Kisan Andolan Timeline: 378 दिनों से चल रहा किसान आंदोलन स्थगित, जानिए कब-कब क्या हुआ?

संयुक्त किसान एकता मोर्चा और केंद्र सरकार के बीच सहमति बनी।

किसान आंदोलन स्थगित

किसान आंदोलन स्थगित हो गया है। गुरु नानक जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानून की वापसी का ऐलान किया था और शीतकालीन सत्र में उसे वापिस लिया गया। लेकिन, किसान संगठन एमएसपी (MSP) की गारंटी सहित किसानों से जुड़ी कई और मांगों को लेकर अड़े थे। केंद्र सरकार ने सभी मांगें मान ली हैं, जिसकी घोषणा कृषि सचिव के हस्ताक्षर से  चिट्ठी जारी कर की गई है। आइये जानते हैं 378 दिनों में कब क्या हुआ?

किसान आंदोलन घटनाक्रम (Farmer Agitation Timeline): 

5 जून 2020 – भारत सरकार सबसे पहले इसी दिन तीनों कृषि बिल (Farm Bills)अध्यादेश के रूप में लेकर आई। ‘एक राष्ट्र एक बाजार की नीति’ को मंजूरी देते हुए तीन जून को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कृषि क्षेत्र से जुड़े और कई अहम फैसले लिये गये।

दिल्ली की सीमाओं पर पहुंचने से पहले ही शुरू हो गया था किसान आंदोलन!

10 अगस्त 2020 – पंजाब में राष्ट्रीय किसान महासंघ ने “अन्नदाता जागरण अभियान” शुरू किया। भारतीय किसान यूनियन एकता, सिद्धूपुर, जालंधर ने जेल भरो आंदोलन किया, और इस दौरान कई किसानों ने अपनी गिरफ्तारियां दीं।

Kisan Andolan Timeline: 378 दिनों से चल रहा किसान आंदोलन स्थगित, जानिए कब-कब क्या हुआ?
तस्वीर साभार: Press Trust of India

तीनों कृषि बिल हुए पारित!

14 सितंबर 2020 – पहली बार सरकार ने इन अध्यादेशों को संसद में पेश किया। इन तीनों कृषि बिल का विपक्षी दलों ने विरोध किया। 17 सितंबर को तीनों कृषि बिल लोकसभा से पारित हुए। संसद में विरोधी दलों द्वारा काफी हंगामे के बीच ये बिल पास हुए।

25 सितंबर, 2020 – कृषि बिलों को लेकर किसान संगठनों ने बड़ा विरोध जताना शुरू किया। किसान संघर्ष कॉर्डिनेशन कमेटी ने राष्ट्रव्यापी विरोध का ऐलान किया।

27 सितंबर 2020 – राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द द्वारा कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश (Farmers’ Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Act, 2020), आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में संशोधन (The Essential Commodities (Amendment) Bill), मूल्य आश्वासन पर किसान (संरक्षण एवं सशक्तिकरण) समझौता और कृषि सेवा अध्यादेश (The Farmers (Empowerment and Protection) Agreement of Price Assurance and Farm Services Bill) कानून बनकर हुए लागू।

5 नवंबर 2020 – किसानों ने भारत बंद का ऐलान किया, इसका ज़्यादा असर हरियाणा और पंजाब में  देखने को मिला। इसके बाद पंजाब के 32 किसान संगठनों ने देश के अन्य संगठनों से बातचीत करनी शुरू की और संयुक्त किसान मोर्चा का 7 नवंबर को गठन किया गया। 9 नवंबर को किसानों की 9 सदस्यीय  मेटी का गठन किया गया।

दिल्ली चलो आंदोलन का ऐलान!

Sanmukt Kisan Ekta Morcha

25 नवंबर 2020 – किसान संगठनों ने दिल्ली चलो आंदोलन का ऐलान किया। हरियाणा और पंजाब की सीमा पर किसानों के दिल्ली कूच को रोका गया। यहां बैरिकेडिंग की गई, बड़े-बड़े अवरोध लगाए गए, लेकिन किसानों ने दिल्ली की ओर कूच जारी रखा। 26 नवंबर को किसान दिल्ली की सीमा पर पहुंचे। सम्बंधित पूरी जानकारी

28 नवंबर 2020 –  गृह मंत्री अमित शाह ने किसानों से अपील की, कि वो बुराड़ी में निरंकारी मैदान चले जाएं और सरकार से वार्ता में शामिल हों, लेकिन किसान नहीं माने। सिंघु बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर, चीका, शाहजहांपुर और टीकरी बॉर्डर समेत कई जगहों पर किसानों ने मोर्चा जमाया। सम्बंधित पूरी जानकारी

