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क्या है योजना का मकसद?
बिहार में नदियों, तालाबों और अन्य जलाशयों के किनारे रहने वाले लाखों परिवार मछली पकड़ने के काम पर निर्भर हैं। अक्सर पुराने और टूटे-फूटे उपकरणों के कारण उनकी आमदनी कम हो जाती है और काम करना मुश्किल हो जाता है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य इन मछुआरों को आधुनिक और मज़बूत मछली पकड़ने के उपकरण मुहैया कराकर उनकी उत्पादकता और आमदनी बढ़ाना है। साथ ही, इससे राज्य में मत्स्य उत्पादन (Fish production) भी बढ़ेगा।
किसे मिलेगा लाभ?
योजना का लाभ मुख्य रूप से निम्नलिखित लोगों को मिलेगा:
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पारंपरिक मछुआरे जो मछली पकड़ने का काम करते हैं।
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राज्य मत्स्यजीवी सहयोग समिति के रजिस्टर्ड मेंबर।
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महिला मछुआरे।
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अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मछुआरे।
क्या मिलेगा और कितनी मिलेगी मदद?
योजना के तहत तीन तरह के पैकेज दिए जाएंगे, जिनमें से एक व्यक्ति या परिवार को केवल एक ही पैकेज का फायदा मिल सकेगा। हर पैकेज की एक इकाई लागत तय की गई है और उस पर 90 फीसदी अनुदान दिया जाएगा। यानी आपको केवल 10 फीसदी राशि ही खर्च करनी होगी।
कैसे करें आवेदन? (ज़रूरी तारीख़ और दस्तावेज़)
इस योजना के लिए 31 दिसंबर तक अप्लाई कर सकते हैं। आवेदन का प्रोसेस पूरी तरह से ऑनलाइन है। आवेदकों को ऑफिशियल वेबसाइट https://fisheries.bihar.gov.in पर जाकर आवेदन फॉर्म भरना होगा।
आवेदन करते समय निम्नलिखित जानकारियां और दस्तावेज तैयार रखना जरूरी है:
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आधार कार्ड नंबर
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बैंक खाता संख्या, आईएफएससी कोड और शाखा का नाम
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मोबाइल नंबर (जो आधार से लिंक हो)
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यह प्रमाण कि आप मत्स्य शिकार (मछली पकड़ने) का काम करते हैं।
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स्वहस्ताक्षरित घोषणा पत्र (अगर प्रशिक्षित मछुआरे हैं)।
एप्लिकेशन जमा करने के बाद, उप मत्स्य निदेशक की अध्यक्षता में गठित एक समिति लाभार्थियों का चयन करेगी।
योजना का व्यापक प्रभाव
यह योजना केवल नाव और जाल बांटने तक सीमित नहीं है। इसके व्यापक सामाजिक और आर्थिक प्रभाव होंगे-
1.गरीबी कम करने में मदद: मछुआरों की आय स्थिर और बढ़ेगी, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार होगा।
2.रोज़गार बढ़ेगा: मत्स्य क्षेत्र मजबूत होगा तो इससे जुड़े अन्य रोजगार, जैसे मछली की ढुलाई, बिक्री, प्रोसेसिंग भी बढ़ेंगे।
3.महिला सशक्तिकरण: महिला मछुआरों को विशेष रूप से शामिल करने से उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी।
4.कौशल विकास: नई तकनीक के उपकरण मिलने से मछुआरों के कौशल का भी विकास होगा।
बिहार सरकार की यह ‘नाव एवं जाल पैकेज योजना’ (‘Boat and Net Package Distribution Scheme’) मछुआरा समुदाय के लिए एक वरदान साबित हो सकती है। ये न सिर्फ उनकी रोजी-रोटी का साधन बेहतर बनाएगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त भी बनाएगी। अगर आप या आपका कोई जानकार इस योजना के पात्र हैं, तो 31 दिसंबर की अंतिम तिथि से पहले ऑनलाइन अप्लाई ज़रूर करें।
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