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Hi-Tech Vegetable Nursery : खेत में बीजों की बुवाई के बजाय जब अच्छी किस्म के पौध लगाए जाते हैं, तो उत्पादन अधिक और अच्छी गुणवता वाला होता है। इसलिए बहुत से किसान नर्सरी में तैयार सब्ज़ियों की पौध लगाना पसंद करते हैं, क्योंकि इससे उन्हें जल्दी और बेहतर उत्पादन मिलता है। किसानों की पौध की मांग को पूरा करने का काम भूपिंदर सिंह गिल जैसे किसान कर रहे हैं, जो सब्ज़ियों की नर्सरी का बिज़नेस करते हैं।
पंजाब के सोहियां कलां में रहने वाले किसान भूपिंदर सिंह गिल बीज कंपनी में काम करते थे। मगर उस काम में मन नहीं लगा, तो 2014 में नौकरी के साथ ही सब्ज़ियों की नर्सरी का बिज़नेस शुरू किया। जब चल निकला तो 2016 में नौकरी छोड़कर पूरी तरह से इस बिज़नेस में लग गए। वो हाईटेक तरीके से साल भर फूलगोभी, पत्तागोभी, प्याज़, मिर्च, टमाटर जैसी सब्ज़ियों की नर्सरी तैयार करते हैं और खास बात ये कि खेत से ही उनकी सारी पौध बिक जाती है। अपनी इस Hi-Tech Vegetable Nursery और खेती के अनुभवों बारे में उन्होंने चर्चा की किसान ऑफ इंडिया के संवाददाता सर्वेश बुंदेली के साथ।
क्यों शुरू किया Hi-Tech Vegetable Nursery बिज़नेस?
आज के समय में जहां अधिकांश लोग खेती-किसान छोड़कर नौकरी की ओर जा रहे हैं, वहीं पंजाब के सोहियां कलां के रहने वाले किसान भूपिंदर सिंह गिल ने नौकरी छोड़कर नर्सरी का बिज़नेस शुरू किया और 11 सालों में उनका ये बिज़नेस काफी अच्छी तरह फल-फूल गया है। इस बारे में भूपिंदर कहते हैं कि वो किसान परिवार से हैं, उनके बाप-दादा खेती ही करते थे, इसलिए इस तरफ रुझान था। मगर पहले उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और उसके बाद एक बीज कंपनी में नौकरी करने लगें, मगर उनका मन नौकरी में नहीं लगा, वो हमेशा अपना खुद का कुछ काम करना चाहते थे। फिर एक दिन उनके दिमाग में सब्ज़ियों की नर्सरी शुरू करने का आइडिया आया, तो नौकरी के साथ ही 2014 में उन्होंने छोटे पैमाने पर नर्सरी शुरू की। शुरुआत में मुश्किलें तो आईं, मगर वो काम करते रहे और 2016 में जब उनका नर्सरी बिज़नेस थोड़ा अच्छा चलने लगा, तो उन्होंने नौकरी छोड़कर पूरी तरह से इस बिज़नेस को आगे बढ़ाने का फैसला किया और अब उनके पास एक पूरी तरह हाइटेक तरीके से तैयार एक अच्छी नर्सरी है। भूपिंदर बताते हैं कि वो इस काम को लेकर इतने उत्साहित थे कि बिना सैलरी मिले ही नौकरी छोड़ दी थी, क्योंकि वो नौकरी के बंधन में बंधकर नहीं आज़ादी से अपना काम करना चाहते थे।
कई लोगों को दिया रोज़गार
अपना काम शुरू करके भूपिंदर खुद तो आत्मनिर्भर बने ही, साथ ही उन्होंने 15-16 लोगों को रोज़गार भी दिया है। वो बताते हैं कि कुछ लोग तो उनके साथ 2014 से जुड़े हुए हैं। उनका मानना है कि कृषि श्रमिकों ने उनके बिज़नेस को आगे बढ़ाने में बहुत साथ दिया है। उनकी मेहनत और साथ की बदौलत ही आज वो अच्छा बिज़नेस कर पा रहे हैं।
Hi-Tech Vegetable Nursery
भूपिंदर सिंह की सब्ज़ियों की नर्सरी खास है, क्योंकि उन्होंने इसे हाइटेक तरीके से तैयार किया है। बेड बनाकर पौध उगाने के साथ ही सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर विधि का इस्तेमाल करते हैं। इस बारे में उनका कहना है कि सब्ज़ियों की नर्सरी में स्प्रिंकलर सिंचाई का इस्तेमाल ज़रूरी है, क्योंकि इससे बीजों का अंकुरण अच्छा होता है। अगर ऐसा नहीं करेंगे तो बीज सही तरीके से अंकुरित नहीं होगें और अगर एक बार भी ऐसा हुआ तो एक सीज़न में उन्हें काफ़ी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कौन-सी सब्ज़ियां उगाते हैं?
