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Dairy Farming Business Plan Guide | डेयरी फ़ार्मिंग अब देश का एक बड़ा बिज़नेस सेक्टर बन चुका है। इससे बड़ी संख्या में लोगों का स्वरोज़गार और रोज़गार जुड़ा हुआ है। पुराने ज़माने में लोग पशुपालन या दूध बेचने के काम को बिज़नेस की तरह नहीं देखते थे, लेकिन अब ये एक मुनाफ़े वाला व्यापार बन चुका है। आजकल लोग नौकरी छोड़कर भी डेयरी बिज़नेस (Dairy Business) से जुड़ रहे हैं क्योंकि इसमें आमदनी अच्छी है।
आज डेयरी बिज़नेस ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। डेयरी फ़ार्मिंग कितना मुनाफ़े का सौदा साबित हो सकता है, इसका अंदाज़ा आपको सूरत के करावाड्रा परिवार की कहानी जानकर हो जाएगा। 35 साल पहले डेयरी बिज़नेस से जुड़ने के बाद करावाड्रा परिवार को कभी पीछे मुड़कर देखने की ज़रुरत नहीं पड़ी।
किसान ऑफ़ इंडिया के संवाददाता गौरव मनराल के साथ बातचीत में करावाड्रा परिवार की सदस्य नीताबेन मुरुभाई करावाड्रा ने बीते साढ़े तीन दशकों की इस सफल यात्रा से जुड़ी ऐसी कई ज़रूरी बातें साझा की, जिन्हें अपनाकर आप भी करावाड्रा परिवार की तरह सफल डेयरी फ़ार्मिंग बिज़नेस (Dairy Farming Business) शुरू कर सकते हैं।
कैसे 2 से बढ़कर हुई 250 भैंसे?
करावाड्रा परिवार मूल रुप से पोरबंदर ज़िले का रहने वाला है। नीताबेन बताती हैं कि गांव में लगातार बारिश की कमी के कारण उनके सास-ससुर करीब 35 साल पहले पोरबंदर से सूरत आए थे। गांव से वो अपने साथ दो भैंस भी लेकर आए थे जिनके सहारे उन्होंने यहां एक तबेले की शुरुआत की। कड़ी मेहनत और डेयरी फ़ार्म की बुनियादी समझ को विकसित करने के साथ ही बाज़ार की आवश्यकताओं के मुताबिक सही समय पर उचित निर्णय लेते हुए वो इस व्यवसाय में लगातार आगे बढ़ते गए।
सास-ससुर ने केवल दो भैंसों से जिस छोटे-से तबेले की शुरुआत की थी, आज वो 250 भैंसों वाला एक बड़ा डेयरी फ़ार्म बन चुका है। ये भैंसे रोज़ाना करीब 900 से 950 लीटर तक दूध देती हैं, जिसे सूरत शहर में अलग-अलग जगहों पर सप्लाई किया जाता है।
आत्मनिर्भर बनकर बेरोजगारों का सहारा बना परिवार
डेयरी बिज़नेस ने करावाड्रा परिवार को आत्मनिर्भर बनाया और अब ये परिवार क्षेत्र के कई दूसरे परिवारों का सहारा बना है। नीताबेन ने बताया कि उनके सास-ससुर ने डेयरी का जो व्यवसाय खड़ा किया है, अब उसे पूरा परिवार मिलकर आगे बढ़ा रहा है। वो और उनके पति, उनके देवर और देवरानी तो इस काम से जुड़े ही हैं, साथ ही भैंसों की देखभाल के लिए उन्होंने पांच लोगों को रोज़गार पर भी रखा है। उनकी योजना है कि जिस तरह उनके सास-ससुर ने भैंसों की संख्या को 2 से 250 तक पहुंचाया है, अब उसे पूरा परिवार मिलकर हज़ार तक ले जाए।
चारा-पानी, साफ़-सफ़ाई का रखें ध्यान
नीताबेन बताती हैं कि भैंसों को अच्छा चारा-पानी देने के साथ ही साफ़-सफ़ाई का भी बड़ा महत्व है। भैंसों को दिन में दो बार नहलाना और उनके रहने की जगह को हमेशा साफ़ रखना ज़रूरी है। वो अपनी भैंसों को चारे में ज्वार और बुलेट घास देती हैं। वहीं, चावल का सूखा चारा, शेहड़ी में मिलाकर दिया जाता है। भैंसों का चारा मौसम के हिसाब से नहीं, बल्कि चौमासे में बदलता है।
परिवार के सदस्य की तरह भैंसों की देखभाल
नीताबेन के अनुसार भैंसों की देखभाल घर के बच्चों की ही तरह करनी होती है। तभी उनका मालिक के साथ गहरा संबंध बनता है। बीमार होने पर उन्हें समय पर दवाइयां खिलानी पड़ती हैं। ज़रुरत पड़ने पर बीमार भैंस को डॉक्टर के पास भी ले जाते हैं।
डेयरी फ़ार्म की शुरुआत कैसे करें? (Dairy Farming Business Plan Guide)
नीताबेन की सफलता देखने के बाद अगर आप भी डेयरी फ़ार्मिंग का बिज़नेस शुरू करने की सोच रहे हैं, तो जान लें कि इसकी शुरुआत आप कैसे कर सकते हैं-
