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वर्मीकम्पोस्ट बिज़नेस (vermicompost business) पर खास सीरीज़, पार्ट 1: वर्मीकम्पोस्टिंग के गुरु अमित त्यागी से जानिए बेड बनाने के लिए कैसी होनी चाहिए मिट्टी और पानी?   

अमित त्यागी 25 साल से कर रहे हैं वर्मीकम्पोस्ट बिज़नेस, 16 हज़ार से ज़्यादा यूनिट्स लगाईं 

वर्मीकम्पोस्ट बिज़नेस पर खास सीरीज़ में आपकी मुलाकात हो रही है उत्तर प्रदेश के मेरठ में रहने वाले अमित त्यागी से जो इस व्यवसाय के गुरु बन गए हैं। आप हमारी इस सीरीज़ में इस व्यवसाय से जुड़ी हर जानकारी के बारे में जानेंगे। 

मैं किसानों यानी आपके लिए खेती से जुड़ी काम की जानकारी तलाशने उत्तर प्रदेश के मेरठ गया था। मेरठ में कई ऐसे प्रगतिशील किसान हैं जो खेती-किसानी में कुछ अलग कर रहे हैं और समृद्धि की ओर बढ़ रहे हैं। किसान ऑफ़ इंडिया की टीम पहले भी मेरठ में खेती से जुड़ी कई रोचक कहानियां आपके लिए लेकर आई है।

इस बार मेरी मुलाकात हुई वर्मीकम्पोस्टिंग के गुरु अमित त्यागी से जो 25 साल से इस व्यवसाय को बड़ी बारीकी से करे रहे हैं और इसमें सफ़ल भी हैं। वह मेरठ के कीनानगर गांव में सजग ऑर्गेनिक्स नाम से कंपनी चला रहे हैं। आज आप मेरी उनसे हुई बातचीत का पहला भाग पढ़ेंगे और आगे मेरे साथ इस सफ़र में जुड़कर आपको वर्मीकम्पोस्ट से जुड़ी हर जानकारी मिलेगी जो आप जानना चाहते हैं।

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कैसे हुई वर्मीकम्पोस्ट बिज़नेस की शुरुआत? 

अमित त्यागी ने बताया कि वर्मीकम्पोस्ट के बिज़नेस को शुरू करने का आइडिया उनकी पत्नी का था। 27 साल पहले उन्होंने इस बिज़नेस को शुरू किया था। उस समय वह एक फ्रेंच कंपनी में मार्केटिंग की जॉब करते थे। 25 साल पहले उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ी। उस समय उनकी तनख्वाह 27 हज़ार 800 रुपये थी। अमित त्यागी बताते हैं – हमने ये प्रोजेक्ट इसलिए शुरू किया था क्योंकि हमें किसान को समृद्ध बनाना था। किसान अपने घर पर खाद बना सके, कीटनाशक बना सके और मिट्टी में जैविक पदार्थ डलें, ये उनका मिशन था। इससे सिर्फ किसानों को नहीं, सबको लाभ पहुंचेगा।

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25 साल पहले क्या थी खेती की तस्वीर?

उन्होंने बताया कि जब वो 25 साल पहले लोगों को जैविक खाद के बारे में समझाने जाते थे तो लोग नहीं समझते थे। उस समय लोग अजीब बातें करते थे। लेकिन उनका मानना है कि अगर हमें किसानों को जैविक खेती के लिए मनाना है तो हमें जैविक खेती के अच्छे परिणाम देने होंगे। उन्होंने इसके लिए फिर प्रयास शुरू किए और एक-एक वर्मीकम्पोस्ट खाद का कट्टा हरिद्वार, आगरा, देहरादून जाकर दिया। इसके उन्हें अच्छे परिणाम मिले।

उन्होंने बताया कि उस समय उन्हें वर्मीकम्पोस्ट के बारे में  ज्ञान भी नहीं था। फिर उन्होंने इसके बारे में पढ़ा और उन्हें खेत में अप्लाई भी किया। उन्होंने सही वर्मीकम्पोस्ट का फॉर्मूला बनाने के लिए कई प्रयोग किए। उसमें वह कई बार विफल भी हुए लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने ये जानकारी बाद में किसानों को भी दी।

उनका मानना है कि आज के समय में सभी चीजें मिलना सुलभ है। आपको इंटरनेट पर ही वर्मीकम्पोस्ट से जुड़ी कई जानकारियां मिल जाती हैं, जबकि पहले के समय में आपको खुद जाकर सबको बताना, करवाना और समझना पड़ता था।

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वर्मीकम्पोस्ट बेड बनाने के लिए सही तापमान होना भी जरूरी है

वर्मीकम्पोस्ट बेड बनाने के लिए कैसी हो मिट्टी और पानी?

अमित त्यागी ने बताया कि मैंने इस पर पहले प्रयोग करके रिसर्च की। शुरुआत में बहुत बार केंचुए मरे भी हैं, लेकिन बाद में एक कामयाब फॉर्मूला बनकर सामने आया। उन्होंने वर्मीकम्पोस्ट बेड बनाने के लिए अपर पीट मेथड, डीप पिट मेथड, विंडरों मेथड और HDPE प्रॉपलीन मेथड सब प्रयोग किए। उनका मानना है HDPE प्रॉपलीन मेथड व्यावसायिक स्तर पर ठीक नहीं है।

उनका ये भी मानना है कि बेड बनाने का मेथड वातावरण और पानी पर भी निर्भर करता है। उनके यहां दोमट मिट्टी है तो कितनी भी बारिश पढ़े वो इसे सोख लेगी। दूसरी ओर अगर कहीं चिकनी मिट्टी हो तो बारिश की वजह से जल भराव की समस्या देखने को मिलती है। वहीं अगर कहीं पानी का pH ज़्यादा या कम होगा तो वो भी एक समस्या है। पानी का pH 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए। इसके अलावा पानी का TDS होना भी एक समस्या है।

इसके साथ ही वर्मीकम्पोस्ट बेड बनाने के लिए सही तापमान होना भी जरूरी है। जैसे हम सिक्किम, बेंगलुरू  की बात करें तो वहां बारिश बहुत ज़्यादा होती है इसलिए वहां विंडरों मेथड सहीं नहीं है। वहां हमें HDPE प्रॉपलीन मेथड लगाना चाहिए। अगर मैदानी क्षेत्र है तो विंडरों मेथड कामयाब है। हर क्षेत्र में तापमान और ज़मीन के अनुसार बेड बनाने का अलग तरीका होता है।

ऐसे ही वर्मीकम्पोस्ट बिज़नेस से जुड़ी कई और काम की जानकारियां मैं आपको अगले भाग में बताऊँगा। आपके क्षेत्र में बेड बनाने का क्या तरीका होना चाहिए? केंचुए की कौनसी किस्म का इस्तेमाल करना चाहिए? बेड बनाने में कितनी आती है लागत? इन सभी सवालों के जवाब आप मेरे साथ जानेंगे।
(आगे भी ज़ारी – पढ़ते रहिये www.kisanofindia.com)

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सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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