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कृषि मशीनीकरण की खरीदारी के लिए केन्द्र सरकार देती है भारी अनुदान

पराली के निपटारे के लिए चार राज्यों में किसानों ने खरीदीं 1.5 लाख मशीनें

सर्दियों में दिल्ली और आसपास के बड़े इलाके में वायु प्रदूषण की दशा बेहद ख़तरनाक बन जाती है। इससे निपटने के लिए 2018 में केन्द्र सरकार ने ऐसी ख़ास योजना बनायी थी, जिसका लाभ उठाकर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश किसान न सिर्फ़ पराली जलाने से बच सकते हैं बल्कि इन्हें अतिरिक्त आमदनी भी हो सकती है। इसके लिए किसानों को मशीनों की मदद से खेतों से पराली को निकालकर बेचना पड़ता है।

कृषि मशीनीकरण की खरीदारी: ख़रीफ़ की फसल धान की कटाई के बाद खेतों में गड़ी हुई इसकी ठूँठ या पराली या डंठल की सफ़ाई करके रबी की खेती की तैयारी करने के लिए पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में किसान पराली जला देते हैं। इससे दिल्ली और आसपास के बड़े इलाके में सर्दी के मौसम में वायु प्रदूषण की दशा बेहद चिन्ताजनक बन जाती है।

इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने ऐसी योजना बनायी थी, जिसका लाभ उठाकर किसान न सिर्फ़ पराली जलाने से बच सकते हैं बल्कि इन्हें अतिरिक्त आमदनी भी हो सकती है। इसके लिए किसानों को मशीनों की मदद से खेतों से पराली को निकालकर बेचना पड़ता है।

पराली के निपटारे के सिलसिले में सरकारी उपलब्धियों को ब्यौरा देते हुए 23 मार्च 2021 को केन्द्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने लोकसभा को जानकारी दी कि 2018-19 से 2020-21 के दौरान कुल 30,961 कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) स्थापित हुए हैं और अब तक पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के 1.5 लाख से अधिक किसानों को फसल अवशेष प्रबन्धन मशीनें सुलभ करवायी गयी हैं।

उन्होंने बताया कि 2019-20 में देश के कुल धान उत्पादन में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी क्रमशः 9.91 प्रतिशत, 4.06 प्रतिशत और 13.05 प्रतिशत था।

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क्या है योजना?

कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देने वाली केन्द्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की इस योजना का नाम है – ‘Promotion of Agricultural Mechanization for In-Situ Management of Crop Residue in the States of Punjab, Haryana, Uttar Pradesh and NCT of Delhi’. इसके तहत किसानों और उनकी सहकारी समितियों को भारी अनुदान दिया जाता है। किसानों को फसल अवशेष प्रबन्धन मशीनरी की खरीदारी करने पर मशीन की लागत का 50% अनुदान मिलता है।

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यदि मशीन की खरीदारी किसान उत्पादक संगठन (FPO) की सहकारी समितियाँ या पंचायत समितियाँ करती हैं तो अनुदान की सीमा बढ़कर 80% तक हो जाती है। क्योंकि यही समितियाँ अवशेष के रूप में इक्कठा होने वाली पराली का निपटारे का काम भी अपने कस्टम हायरिंग केन्द्रों (CHCs) के ज़रिये करती हैं। इन्हीं केन्द्रों पर किसानों से पराली की खरीदारी भी की जाती है।

योजना के तहत केन्द्र सरकार की ओर से राज्यों को अनुदान की रकम की भरपाई की जाती है। इसके तरह केन्द्र सरकार सीधे राज्यों को बजटीय सहायता देती है और बदले में राज्यों को धन के उपयोग का ब्यौरा केन्द्र सरकार को भेजना पड़ता है।

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SMAM के दायरे में आने वाली खेती की मशीनें

कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए बनाये गये Sub-Mission on Agricultural Mechanization (SMAM) के तहत सरकार की ओर से निम्न मशीनों की खरीदारी पर अनुदान मिलता है –

सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (Super Straw Management System (SMS) for Combine Harvesters),

·       हैप्पी सीडर्स (Happy Seeders),

·       हाइड्रॉलिकली रिवर्सेबल एमबी प्लो (Hydraulically Reversible MB Plough),

·       पैडी स्ट्रॉ चॉपर / श्रेडर (Paddy Straw Chopper/Shredder),

·       मुल्चर (Mulcher),

·       श्रब मास्टर (Shrub Master),

·       रोटरी स्लेशर (Rotary Slasher),

·       ज़ीरो टिल सीड ड्रिल (Zero Till Seed Drill),

·       रोटावेटर (Rotavator),

·       सुपर सीडर (Super Seeder),

·       क्रॉप रीपर / रीपर बाइंडर (Crop Reaper/Reaper Binder),

·       स्ट्रॉ बेलर और रेक (Straw Baler and Rakes).

 

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