- सबसे पहले डेयरी फ़ार्म लगाने के लिए उचित जगह का चुनाव करें।
- सही जगह तय करने के बाद बारी आती है पशुओं के चुनाव की। आपको ये देखना होगा कि किस नस्ल की गाय या भैंस अच्छी होती है जिसे रखने से आपका ज़्यादा फ़ायदा हो।
- मुर्रा और मेहसाना भैंसों की लोकप्रिय नस्लें हैं। वहीं गाय की लोकप्रिय नस्लों में साहीवाल, फ़्रिसियन और जर्सी शामिल हैं।
- डेयरी फ़ार्म से मुनाफ़ा कमाना चाहते हैं, तो आपकी भैंस/गाय की नस्ल की अच्छी समझ ज़रुरी है। अपने क्षेत्र के हिसाब से भी नस्लों का चयन करें।
- नस्ल के हिसाब से दुधारु पशु की कीमत भी अलग-अलग होती है। इसलिए अपने बजट के हिसाब से भी नस्ल का चुनाव करें।
डेयरी फ़ार्म के लिए ज़रूरी बातें
डेयरी फ़ार्म शुरू करने के लिए आपको कुछ चीज़ों की ज़रूरत होगी जैसे-
शेड– पशुओं को हमेशा खुले में नहीं रख सकते। सर्दी, बरसात से पशुओं को बचाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था करना ज़रूरी है। इसलिए जिस जगह पशुओं को रखना हो, वहां शेड बनवाकर उस जगह को अच्छी तरह ढक दें।
चारा-पानी की व्यवस्था– पशुओं की संख्या के हिसाब से आपको पानी और चारे की उचित व्यवस्था करनी होगी। पीने का पानी साफ़ होना चाहिए और चारा भी पौष्टिक दें।गाय-भैंस अच्छा दूध दें, इसके लिए बहुत ज़रूरी है कि आप उन्हें पौष्टिक चारा दें। इसके लिए आपके पास थोड़ी ज़मीन भी होनी चाहिेए जहां आप हरा चारा उगा सकें। एक एकड़ ज़मीन पर 8-10 गायों को खिलाने के लिए पर्याप्त चारा उगाया जा सकता है।
नस्ल का चुनाव और टीकाकरण– अधिक दूध उत्पादन के लिए अच्छी नस्ल के पशुओं का चुनाव करने के साथ ही बीमारी से बचाव के लिए उनका टीकाकरण भी करवाएं। डेयरी फ़ार्म शुरू करने से पहले ही इस बारें में जानकारी जुटाना ज़रूरी है कि कब काउंस टीका लगना चाहिए।
डेयरी फ़ार्म में निवेश
डेयरी फ़ार्म एक ऐसा बिज़नेस है जिसे यदि थोड़ी समझदारी से किया जाए, तो मुनाफा होना तय है। अप्रत्याशित परिस्थितियों को छोड़ दिया जाए, तो दूध की मांग कभी कम नहीं होने वाली है। ऐसे में डेयरी बिज़नेस का भविष्य उज्ज्वल बना रहेगा। आप चाहें तो दूध से दही, पनीर, घी आदि बनाकर अतिरिक्त कमाई भी कर सकते हैं। छोटे पैमाने पर डेयरी बिज़नेस शुरू करने में 10-20 लाख रूपए का निवेश करना पड़ सकता है। डेयरी बिज़नेस के लिए सरकार की ओर से 25 से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी भी दी जाती है। अलग-अलग राज्यों में यह सब्सिडी अलग-अलग हो सकती है।
डेयरी बिज़नेस के लिए लोन
डेयरी फ़ार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत बैंक से लोन भी दिया जाता है। ख़ास बात ये है कि इस लोन पर सब्सिडी भी मिलती है। अगर आप 10 पशुओं की डेयरी खोलना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको 10 लाख रुपए तक की व्यवस्था करनी होगी। कृषि मंत्रालय की डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत आपको करीब 2.5 लाख रुपए तक की सब्सिडी मिल सकती है।
डेयरी से मूल्य संवर्धन उत्पाद
डेयरी फ़ार्मिंग में किसान दूध बेचने के साथ ही दूध से बने कई अन्य उत्पाद जैसे दही, घी, पनीर, मावा, मिठाई आदि बेचकर भी अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। साथ ही गाय का गोबर बेचकर भी कमाई की जा सकती है। कृषि खाद के रूप में गोबर की बहुत मांग है।
बेशक, डेयरी फ़ार्मिंग एक मुनाफ़े वाला व्यवसाय है लेकिन ये जितना आसान दिखता है, वास्तव में उतना है नहीं। पशुओं की साफ़-सफ़ाई से लेकर चारा-पानी और उनकी बीमारियों के बारे में जानकारी जुटाने के साथ ही समय पर इसकी व्यवस्था सुनिश्चित करना भी ज़रुरी होता है। समझदारी और संयम से काम लिया जाए, तो इस चुनौती को भी सफ़लता में बदला जा सकता है।