पहले RSS से जुड़े थे यह नेता, आज कर रहे हैं मोदी सरकार के कृषि कानूनों का विरोध

किसान आंदोलन को दो महीने से अधिक समय हो गया है लेकिन इस समस्या का अभी तक कोई समाधान नहीं […]

farmers protest in india

किसान आंदोलन को दो महीने से अधिक समय हो गया है लेकिन इस समस्या का अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है। किसान संगठनों और सरकार के बीच 11 राउंड की बातचीत हो चुकी है लेकिन मसला अभी भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है। आज हालांकि सरकार ने नरमी दिखाते हुए कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक लागू न करने की बात कही है लेकिन किसान नेता इस  पर अलग से बैठक करने के बाद फैसला लेंगे।

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किसान नेताओं का कहना है कि 22 जनवरी को बैठक के बाद सरकार के इस प्रस्ताव का जवाब देंगे। गणतंत्र दिवस पर ट्रेक्टर रैली निकालने पर अड़े किसानों को रोकने के लिए दायर की गई सरकार की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया और सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि सरकार अपनी याचिका वापस ले। कोर्ट इस मसले पर दखल नहीं देगा। रैली निकालने की अनुमति देना या ना देना सरकार और पुलिस का काम है। अब देखना है कि अगर पुलिस किसानों को रैली निकालने की अनुमति नहीं देती है तो किसानों का अगला फैसला क्या होगा।

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किसान नेताओं ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं और वह लगातार कानून वापस लेने की मांग पर अड़े हैं। इन्हीं किसान नेताओं में एक नाम है मध्यप्रदेश के जाने-माने किसान नेता शिवकुमार शर्मा का। शिवकुमार शर्मा खुद संघ और बीजेपी की विचारधारा का समर्थन करते हैं। मध्यप्रदेश में किसान शिवकुमार शर्मा को ‘कक्का जी’ के नाम से बुलाते हैं। शिवकुमार शर्मा कुछ सालों पहले संघ से जुड़े थे।

संघ में रहते हुए शिवकुमार शर्मा लगातार किसानों की समस्याओं को उठाते रहे हैं। कक्का जी पहले संघ के ही संगठन भारतीय किसान संघ से जुड़े थे लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने तत्कालीन शिवराज सरकार के खिलाफ चलकर भारतीय किसान मजदूर महासंघ नाम का संगठन बना लिया। वह कई मौकों पर शिवराज सिंह का खुलकर विरोध कर चुके हैं।

कक्का जी किसानों के लिए बहुत पहले से संघर्ष करते रहे हैं लेकिन 20 दिसंबर 2010 में भोपाल में हुए किसान आंदोलन ने उन्हें किसान नेता के रूप में पहचान दिलाई। 2010 में हुए इस आंदोलन में किसानों ने न धरना-प्रदर्शन किया, न रैली निकाली, बल्कि करीब 15 हजार किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल पहुंचे और मुख्यमंत्री निवास सहित सभी वीआइपी क्षेत्रों को जाम कर दिया।

पुलिस-प्रशासन को इसकी भनक भी नहीं लगी और देखते ही देखते शहर एक तरह से बंधक हो गया। 85 मांगों को लेकर यह आंदोलन तीन दिन तक चलता रहा। तब प्रदेश में भाजपा सरकार थी और कक्का जी आरएसएस से जुड़े किसान संगठन भारतीय किसान संघ के मध्य प्रदेश के अध्यक्ष थे। मध्य प्रदेश के मंदसौर में जून 2017 में हुए बड़े किसान आंदोलन में भी कक्का जी की अहम भूमिका मानी जाती है।

कक्का जी होशंगाबाद जिले के बनखेड़ी के पास ग्राम मछेरा खुर्द में खेती करते हैं। उनका जन्म 28 मई 1952 को हुआ था। उन्होंने जबलपुर की रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से स्नातक किया है। कक्का जी जेपी आंदोलन और आपातकाल के दौरान भी कई बार जेल गए। उन्होंने 1981 में मध्य प्रदेश सरकार के विधि बोर्ड में सलाहकार के रूप में काम किया, लेकिन तत्कालीन मध्य प्रदेश के बस्तर में केंद्र सरकार के कानून 70 (ख) के तहत आदिवासियों की जमीन मुक्त करवाने के दौरान वे कई रसूखदारों के निशाने पर आ गए, जिसके बाद उनका तबादला भोपाल कर दिया गया। कुछ समय नौकरी करने के बाद वे किसान आंदोलन में कूद पड़े।

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