भूपिंदर सिंह का कहना है कि वो सभी तरह की सब्ज़ियों की नर्सरी बनाते हैं जैसे- फूलगोभी, पत्तागोभी, प्याज़, टमाटर आदि। अब वो थोड़ा फलों की नर्सरी भी तैयार कर रहे हैं जैसे पपीता। वो आमतौर पर सीज़न के हिसाब से ही सब्ज़ियां लगाते हैं। उनका कहना है कि अगस्त से नर्सरी बनाने का काम शुरू हो जाता है, पहले फूलगोभी लगाते हैं, फिर अगस्त से अक्टूबर तक इसी तरह के पौधे ज़्यादा लगाते हैं जैसे पत्तागोभी, ब्रोकोली आदि। फिर प्याज़ की नर्सरी शुरू करते हैं, उसके बाद सर्दियों वाली सभी सब्ज़ियां लगाते हैं।
ज़रूरी है बीज की पहचान
नर्सरी की सफलता बीज गुणवत्ता पर बहुत निर्भर करती है, इसलिए जो भी किसान नर्सरी लगाना चाहता हा सबसे पहले उसे अच्छे बीज की पहचान होनी चाहिए। भूपिंदर सिंह कहते है कि अगर कोई सही जानकारी के बिना नर्सरी बिज़नेस शुरू करता है तो उसे नुकसान उठाना पड़ सकता है। वो बताते हैं कि बीज की लागत काफी आ जाती है, फूलगोभी का बीज 30-35 हजार से लेकर 80-90 हजार रुपए प्रति किलो तक पड़ जाता है और एक एकड़ खेत में करीब 20 किलो तक बीज लगते हैं। ऐसे में अगर एक बार की भी फसल खराब हुई तो काफी नुकसान होगा। इसलिए सही बीज की जानकारी होना बहुत ज़रूरी है। इसके अलावा नर्सरी बिज़नेस में पौध को अधिक बरसात और फंगस से बचाना भी ज़रूरी है।
खेत से ही बिक जाती है पौध
किसानों के सामने फसल उगाने के बाद उसे बेचना यानी मार्केटिंग एक बड़ी समस्या बनकर आती है, मगर भूपिंदर के सामने मार्केटिंग की कोई समस्या ही नहीं है, क्योंकि उनकी पौध तो खेत से ही बिक जाती है, समझ लीजिए कि उनका खेत ही स्टोर है। भूपिंदर गिल ने नर्सरी गांव में बनाई है, बावजूद इसके खेत से ही उनकी सारी पौध बिक जाती है, उन्हें इसे कहीं ले जाने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती है। इस बारे में उनका कहना है कि प्रोडक्ट बेचने के लिए जगह मायने नहीं रखती, अगर आपकी नर्सरी स्वस्थ है और पौध अच्छी किस्म के हैं तो कहीं से भी लोग लेने के लिए आ जाएंगे।
अगर आप भी भूपिंदर सिंह की तरह नर्सरी बिज़नेस की शुरुआत करना चाहते हैं तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा जैसे-
- हमेशा छोटे स्तर पर शुरुआत करकें और नर्सरी लगाने के लिए उपजाऊ मिट्टी का चुनाव करें, साथ ही सिंचाई की उचित व्यस्था करें।
- अपने आसपास के बाज़ार का दौरा करें और लोगों की मांग को समझते हुए ही सब्ज़ियों का चुनाव करें।
- अगर ज़्यादा ठंड वाली जगह में रहते हैं तो पॉलीहाउस में किसान नर्सरी तैयार कर सकते हैं, मगर इसकी लागत अधिक आती है।
- आमतौर पर टमाटर, फूलगोभी, पत्तागोभी, शिमला मिर्च, बैंगन, लौकी, खीरा, करेला, तुरई, भिंडी जैसी सब्ज़ियों की मांग हमेशा रहती है, तो आप इसकी नर्सरी तैयार कर सकते हैं।
- इसके अलावा ज़्यादा कमाई के लिए एग्जॉटिक सब्ज़ियां जैसे ब्रोकोली, चेरी टोमैटो, लोलो रोसो, केल (Kale) आदि की नर्सरी तैयार कर सकते हैं।
- अच्छी पौध तैयार करने के लिए हमेशा बेहतरी गुणवत्ता वाले बीजों का ही चुनाव करें।
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