साथ पशुपालन को आय का अतिरिक्त साधन बनाना चाहते हैं।

सरकारी योजनाओं से मिल रहा प्रोत्साहन

केंद्र सरकार और राज्य सरकारें पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही हैं। राष्ट्रीय पशुधन मिशन और बकरी पालन योजना के तहत बीटल जैसी उन्नत नस्लों को अपनाने पर 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी और तकनीकी सहायता दी जा रही है। पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बीटल बकरी नस्ल को बढ़ावा देने से ग्रामीण रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को बल मिलेगा।

आवास प्रबंधन है सफलता की कुंजी

विशेषज्ञों का मानना है कि बीटल बकरी से बेहतर उत्पादन के लिए उचित आवास व्यवस्था बेहद जरूरी है। बकरियों का बाड़ा सूखा, साफ और हवादार होना चाहिए। बरसात और ठंड से बचाव के लिए ऊंचे फर्श और छायादार व्यवस्था जरूरी मानी जाती है। एक बकरी के लिए पर्याप्त जगह होना चाहिए, ताकि बीमारियों का खतरा कम रहे और उत्पादन प्रभावित न हो।

संतुलित आहार से बढ़ती है उत्पादन क्षमता

बीटल बकरी की उत्पादकता सीधे तौर पर उसके आहार पर निर्भर करती है। पशु विशेषज्ञों के अनुसार, इसके आहार में हरा चारा, सूखा चारा और दाना मिश्रण संतुलित मात्रा में होना चाहिए। बरसीम, नेपियर घास, ज्वार जैसे हरे चारे के साथ भूसा और खनिज मिश्रण देना फ़ायदेमंद होता है। इसके अलावा, बकरियों को हमेशा स्वच्छ और ताजा पानी उपलब्ध कराना आवश्यक है।

स्वास्थ्य देखभाल को न करें नजरअंदाज

बीटल बकरी अपेक्षाकृत मजबूत नस्ल मानी जाती है, लेकिन नियमित स्वास्थ्य देखभाल न होने पर रोगों का खतरा बढ़ सकता है। पशु चिकित्सकों के अनुसार, समय पर टीकाकरण, आंतरिक व बाहरी परजीवियों का नियंत्रण और नियमित जांच से बीमारियों से बचा जा सकता है। बीमार बकरी को तुरंत अलग रखना और पशु चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी बताया गया है।

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सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुंचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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