मिलावट के खिलाफ जंग: FSSAI के ‘Food Safety on Wheels’ से हर गांव-गली में होगी डेयरी प्रोडक्ट्स की जांच

FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) पहल है 'Food Safety on Wheels' । ये कोई आम सरकारी गाड़ी नहीं, बल्कि चलती-फिरती हाईटेक लैब है, जो 24 घंटे आपके आसपास के इलाकों में घूमकर लोगों को शुद्ध दूध-घी का अधिकार दिला रही है।

मिलावट के खिलाफ जंग: FSSAI के 'Food Safety on Wheels' से हर गांव-गली में होगी डेयरी प्रोडक्ट्स की जांच

क्या आपको भी ये डर सताता है कि रोज़ पिया जाने वाला दूध असली है या उसमें मिलावट है (Is the milk genuine or adulterated)?  या फिर घर में रखा घी शुद्ध है या उसमें डाला गया है कोई केमिकल? अब इन सवालों के जवाब के लिए न तो किसी महंगी प्रयोगशाला (expensive laboratory) के चक्कर काटने होंगे और न ही शहर जाने की ज़रूरत। अगर आप दूर-दराज के गांव में रहते हैं, तो भी आपके घर के दरवाजे पर ही Dairy Products  की जांच हो सकेगी।

ये मुमकिन हुआ है FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) की अनोखी पहल ‘Food Safety on Wheels’ से। ये कोई आम सरकारी गाड़ी नहीं, बल्कि चलती-फिरती हाईटेक लैब है, जो 24 घंटे आपके आसपास के इलाकों में घूमकर लोगों को शुद्ध दूध-घी का अधिकार दिला रही है।

चलती-फिरती लैब 

केंद्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के आंकड़ों पर नजर डालें तो ये मुहिम बड़े स्तर पर चल रही है। देश के 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस वक्त 285 मोबाइल यूनिटें सक्रिय हैं। ये यूनिटें महीने या हफ्ते में एक बार नहीं, बल्कि लगातार गांवों का दौरा कर रही हैं।

ख़ास बात ये है कि इन गाड़ियों में लगी ‘Milk-O-Screen’ नामक तकनीक दूध में होने वाली कई आम मिलावटों का पल भर में पता लगा लेती है। चाहे दूध में पानी की मात्रा हो, यूरिया, डिटर्जेंट या फिर स्टार्च, यह मोबाइल लैब सेकंडों में सच उगल देती है। ये केवल दूध तक सीमित नहीं है, बल्कि दही, घी, पनीर और छेना जैसे तमाम डेयरी प्रोडक्ट्स की प्योरिटी की जांच भी इन वैन में की जा सकती है।

FBO पर शिकंजा: अब हर उत्पाद की होगी ट्रेसेबिलिटी

सिर्फ जांच भर से काम नहीं चलेगा। असली असर तब होगा जब मिलावट करने वालों पर नकेल कसी जाएगी। इसी दिशा में FSSAI ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत सख्त नियम बनाए हैं। इसके मुताबिक, कच्चा माल ख़रीदने से लेकर आप तक प्रोडक्ट पहुंचाने वाले हर खाद्य व्यवसाय संचालक (FBO) को फूड प्रोडक्ट की ट्रेसेबिलिटी सुनिश्चित करनी होगी।

मतलब ये कि दूध की एक बोतल पर अगर कोई शिकायत आती है, तो कंपनी को ये बताना होगा कि दूध किस गाय/भैंस का है, किस गांव से आया, किस टैंकर में आया और उसे प्रोसेस किसने किया। पारदर्शिता के लिए सप्लाई चेन का पूरा रिकॉर्ड रखना कंपल्सरी कर दिया गया है। अगर टेस्टिंग के दौरान ये दस्तावेज नहीं मिले, तो संचालक के खिलाफ सख्त नियामक कार्रवाई की जाएगी।

कैसे बनते हैं मानक, कहां से आते हैं सुझाव?

FSSAI कोई मनमाना कानून नहीं बनाता। दूध और दुग्ध उत्पादों के मानक ‘खाद्य सुरक्षा एवं मानक (Food Product Standards and Food Additives) विनियम, 2011’ में तय किए गए हैं। सबसे अहम बात ये है कि नए मानक बनाते या पुराने में बदलाव करते समय FSSAI पहले एक ड्राफ्ट अधिसूचना जारी करता है।

इस दौरान आम जनता से लेकर डेयरी सहकारी समितियों और बड़े व्यवसायियों तक, सभी हितधारकों से सुझाव मांगे जाते हैं। इन्हीं सुझावों की रिव्यू के बाद Final Standard तय होते हैं। यानी, आपके किचन में पहुंचने वाले दूध-घी की गुणवत्ता का फैसला सिर्फ सरकार नहीं, बल्कि आप जैसे लोगों की राय भी तय करती है।

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सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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