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Vermicompost: कृष्ण कुमार ने तैयार किया वर्मीकम्पोस्ट बनाने का सस्ता फ़ॉर्मूला, फ़्री में देते हैं ट्रेनिंग

अब तक दे चुके हैं 10 हज़ार लोगों को ट्रेनिंग

हरियाणा के रहने वाले कृष्ण कुमार ने 2016 में वर्मीकम्पोस्ट व्यवसाय में कदम रखा था। उस वक़्त कई लोगों ने उन्हें इसके लिए मना किया था, लेकिन प्रकृति के प्रति उनके लगाव ने उन्हें खेती-किसानी से जोड़ा। जानिए इस व्यवसाय का पूरा गणित।

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देश में बड़े स्तर पर जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसकी मुख्य वजह है कि प्राकृतिक खेती से न सिर्फ़ किसानों की लागत में कमी आएगी बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। दूसरी तरफ जिस तरह से महामारी के इस दौर में जैविक उत्पादों की तरफ लोगों का रुझान बढ़ रहा है, उसे देखते हुए आना वाला समय प्रकृति आधारित खेती का होगा। प्राकृतिक खेती में जैविक खाद एक मुख्य कारक है। जैविक खाद को कई तरह से तैयार किया जाता है। इसमें से एक है केंचुओं के ज़रिये निर्मित जैविक खाद ‘वर्मीकम्पोस्ट’ यानी कि केंचुआ खाद। केंचुए हरेक तरह का जैविक कूड़ा-कचरा खा सकते हैं और अपने मल तथा स्राव के रूप में शानदार जैविक खाद उत्सर्जित करते हैं। केंचुओं के इन्हीं गुणों की वजह से इन्हें बाक़ायदा व्यावसायिक रूप से पाला जाता है और अतिरिक्त आमदनी के लिए भी अपनाया जाता है। हरियाणा के रहने वाले कृष्ण कुमार भी पिछले पाँच सालों से वर्मीकम्पोस्ट व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। किसान ऑफ़ इंडिया से ख़ास बातचीत में उन्होंने वर्मीकम्पोस्ट बिज़नेस को लेकर कई अहम बातें साझा की। वो खुद वर्मीकम्पोस्ट को लेकर फ़्री में ट्रेनिंग देते हैं। 

देशभर में हज़ार के ऊपर वर्मीकम्पोस्ट यूनिट्स

कृष्ण कुमार को हमेशा से प्रकृति से लगाव रहा। इसी लगाव ने उन्हें आज खेती-किसानी से जोड़ा है। उन्होंने महराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान से लेकर उत्तर प्रदेश, बिहार और हरियाणा में वर्मीकम्पोस्ट, मुर्गी पालन, बकरी पालन, डेयरी फ़ार्मिंग, मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग ली। ट्रेनिंग लेने के बाद ही उन्होंने वर्मीकम्पोस्ट यूनिट के व्यवसाय में कदम रखने का निर्णय लिया। उनका कहना है कि ये एक ऐसा व्यवसाय है जो कम लागत में अच्छा मुनाफ़ा देने का माद्दा रखता है। उन्होंने 2016 में 2 बेड से इस बिज़नेस को शुरू किया था। आज उनके फ़ार्म में वर्मीकम्पोस्ट के करीबन 700 बेड बने हुए हैं। हरियाणा के पटौदी में ग्रीन भारत फ़ार्म के नाम से उनकी ये वर्मीकम्पोस्ट यूनिट है। उनका ये फ़ार्म डेढ़ एकड़ के क्षेत्र में बना हुआ है। उनका एक फ़ार्म खेतियावास में भी है, जहां बड़े पैमाने पर वर्मीकम्पोस्ट यूनिट्स पर काम चल रहा है। इसका क्षेत्र करीबन दो एकड़ है। लखनऊ और जयपुर में उन्होंने सहभागिता के साथ कई और वर्मीकम्पोस्ट यूनिट्स खोली हैं। अब तक कुल मिलाकर हज़ार से ऊपर बेड इन यूनिट्स में लग चुके हैं। 

