Green Revolution 2.0: Drone Technology से चेंज हो रही भारतीय खेती की तस्वीर, AI और एनालिटिक्स से बदलाव शुरू

ड्रोन (Drone Technology) अब सिर्फ हवा में उड़ने वाला कैमरा नहीं रह गया है। वे उड़ते हुई प्रयोगशालाएं हैं, जो AI and Analytics से लैस हैं। इनमें लगे Multispectral, hyperspectral and thermal sensors इंसानी आंखों से न दिखने वाली चीजों को भी पकड़ लेते हैं। पौधे के तनाव का पता, बीमारी का संकेत, या पानी की कमी-ये सेंसर फसल की 'अनकही बात' समझ लेते हैं।

Green Revolution 2.0: Drone Technology से चेंज हो रही भारतीय खेती की तस्वीर, AI और एनालिटिक्स से बदलाव शुरू

जरा सोचिए, एक किसान सुबह उठता है और मोबाइल फोन खोलते ही पूरे खेत की ‘Health Report’ देख लेता है। कहां पानी की कमी है, कहां कीड़े लगने वाले हैं, कौन-सा हिस्सा कमजोर है-सब कुछ उसकी आंखों के सामने, रंगीन मैप और आंकड़ों के रूप में। ये कोई साइंस फैटेंसी नहीं, बल्कि आज के Drone Technology की वजह से भारतीय खेती में हो रही एक बड़ी क्रांति (Green revolution 2.0) की झलक है।

स्मार्ट खेती का नया साथी: ड्रोन

ड्रोन अब सिर्फ हवा में उड़ने वाला कैमरा नहीं रह गया है। वे उड़ते हुई प्रयोगशालाएं हैं, जो AI और एनालिटिक्स से लैस हैं। इनमें लगे Multispectral, hyperspectral and thermal sensors इंसानी आंखों से न दिखने वाली चीजों को भी पकड़ लेते हैं। पौधे के तनाव का पता, बीमारी का संकेत, या पानी की कमी-ये सेंसर फसल की ‘अनकही बात’ समझ लेते हैं।

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डेटा का ख़जाना: आसमान से मिल रहा है ज़मीनी हल

पहले किसान अपने अनुभव और आंख के भरोसे फैसले लेते थे। आज ड्रोन मिनटों में बड़े-बड़े खेतों का नक्शा बना देते हैं और हर पौधे की सेहत की जानकारी देते हैं। लेकिन यहां सबसे बड़ा जादू होता है Cloud Analytics का, जैसे ‘Flight Cloud’। ड्रोन से मिला कच्चा डेटा जब इस क्लाउड पर जाता है, तो AI उसे प्रोसेस करके सीधे-सीधे एक्शन बिंदु बताता है। जैसे:

1.सिंचाई: पूरे खेत में एक जैसा पानी देने की बजाय, अब सिर्फ उन्हीं जगहों पर पानी देना जहाँ जरूरत है।

2.खाद: कहां और कितनी खाद डालनी है, यह ड्रोन के डेटा से पता चल जाता है। इससे लागत कम होती है और पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है।

3.कीट नियंत्रण: बीमारी या कीड़ों का पता शुरुआत में ही लग जाने से, सटीक जगह पर दवा का छिड़काव किया जा सकता है।

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ड्रोन की ताकत 

ड्रोन (drone) ने ground-based sensors और सैटेलाइट के बीच की खाई को पाट दिया है। Satellite Image में कई बार रिजोल्यूशन कम होता है और मौसम का असर पड़ता है। वहीं जमीन पर सेंसर लगाना बड़े इलाके में महंगा और मुश्किल है। ड्रोन इन दोनों के बीच का परफेक्ट ब्रिज है। यह सेंटीमीटर-लेवल की सटीकता देता है, इसे कभी भी उड़ाया जा सकता है और यह बड़े इलाके के लिए भी किफायती है।

फसल के हर महत्वपूर्ण चरण जैसे बुवाई, बढ़वार, फलन पर ड्रोन से सर्वे करवाकर किसान फसल के पैटर्न और मिट्टी की स्थिति पर लगातार नजर रख सकता है। ये वो सटीकता है, जो पहले सिर्फ रिसर्च लैब में ही संभव थी।

खेती का भविष्य आसमान से देख रहा है

ड्रोन टेक्नोलॉजी सिर्फ उपज बढ़ाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह टिकाऊ खेती (Sustainable Farming) की नींव रख रही है। संसाधनों का अनावश्यक दोहन रुकेगा, मिट्टी और पानी की सेहत सुधरेगी और किसान की आमदनी बढ़ेगी। यह टेक्नोलॉजी भारतीय किसान को ‘अनुमान’ से निकालकर ‘डेटा-आधारित फैसले’ तक ले जा रही है। आने वाला समय ऐसे ही स्मार्ट किसानों का होगा, जिनकी सबसे बड़ी ताकत उनके हाथ का हुनर और आसमान से मिल रही इन सटीक जानकारियों का मेल होगा। ये क्रांति अब शुरू हो चुकी है और इसकी उड़ान बहुत ऊंची है।

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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