Union Budget 2026-27: किसानों को मिला AI मित्र ‘भारत-विस्तार’, हाई-वैल्यू फसलों और ग्रामीण सशक्तिकरण पर जोर

वित्त मंत्री ने बजट भाषण (Union Budget 2026-27) के दौरान बताया कि कृषि पर बेस्ड उपायों ने लगभग 7 फीसदी की High growth rate में योगदान दिया है। इससे ग्रामीण भारत की आमदनी को बढ़ाने में इज़ाफा हुआ है।  

Union Budget 2026-27: किसानों को मिला AI मित्र 'भारत-विस्तार', हाई-वैल्यू फसलों और ग्रामीण सशक्तिकरण पर जोर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने आज 1 फरवरी 2026 को अपने नौवें केंद्रीय बजट 2026-27 (Union Budget 2026-27) में किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और तकनीकी इनोवेशन को लेकर ऐतिहासिक घोषणाएं कीं। इस बजट का सबसे चर्चित और क्रांतिकारी ऐलान है ‘भारत-विस्तार’ (Bharat VISTAAR – Virtually Integrated System to Access Agricultural Resources) नाम का एक बहुभाषी AI टूल। ये सिर्फ एक ऐप या पोर्टल नहीं, बल्कि भारतीय कृषि को डिजिटल युग से जोड़ने वाला एक स्मार्ट पुल है। साथ ही उन्होंने ग्रामीण विकास के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना शुरू करने का भी ऐलान किया है। उन्होंने स्थानीय बुनकरों के लिए महात्मा गांधी हैंडलूम योजना शुरू करने की बात कही है। जिससे जूट उत्पादक किसानों और बुनकरों फायदा मिलेगा।  

वित्त मंत्री ने बजट भाषण के दौरान बताया कि कृषि पर बेस्ड उपायों ने लगभग 7 फीसदी की High growth rate में योगदान दिया है। इससे ग्रामीण भारत की आमदनी को बढ़ाने में इज़ाफा हुआ है।  

‘भारत-विस्तार’: कैसे बदलेगा हर किसान का गेम?

Bharat VISTAAR – Virtually Integrated System to Access Agricultural Resources इस AI प्लेटफॉर्म का डिजाइन ही ऐसा है कि ये सीधे किसान की जेब में उसकी भाषा में समाधान लेकर पहुंचेगा। आइए, समझते हैं कि ये कैसे काम करेगा:

1.एग्रीस्टैक, ICAR  और AI = Superpower: ये प्लेटफॉर्म सरकार के एग्रीस्टैक (Digital farmer records) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सालों की रीसर्च व वैज्ञानिक पैकेजों को, Advanced Artificial Intelligence के साथ जोड़ेगा। मतलब, अब तक जो जानकारी किताबों या वैज्ञानिकों तक सीमित थी, वो सीधे किसान के मोबाइल पर उसकी लोकल लैंग्वेज में पहुंचेगी।

2.मेरे खेत के हिसाब से सलाह: ये टूल सिर्फ सामान्य जानकारी नहीं देगा। ये Customized advisory देगा। यानी, मान लीजिए महाराष्ट्र के यवतमाल का एक कपास किसान इस ऐप में अपना खेत का लोकेशन, मिट्टी का प्रकार और फसल डालेगा, तो ये AI टूल उस इलाके के मौसम के पैटर्न, कीटों के खतरे, बाजार भाव का अनुमान लगाकर उसे बताएगा कि ‘अगले 15 दिन में खाद देना बंद कर दें’ या इस हफ्ते इस कीटनाशक का छिड़काव करें, बाजार में दाम बढ़ने वाले हैं, भंडारण करें।’

3.जोखिम कम, आमदनी बढ़े: अधिकतर किसान मौसम, बाजार और बीमारी के जोखिम से घबराकर पुराने तरीके ही अपनाते हैं। ‘भारत-विस्तार’ रिस्क मैनेजमेंट टूल की तरह काम करेगा। यह समय रहते चेतावनी देगा, जिससे फसल खराब होने का खतरा घटेगा और बेहतर योजना से उत्पादन व आमदनी बढ़ेगी।

4.46.1 फीसदी कार्यबल को लक्ष्य: वित्त मंत्री ने ख़ास तौर पर बताया कि ये टूल देश के 46.1% कार्यबल (PLFS 2023-24 के अनुसार) को टारगेट करता है, जो खेती पर निर्भर है। ये छोटे और सीमांत किसानों को सशक्त बनाने, सटीक खेती (Precision Farming) को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ी छलांग है।

kisan of india instagramसिर्फ AI नहीं, पूरे कृषि इकोसिस्टम पर फोकस

बजट में ‘भारत-विस्तार’ के अलावा, कृषि को फायदेमंद बनाने और ग्रामीण रोजगार बढ़ाने के लिए कई ठोस योजनाएं पेश की गई हैं- 

1. हाई-वैल्यू फसलों पर ज़ोर 

  •  नारियल संवर्धन योजना:  केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक जैसे प्रमुख राज्यों में पुराने, गैर-उत्पादक पेड़ों की जगह नई उन्नत किस्मों के पौधे लगाए जाएंगे। उत्पादन बढ़ेगा, प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा।
  •  काजू और कोकोआ स्पेशल मिशन:  भारत को कच्चे काजू और कोकोआ के उत्पादन व प्रोसेसिंग में आत्मनिर्भर बनाना है। लक्ष्य है कि 2030 तक ‘भारतीय काजू’ और ‘भारतीय कोको’ एक प्रीमियम ग्लोबल ब्रांड बन जाए। इससे निर्यात बढ़ेगा, किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे।
  • चंदन का पुनरुद्धार: भारत की सांस्कृतिक धरोहर चंदन की खेती और संरक्षण पर खास ध्यान। राज्यों के साथ मिलकर चंदन के इकोसिस्टम को फिर से जीवित किया जाएगा, जिससे वनवासी और किसान परिवारों को नई आय के स्रोत मिलेंगे।