वर्मीकम्पोस्ट खाद यूनिट vermicompost unit

सस्ती दरों में तैयार करवाते हैं वर्मीकम्पोस्ट यूनिट्स

कृष्ण कुमार अब तक देशभर में करीब 350 वर्मीकम्पोस्ट यूनिट्स लगवा चुके हैं। तीन यूनिट नेपाल में भी लगवाई हैं। 30 से 40 बेड वाली वर्मीकम्पोस्ट यूनिट्स तैयार करके दी हैं। कृष्ण कुमार ने बताया कि उनके द्वारा बनाई गई वर्मीकम्पोस्ट यूनिट्स सबसे कम लागत में तैयार की जाती हैं। वर्मीकम्पोस्ट के बेड बनाने के लिए ईट की जगह मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है। मिट्टी से दीवार बनाई जाती है। वर्मीकम्पोस्ट तैयार करने के लिए 30*4 (30 फीट लंबा और 4 फीट चौड़ा) बेड तैयार करते हैं। कृष्ण कुमार ने बताया कि वो एक बेड लगाने का 5 से साढ़े 5 हज़ार चार्ज करते हैं, जबकि इतने के ही बाहर 10 हज़ार रुपये लिए जाते हैं। 

वर्मीकम्पोस्ट खाद यूनिट vermicompost unit

फ़्री में देते हैं ट्रेनिंग

फ़ार्म में वर्मीकम्पोस्ट को लेकर हर हफ़्ते रविवार को किसानों को फ़्री में ट्रेनिंग भी दी जाती है। कृष्ण कुमार कहते हैं कि आज के वक़्त में वर्मीकम्पोस्ट एक बड़ा व्यवसाय बनकर उभर रहा है। यही वजह है कि देशभर में इतनी यूनिट्स लग रही हैं। सरकार भी जैविक खेती और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है, ऐसे में इसका महत्व और बढ़ जाता है। वो फ़ार्म में आने वाले लोगों को सरल से सरल तरीके से वर्मीकम्पोस्ट को लेकर जानकारी देते हैं। चार से पाँच घंटे का ट्रेनिंग सेशन होता है। अब तक 10 हज़ार से ऊपर लोग उनके वहाँ से ट्रेनिंग ले चुके हैं। दो साल पहले ही उन्होंने नि:शुल्क ट्रेनिंग सेशन देने की शुरुआत की थी। 

वर्मीकम्पोस्ट खाद यूनिट vermicompost unit
फ़ार्म में ट्रेनिंग लेने आए युवकों के साथ कृष्ण कुमार

उपलब्ध करवाते हैं केंचुए और वर्मीकम्पोस्ट

कृष्ण ने बताया कि उनके वहां से सस्ते दरों में केंचुए और वर्मीकम्पोस्ट उपलब्ध कराए जाते हैं। 6 रुपये प्रति किलो से लेकर 10 रुपये प्रति किलो की दर से वर्मीकम्पोस्ट बेचते हैं। कृष्ण कुमार बताते हैं कि थोक में 50 किलो का पैकेट करीब 10 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचते हैं। 5 किलो का पैकेट 100 रुपये में बिकता है, जिसका बाहर बाज़ार में और ऑनलाइन दाम करीब 350 रुपये पड़ता है। 

कृष्ण कुमार कहते हैं कि उनका मकसद बड़े स्तर पर जैविक खेती को बढ़ावा देने का है। इसलिए वो कम से कम दरों में जैविक उत्पाद किसानों को देते हैं। कृष्ण ने बताया कि वर्मीकम्पोस्ट यूनिट के लिए जिन केंचुओं को 300 से 500 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जाता है, वो 100 रुपये प्रति किलो की दर से केंचुएं उपलब्ध कराते हैं। कृष्ण कुमार ने ये भी बताया कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में केंचुएं के दाम ही हज़ार रुपये प्रति किलो हैं। 

वर्मीकम्पोस्ट खाद यूनिट vermicompost unit
सस्ती दरों में उपलब्ध कराते हैं केंचुआ खाद

