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फसलों को रोग और कीटों से बचाएगा फोल्डस्कोप माइक्रोस्कोप, जानिए इस आविष्कार के बारे में

खेत में ही करेगा रोग और कीटों की पहचान

जीवाणु और फफूंद के कारण होने वाले रोग और कीटों से हर साल किसानों को बहुत नुकसान उठाना पड़ता है। अगर समय रहते रोग और कीटों की सही पहचान कर ली जाए, तो ज़रूरी कदम उठाकर किसान आर्थिक हानि से बच सकते हैं। ऐसा करने में पोल्टस्कोप माइक्रोस्कोप (Foldscope Paper Microscope) उनकी बहुत मदद कर सकता है।

दूर-दराज के गांवों में रहने वाले छोटे किसानों को ख़ासतौर पर हर साल रोग और कीटों के कारण फसल की भारी हानि होती है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। किसान कीटनाशकों का इस्तेमाल तो करते हैं, लेकिन कई बार रोग की सही और समय पर जानकारी न होने के कारण फसल की हानि हो जाती है।

ऐसे में बहुत ज़रूरी है कि कोई ऐसी चीज़ किसानों के लिए बने जिससे खेत में ही रोग व कीटों की सटीक जानकारी मिल जाए, ताकि शुरुआत में ही उसे रोकने के लिए कारगर कदम उठाकर किसान हानि से बच सकें। किसानों की इस समस्या का हल डॉ. मनु प्रकाश ने 2014 में ढूंढ़ निकाला। ये समाधान है पेपर आधारित फोल्डस्कोप माइक्रोस्कोप।

पेपर से बना ये माइक्रोस्कोप असली माइक्रोस्कोप की तरह ही काम करता है और आसानी से फोल्ड करके इसे कहीं भी ले जाया जा सकता है। फोल्डस्कोप माइक्रोस्कोप किसानों का बहुत उपयोगी और कारगर यंत्र है, जिससे फसल में बढ़ोतरी करके वो अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं।

फसलों को रोग-कीटों से बचाएगा फोल्डस्कोप माइक्रोस्कोप
तस्वीर साभार: amazon

क्या है ख़ासियत?

  • फोल्डस्कोप माइक्रोस्कोप आकार में बहुत छोटा और हल्का होता है। इसे आसानी से फोल्ड करके कहीं भी ले जा सकते हैं।
  • ये सामान्य माइक्रोस्कोप की तरह ही काम करता है और बहुत टिकाऊ होता है क्योंकि ये कागज से बना होता है।
  • इसका इस्तेमाल रोग और कीटों की प्राथमिक स्तर पर पहचान के लिए किया जाता है।
  • पौधों के साथ ही पशुओं के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • इसके ज़रिए बहुत छोटे कीटों की भी पहचान की जा सकती है।
  • इसके उपयोग से किसान कीट व रोगों के कारण होने वाली फसल हानि से बच सकते हैं।
  • ये बहुत सस्ता है इसे सिर्फ़ 100 रुपये में ही बनाया जा सकता है। इसलिए छोटे किसान भी आसानी से इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

कैसे काम करता है?

फोल्डस्कोप माइक्रोस्कोप (Foldscope Paper Microscope) का इस्तेमाल करने के लिए लेक्टोफिनाल, स्लाइड, कवर स्लीप, नीडिल, टेप, ब्रश, रूई, मार्कर पेन, चिमटी और एल्कोहल की ज़रूरत होती है। सबसे पहले किसी एरिया में रोग और कीट की पहचान के लिए संक्रमित नमूने को साफ स्लाइड के ऊपर रखें और फिर उसपर लेक्टोफिनाल की एक बूंद डालें। नमूने को चिमटी या निडिल की मदद से रखते हैं। फिर उसके ऊपर कवर स्लीप लगा दिया जाता है। तैयार स्लाइड को जांच के लिए फोल्डस्कोप में लगाया जाता है। इसे ठीक तरह से एडजस्ट किया जा सकता है। फोल्डस्कोप के साथ मोबाइल अटैच करके नमूने को देखा जा सकता है। मोबाइल में नमूने की फोटो को ज़ूम करके भी इसे देख सकते हैं और इसे आप मोबाइल में सेव भी कर सकते हैं।

फसलों को रोग-कीटों से बचाएगा फोल्डस्कोप माइक्रोस्कोप
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फोल्डस्कोप माइक्रोस्कोप की एक ख़ासियत ये भी है कि इसमें बिजली की भी ज़रूरत नहीं पड़ती और सूरज की रोशनी या एल. ई. डी. मैग्नीफायर (LED Lighted Magnifying Glass) के ज़रिए इसे देख सकते हैं। इसलिए दूरदराज के गांव जहां बिजली नहीं है, वहां के किसानों के लिए भी ये उपकरण उपयोगी है। यह सूक्ष्मरोगों की पहचान आसानी से कर लेता है, जिससे किसान संक्रमित फसल को बचाने के लिए समय रहते ही सही कीटानाशक का उपयोग कर सकते हैं। इससे फसल बर्बाद होने से बच जाती है।

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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