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बिहार के किसानों के लिए एक ऐतिहासिक खुशख़बरी आई है। राज्य सरकार ने अपने बजट 2026 (Bihar Budget 2026) में एक बड़ा ऐलान करते हुए 73 लाख किसानों की आमदनी बढ़ाने का रास्ता साफ कर दिया है। अब प्रदेश के किसानों को केंद्र सरकार की पीएम किसान सम्मान निधि (PM Kisan Samman Nidhi) के 6000 रुपये के साथ-साथ राज्य सरकार की तरफ से अतिरिक्त 3000 रुपये मिलेंगे। यानी कुल मिलाकर हर साल 9000 रुपये सीधे उनके बैंक खाते में आएंगे।
क्या है ‘जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि’?
3 फरवरी को वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव (Finance Minister Bijendra Prasad Yadav) ने बिहार का बजट (Bihar Budget 2026) पेश करते हुए इस नई योजना का ऐलान किया। ये योजना पीएम किसान सम्मान निधि की तर्ज पर ही काम करेगी। जिन किसानों का नाम पहले से पीएम किसान की लाभार्थी सूची में है, उन्हें अलग से कोई फॉर्म भरने या दफ्तरों के चक्कर लगाने की ज़रूरत नहीं। सरकार जैसे ही योजना लागू करेगी, पैसा सीधे खाते में आने लगेगा।
पैसा भी ठीक उसी तरह तीन किस्तों में मिलेगा जैसे पीएम किसान का मिलता है। मतलब, जब केंद्र सरकार की ओर से 2000 रुपये की किस्त आएगी, उसी के साथ बिहार सरकार की 1000 रुपये की अतिरिक्त किस्त भी जुड़ जाएगी।
सिंचाई से लेकर बाढ़ नियंत्रण तक – पानी का संकट होगा दूर
किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ राज्य सरकार ने खेती की सबसे बड़ी चुनौती है पानी, इसको हल करने के लिए भी बजट में ठोस कदम उठाए हैं। ‘हर खेत तक सिंचाई का पानी’ (Har Khet Tak Sinchai Ka Pani) के वादे को पूरा करने के लिए 15,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
कोशी-मेची लिंक: गेम-चेंजर परियोजना
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana) यानि PMKSY के तहत कोशी-मेची लिंक परियोजना (Koshi-Mechi Link Project) का पहला चरण शुरू हो चुका है। ये परियोजना अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार जिलों के 2.15 लाख हेक्टेयर खेतों को सिंचाई का पानी देगी। सबसे बड़ी बात यह है कि इससे इन इलाकों में बाढ़ का ख़तरा भी कम होगा।
भूजल को रिचार्ज करने की मुहिम
जल-जीवन-हरियाली अभियान (Jal-Jeevan-Hariyali Mission) के तहत 163 योजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिससे भूगर्भ जल के रिचार्ज में सुधार आ रहा है। आहर-पईन और तालाबों की मेढ़ पर वृक्षारोपण से हरित क्षेत्र बढ़ रहा है, जो जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन दोनों के लिए फायदेमंद है।
नलकूप और नहरों का जाल
मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना (Mukhyamantri Niji Tubewell Yojana ) के तहत अब तक 35 हज़ार नलकूप लगाए जा चुके हैं, जिससे 1.75 लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई हो रही है। साथ ही जल संसाधन विभाग ने 604 योजनाएं पूरी कर 1.18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई बहाल की है।
गंगा-सोन जल योजना: शहरों तक पहुंचेगा स्वच्छ पानी
बांका और मुंगेर में गंगा के अधिशेष जल को बदुआ और खड़गपुर जलाशयों तक पहुंचाने की योजना पर काम चल रहा है। गंगा जल आपूर्ति योजना के दूसरे चरण में नवादा और बिहारशरीफ को गंगा जल देने के लिए मधुबन जलाशय बनाया जा रहा है। वहीं सोन नदी से औरंगाबाद, डिहरी और सासाराम को पेयजल मुहैया कराया जाएगा।
वर्ल्ड बैंक की मदद से मॉर्डनाइजेशन
बिहार के जल प्रबंधन को आधुनिक बनाने के लिए विश्व बैंक ने 4,415 करोड़ रुपये की ‘बिहार जल सुरक्षा एवं सिंचाई आधुनिकीकरण परियोजना’ को मंजूरी दी है। इससे राज्य का पूरा नहर तंत्र डिजिटल और आधुनिक होगा।
बाढ़ से सुरक्षा का कवच
मानसून 2026 से पहले नदियों के किनारे बसे गांवों को सुरक्षा देने के लिए 447 करोड़ रुपये की 216 कटाव निरोधक योजनाएं तैयार की गई हैं। सरकार का टारगेट मार्च 2029 तक इन सभी बड़ी परियोजनाओं को पूरा कर बिहार को ‘Water surplus’ राज्य बनाना है।
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