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सड़कों-पेड़ों पर सड़ रहे संतरे, राजस्थान में कीमत न मिलने से किसान परेशान

भीषण सर्दी पड़ने की वजह से यहां के संतरा फलों की मांग एकदम कमजोर पड़ गई है। किसानों को खरीदार नहीं मिल रहे हैं।

दिल्ली की सीमाओं पर मौजूद हजारों किसानों के मन में तीन नए कृषि कानूनों को लेकर कई शंकाएं है। केंद्र सरकार उन्हें यह समझाने में लगी है कि ये कानून किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए लाए गए हैं।

इधर एक हकीकत यह भी है कि राजस्थान में झालावाड़ के भवानीमंडी क्षेत्र में संतरा उत्पादक किसानों ने बाजार में उचित भाव नहीं मिलने की वजह से संतरों को पेड़ पर ही छोड़ दिया है। वहीं कुछ किसान फसल सड़कों पर फेंकने के लिए मजबूर हो गए हैं।

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सर्दी के इस मौसम में संतरे का भाव अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। व्यापारी किसानों से न्यूनतम 1 से 5 रुपये प्रति किलो और अधिकतम 8 से 10 रुपये प्रति किलो के हिसाब से खरीदने को तैयार हो रहे हैं।

किसानों को पेड़ से फल तोडऩे पर इससे ज्यादा खर्च आ रहा है। कीमत नहीं मिलने की वजह से किसानों ने फलों को पेड़ों पर ही छोड़ दिया है। इसके अलावा अगर किसान संतरों को मंडी ले जाते हैं तो उन्हें खरीदार ही नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में किसान संतरों को वहीं छोड़कर घर लौटने पर मजबूर हैं।

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सर्दी और कोरोना का पड़ा असर

फल व्यापारियों के मुताबिक इस साल प्रतिस्पर्धी संतरा मंडी नागपुर में संतरे की फसल जोरदार हुई है। इसके अलावा भवानीमंडी क्षेत्र में भीषण सर्दी पड़ने की वजह से यहां के संतरा फलों की मांग एकदम कमजोर पड़ गई है।

जिन व्यापारियों ने संतरा फसल खरीद भी ली, वे कोरोना और सर्दी की वजह से परिवहन का इंतजाम नहीं कर पाए और फसल सड़ गई।

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