Eisenia Fetida केंचुए की ख़ासियत 

ऑस्ट्रेलियन ब्रीड Eisenia Fetida की नस्ल के केंचुएं उनके पास हैं। सामान्य केंचुएं जहां ज़मीन में घुसकर मिट्टी भुरभुरी करते हैं, वहीं Eisenia Fetida नस्ल का केंचुआ सिर्फ़ गोबर खाता है। इससे उच्च गुणवत्ता का वर्मीकम्पोस्ट तैयार होता है। ये केंचुआ दिखने में लाल रंग का होता है। इसलिए इसे रेड वॉर्म भी कहा जाता है। इस केंचुए की खासियत के बारे में बताते हुए कृष्ण कुमार कहते हैं कि इस नस्ल का केंचुआ शून्य से लेकर 50 डिग्री तक के तापमान में रह सकता है। ये 24 घंटे अपने काम में लगा रहता है। 

वर्मीकम्पोस्ट खाद यूनिट vermicompost unit

वर्मीकम्पोस्ट यूनिट में ही करते हैं खेती

कृष्ण अपनी इस वर्मीकम्पोस्ट यूनिट में जैविक खेती भी करते हैं। वर्मीकम्पोस्ट बेड के चारों ओर उन्होंने बांस लगा रखे हैं। ग्रीन नेट से उसे ढक रखा है। तार के जाल भी लगाए हुए हैं। इसमें वो लौकी और तोरी सहित कई तरह की बेलदार सब्जियों की खेती करते हैं। कई फलदार पौधे भी लगा रखे हैं। कृष्ण कुमार बताते हैं कि इसके कई फ़ायदे होते हैं। एक तो आपको ऑर्गेनिक सब्जियां मिल जाती है। साथ ही इससे केंचुओं का गर्मी और पाले की समस्या से बचाव होता है। साथ ही जाल लगे होने की वजह से पक्षियों से भी वर्मीकम्पोस्ट यूनिट सुरक्षित रहती है। 

वर्मीकम्पोस्ट खाद यूनिट vermicompost unit
फ़ार्म में उगाई हुई बेलदार सब्जियां

एग्रो-टूरिज़्म को दे रहे बढ़ावा

कृष्ण कुमार एग्रो-टूरिज़्म को बढ़ावा देने का भी काम कर रहे हैं। इससे उनका मकसद लोगों को गाँव की मिट्टी से जोड़ने और किसान की खून-पसीने की मेहनत से लोगों को रूबरू कराने का है। बर्ड सेंचुरी से लेकर बत्तख पालन, खरगोश पालन, मधूमक्खी पालन, ये सब कान्सेप्ट पर वो काम कर रहे हैं। 

वर्मीकम्पोस्ट व्यवसाय- कम लागत में अच्छा मुनाफ़ा

कृष्ण कुमार कहते हैं कि आने वाले समय में वर्मीकम्पोस्ट व्यवसाय में बहुत संभावनाएं हैं। अभी भी भारी मात्रा में DAP, यूरिया का इस्तेमाल हो रहा है। युवा किसानों में ज़रूर वर्मीकम्पोस्ट का इस्तेमाल बढ़ रहा है। कृष्ण कुमार का कहना है कि आने वाले दस सालों में इसका व्यवसाय ऊंचाइयों पर होगा। ये व्यवसाय ऐसा है जो नौकरी के अवसर पैदा करने का माद्दा रखता है। अभी उनके फ़ार्म में चार लोग स्थायी तौर पर काम कर रहे हैं। दिहाड़ी में भी रोज़ के 15 लोग फ़ार्म में काम करते हैं।

वर्मीकम्पोस्ट खाद यूनिट vermicompost unit

गोबर भी बन सकता है कमाई का ज़रिया 

जब कृष्ण कुमार ने वर्मीकम्पोस्ट का काम करने का फैसला किया तो कई लोगों ने उन्हें न करने की सलाह दी। ये कहकर मना किया कि इसमें तो गोबर का काम होता है। कृष्ण कुमार कहते हैं कि अगर आप इस व्यवसाय में आ रहे हैं तो आपको दिन में 10 बार गोबर में तो हाथ डालना ही होगा। आपकी इस बिज़नेस में रुचि होना बहुत ज़रूरी है। कृष्ण कुमार कहते हैं कि डेयरी फ़ार्मिंग के बजाय वो गौशाला से सीधा गोबर खरीदते हैं। गौशाला में गोबर महंगा बिकता है, लेकिन इसके बावजूद वो गौशाला को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से यहीं से गोबर खरीदते हैं। 

वर्मीकम्पोस्ट खाद यूनिट vermicompost unit

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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