चंदन पुनरुद्धार योजना:  

1950 में भारत का वैश्विक चंदन व्यापार में 85 फीसदी हिस्सा, अब मात्र 7 प्रतिशत

वैज्ञानिक दृष्टिकोण- 

Clonal propagation: तेजी से बढ़ने वाली किस्में (संतलम एसपीवी-1, 8 वर्ष में तैयार)

Intercropping model: चंदन , अमरूद ,हल्दी (प्रति हेक्टेयर ₹15 लाख/वर्ष आय)

Traceability system: ब्लॉकचेन-आधारित, हर लॉग का डिजिटल रिकॉर्ड

2. पशुपालन और मत्स्य पालन को बढ़ावा

  • क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी: पशुपालक किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को प्रोत्साहित करने के लिए क्रेडिट से जुड़ी सब्सिडी दी जाएगी। इससे डेयरी, पोल्ट्री व्यवसाय शुरू करना आसान होगा।
  • पशु चिकित्सा सेवाओं का विस्तार: पशु चिकित्सा कॉलेज, अस्पताल और डायग्नोस्टिक लैब के लिए ऋण-संबंधित पूंजी सब्सिडी योजना आएगी। देश में पशु डॉक्टरों की संख्या और गुणवत्ता दोनों बढ़ेगी।
  • 500 नए सरोवर: मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत खेती के तहत 500 नए तालाब/सरोवर विकसित किए जाएंगे।

3. ग्रामीण सशक्तिकरण और रोज़गार

  • SHE-मार्ट्स:  ‘लखपति दीदी’ की तर्ज पर, स्वयं सहायता समूह (SHE – Self Help Entrepreneur)  की महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा। ग्रामीण महिलाएं मार्ट्स चलाकर आजीविका कमाएंगी।
  • महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना: खादी, हथकरघा और स्थानीय कारीगरी को मजबूती। महात्मा गांधी हैंडलूम योजना से बुनकरों को फायदा। मेगा टेक्सटाइल पार्क बनेंगे, जिससे जूट किसानों को उचित दाम मिलने का रास्ता खुलेगा और रोजगार बढ़ेगा।
  • सहकारी समितियों को टैक्स छूट: सहकारी समितियों द्वारा प्राप्त और सदस्यों को वितरित की जाने वाली डिविडेंड आय पर कर में छूट का प्रस्ताव। इससे सहकारी आंदोलन मजबूत होगा।

 ये बजट क्यों है ख़ास?

इस बजट को गहराई से समझने पर कुछ बड़े बदलाव के संकेत मिलते हैं-

  1. Technology Democratization: ‘भारत-विस्तार’ सिर्फ एक टूल नहीं, बल्कि तकनीक के Democratizationका प्रतीक है। यह AI जैसी उन्नत तकनीक को देश के सबसे बड़े वर्ग (किसान) तक पहुंचाने का प्रयास है।
  2. Income Stream Diversity: सरकार का फोकस अब केवल अनाज उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि किसान की आय के स्रोत बढ़ाने पर है। नारियल, काजू, चंदन, पशुपालन, मत्स्य पालन – ये सभी अतिरिक्त आय के रास्ते हैं।
  3. Value Chain Integration: बजट में उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और निर्यात तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने की बात की गई है। काजू को ग्लोबल ब्रांड बनाने का लक्ष्य इसी का उदाहरण है।
  4. Women-Centric Development: SHE-मार्ट्स का प्रस्ताव साफ दिखाता है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी मानी जाने वाली महिला शक्ति को उद्यमी बनाने पर जोर है।

7 फीसदी की विकास दर 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में इस बात पर ख़ास ज़ोर दिया कि पिछले वर्षों में कृषि क्षेत्र पर केंद्रित नीतिगत उपायों ने अर्थव्यवस्था में लगभग 7 फीसदी  की High growth rate में अहम योगदान दिया है। ये विकास दर सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि ग्रामीण गरीबी में कमी और खेती-बाड़ी वाले समुदायों के लाखों लोगों के जीवन-स्तर में सुधार का साक्ष्य है।

 इस बजट में अधिक मूल्य दिलाने वाली खेती (High-Value Agriculture) को  स्पेशल सपोर्ट देने का वादा किया गया है। इस रणनीति का टारगेट केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों के लिए चार मुख्य फायदे देखना है- 

1.उत्पादों में विविधता लाना

2.उत्पादकता में इज़ाफा करना

3.किसानों की आमदनी बढ़ाना

4.रोजगार के नए अवसर तैयार करना

इस दिशा में एक बड़ा कदम नारियल, चंदन और अखरोट जैसी high value  वाली फसलों को सीधा समर्थन देने का है।

वित्त मंत्री ने घोषणा करते हुए कहा, ‘मैं उत्पादन को बढ़ाने और उत्पादकता को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न तरीकों से एक ‘नारियल संवर्धन योजना’ का प्रस्ताव करती हूं। इसमें नारियल उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्यों में गैर-उत्पादक पेड़ों की जगह नई किस्मों के पौधे लगाना शामिल होगा।’ इस योजना का उद्देश्य पुराने और कम उपज देने वाले बागानों को आधुनिक, उच्च उपज वाली किस्मों में बदलकर नारियल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना है।

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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