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कोरोना-लहर की वजह से किसान सम्मान निधि की नयी किस्त जारी होने में देरी

33 लाख अयोग्य किसानों से 2500 करोड़ रुपये वसूलने का काम भी हुआ प्रभावित

सरकारी गलियारों में उम्मीद जतायी जा रही थी कि किसानों को किसान सम्मान निधि की 8वीं किस्त 20 अप्रैल के आसपास भेज दी जाएगी, लेकिन सत्यापन का काम पूरा नहीं हो पाने की वजह से इसमें देरी हो रही है। किसान सम्मान निधि से जुड़े नियमों के मुताबिक, 2,000 रुपये की किस्त को भेजने के लिए 1 अप्रैल से 31 जुलाई के बीच का वक़्त तय है।

कोरोना की मौजूदा लहर के दिनों-दिन भयावह हो रहे स्वरूप की वजह से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan Scheme) के लाभार्थियों के सत्यापन (वैरिफिकेशन) का काम भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। यही वजह है कि इस योजना के तहत हर चौथे महीने लाभार्थियों के बैंक खातों में 2-2 हज़ार रुपये भेजने का काम बाधित हुआ है।

सरकारी गलियारों में उम्मीद जतायी जा रही थी कि किसानों को किसान सम्मान निधि की 8वीं किस्त 20 अप्रैल के आसपास भेज दी जाएगी, लेकिन सत्यापन का काम पूरा नहीं हो पाने की वजह से इसमें देरी हो रही है। किसान सम्मान निधि से जुड़े नियमों के मुताबिक, 2,000 रुपये की किस्त को भेजने के लिए 1 अप्रैल से 31 जुलाई के बीच का वक़्त तय है।

सरकार को 2500 करोड़ रुपये की चपत

दरअसल, फरवरी में सरकार को पता चला कि किसान सम्मान निधि के क्रियान्वयन में उसे करीब 2500 करोड़ रुपये की चपत लग चुकी है, क्योंकि सालाना 6,000 रुपये का लाभ उन 33 लाख लोगों को भी दे दिया जो इसके लिए अयोग्य थे। इसके बाद केन्द्र सरकार ने राज्यों सरकारों को हरेक लाभार्थी की योग्यता का सत्यापन करने और अयोग्य पाये जाने वालों किसान सम्मान निधि योजना की रकम की वसूली करने का आदेश दिया था। यही काम अभी तक पूरा नहीं हुआ और इसी वजह से नयी किस्म जारी होने में देरी हो रही है।

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छोटी जोत वाले किसानों की मदद

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत तीन साल पहले हुई। इसका उद्देश्य 2 हेक्टेयर या 5 एकड़ से कम जोत वाले छोटे और सीमान्त किसानों की मदद करना है। लेकिन किसान सम्मान निधि का लाभ अयोग्य किसान भी उठा रहे थे। ऐसे ही अयोग्य लाभार्थियों का पता लगाकर योजना के तहत उन्हें मिली रक़म की वसूली की जानी है।

किसान सम्मान निधि के अयोग्य लाभार्थी पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र सहित 18 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के निवासी हैं। मीडिया रिपोटर्स की मानें तो कर्नाटक में 2.04 लाख, गुजरात में 7 हज़ार, हरियाणा में 35 हज़ार, तमिलनाडु में 6.96 लाख, पंजाब में 4.70 लाख, उत्तर प्रदेश में 1.78 लाख और राजस्थान में 1.32 लाख फ़र्ज़ी लाभार्थियों का पता लगाया गया था। जानकारों के अनुसार, अपात्र किसानों से वसूली की प्रक्रिया पूरी होने के बाद करीब 9.5 करोड़ किसानों को अगली किस्त के तरह 19,000 करोड़ रुपये जारी किये जाएँगे।

कौन हैं अयोग्य?

सांसद, विधायक, मेयर, ज़िला पंचायत अध्यक्ष जैसे संवैधानिक पदों पर आसीन लोग, 10,000 रुपये से अधिक पेंशन पाने वाले, केन्द या राज्य सरकार के कर्मचारी, डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर एकाउंटेंट, वकील, आर्किटेक्ट जैसे पेशेवर और आयकर चुकाने वाले लोग भले ही वो किसान भी हों।

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सुपात्र किसान कैसे देखें अपना ब्यौरा?

  1. सबसे पहले https://pmkisan.gov.in पोर्टल पर लॉग-इन करें या गूगल प्ले स्टोर से पीएम किसान मोबाइल एप डाउनलोड करें
  2. इसके होमपेज पर Farmers Corner सेक्शन के भीतर Beneficiaries List के ऑप्शन पर क्लिक करें
  3. यहाँ ड्रॉप डाउन लिस्ट से अपने राज्य, ज़िला, तहसील, ब्लॉक और गाँव का नाम सेलेक्ट करें और फिर Get Report पर क्लिक करें
  4. अब स्क्रीन पर दिखने वाले अपने गाँव के लाभार्थियों में अपना ब्यौरा देखें
  5. यदि आपका आधार या मोबाइल नम्बर गलत दर्ज़ हुआ है या ठीक से अपलोड नहीं हुआ तो इसकी जानकारी भी आपको इसी पोर्टल पर मिल जाएगी। इन नम्बरों की बदौलत आप अपने आवेदन की स्थिति और लाभार्थियों की सूची भी देख सकते हैं।

कैसे करवाएँ रजिस्ट्रेशन?

  1. वेबसाइट https://pmkisan.gov.in के Farmers Corner पर जाएँ और ‘New Farmer Registration’ पर क्लिक करें।
  2. आधार नम्बर और कैप्चा कोड डालकर प्रोसेस को आगे बढ़ाएँ और अपना निजी ब्यौरा, बैंक खाते का ब्यौरा और खेत से जुड़ी जानकारियाँ भरकर फॉर्म सबमिट कर दें।
  3. आपके ब्यौरे का सत्यापन हो जाने के बाद आपको SMS से लाभार्थी बनाये जाने की सूचना भेजी जाएगी।
Kisan of India Instagram
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।
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