सरकार और किसान संगठनों के बीच 11 दौर की बातचीत हुई

1 दिसंबर 2020 – इस दिन केंद्र सरकार और किसानों के बीच बातचीत का दौर शुरू हुआ। पहली बार किसान नेताओं ने केंद्र सरकार के मंत्रियों से मुलाकात की। पहले दौर की इस बातचीत में केंद्र सरकार ने एक कमेटी गठित कर मामले का हल निकालने का प्रस्ताव रखा जिसे किसानों ने नकार दिया। इसी दिन दूसरे दौर की वार्ता भी हुई। इसके बाद 3 दिसंबर से लेकर 30 दिसंबर तक 6 दौर की बातचीत हुई लेकिन कोई हल नहीं निकला।

2 जनवरी 2021 – संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार को अल्टिमेटम दिया कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर मार्च करेंगे। 4 जनवरी से लेकर 8 जनवरी तक, दो दौर की बैठक और हुई लेकिन इनमें भी कोई समाधान नहीं निकला।

12 जनवरी 2021 – सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक तीनों कृषि कानूनों (Farm Laws) पर रोक लगाई और चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया।

15 जनवरी 2021 – नौवें दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही। किसान, कानूनों को पूरी तरह से रद्द करने की अपनी मुख्य मांग पर अड़े रहे। 22 जनवरी को 11वें  दौर की आखिरी बातचीत भी बेनतीजा रही।

ट्रैक्टर मार्च - किसान आंदोलन

ट्रैक्टर मार्च और हिंसा में तब्दील हुआ किसान आंदोलन!

26 जनवरी 2021 – गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकाली। इस दौरान दिल्ली के कई इलाकों में प्रशासन और किसानों के बीच हिंसक झड़पें हुईं । लाल किले पर धार्मिक झंडा फहराए जाने के आरोप भी लगे। आरोपों के बाद बॉर्डरों से अपने आप किसान वापस जाना शुरू हुए। उत्तर प्रदेश प्रशासन ने गाजीपुर बॉर्डर खाली कराने की तैयारी शुरू कर दी। 28 जनवरी की रात को राकेश टिकैत भावुक हुए और आंदोलन स्थल न छोड़कर जाने की बात कही। 6 फरवरी को किसानों ने ‘चक्का जाम’ भी किया। इसके बाद हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पंचायतों के कई दौरे हुए जिनमें  हजारों किसान शामिल हुए।

5 सितंबर 2021 – उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में महापंचायत हुई। किसान नेताओं ने कहा कि कृषि कानून वापसी तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी। संयुक्त किसान मोर्चा ने अपनी अगली रणनीति का भी महापंचायत में ऐलान किया।

किसान महापंचायत
तस्वीर साभार: the quint

27 सितंबर 2021 – कृषि कानूनों को वापस लेने, एमएसपी (MSP) पर कानून बनाने समेत कई मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा की अगुवाई में देशभर के कई राज्यों में रेलवे और हाइवे ट्रैक रोके गए।

3 अक्टूबर 2021 – उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में बीजेपी नेताओं और किसानों के बीच झड़प हुई। केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा पर आरोप लगा कि उनकी गाड़ी ने किसानों को रौंदा, जिसमें 4 किसानों समेत 8 लोगों की मौत हुई । लखीमपुर हिंसा के बाद देशभर के किसान संगठनों ने इस पर कार्रवाई की मांग की।

farm laws repealed

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया कृषि कानून वापस

19 नवंबर 2021 –  गुरु पर्व पर किसानों के लिए बड़ा फैसला आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया। पीएम मोदी ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि किसानों को अब अपने घरों और खेतों में लौट जाना चाहिए। ऐलान के बाद 24 नवंबर को केंद्रीय कैबिनेट ने कृषि कानूनों की वापसी के लिए औपचारिकताएं पूरी कीं। बिल वापसी की पूरी प्रक्रिया 29 नवंबर को हुई।

9 दिसंबर को किसान संगठनों की मांगों को केंद्र सरकार ने स्वीकार किया है। संयुक्त किसान एकता मोर्चा ने किसान आंदोलन को स्थगित करने का एलान किया। 11 दिसंबर से दिल्ली बॉर्डर से किसानों ने घर वापसी शुरू की।

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