अब CRISPR तकनीक से बनेंगी Genetically Modified फ़सलें, सरसों की नई किस्म मंज़ूरी की राह पर

सरसों की एक नई किस्म (Genetically modified Mustard) जल्द ही किसानों के खेतों में दिखेगी, जो CRISPR नाम की अत्याधुनिक तकनीक से बनी है। पर सवाल यह है कि ये जीन-एडिटेड फसलें (Gene-edited crops) आखिर हैं क्या?

अब CRISPR तकनीक से बनेंगी Genetically Modified फ़सलें, सरसों की नई किस्म मंज़ूरी की राह पर

आपने अक्सर ख़बरों में सुना होगा कि भारत अब जीन-एडिटेड फसलों (Gene-edited crops) को मंजूरी दे रहा है। सरसों की एक नई किस्म (Genetically modified Mustard) जल्द ही किसानों के खेतों में दिखेगी, जो CRISPR नाम की अत्याधुनिक तकनीक से बनी है। पर सवाल यह है कि ये जीन-एडिटेड फसलें (Gene-edited crops) आखिर हैं क्या? क्या ये पारंपरिक जीएम (Genetically modified) फसलों जैसी हैं? और भारत के लिए यह कदम क्यों अहम है? आइए, आसान भाषा में समझते हैं।

क्या है जीन एडिटिंग ?

सोचिए, किसी पौधे के डीएनए (Genetic code) को एक किताब की तरह मान लें, जिसमें हर जीन एक Sentence है। पारंपरिक जीएम तकनीक में, दूसरी प्रजाति (जैसे बैक्टीरिया) का एक जीन इस किताब में डाल दिया जाता था। इससे विवाद पैदा हुआ क्योंकि इसमें बाहरी DNA शामिल होता था। वहीं, जीन एडिटिंग (CRISPR-Cas9 तकनीक) एक Microsurgery and precision surgery  की तरह है। इसमें पौधे की अपनी ही Genetic book के किसी ख़ास वाक्य (जीन) में बिना कोई बाहरी जीन डाले, सुधार किया जाता है। ये ठीक वैसा है जैसे किसी Word Processor में ‘Find and Replace’ का ऑप्शन इस्तेमाल करना।

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भारत का नया रास्ता

भारत सरकार अब पारंपरिक जीएम फसलों (Like BT cotton) के लंबे विवाद से अलग हटकर Gene-editing technology को तेजी से अपना रही है। कारण साफ है-

1.कोई बाहरी जीन नहीं: चूंकि इसमें दूसरे जीव का डीएनए नहीं डाला जाता, इसलिए यह तकनीक अधिक प्राकृतिक और सुरक्षित मानी जा रही है।

2.तेज और सटीक: नई किस्में बनाने में समय कम लगता है।

3.जलवायु परिवर्तन से लड़ाई: सूखा, लवणता और बीमारियों को सहने वाली फसलें जल्द विकसित की जा सकती हैं।

पहले से चल रहा है मिशन

भारत इस दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की संस्थाएं 40 से अधिक फसलों पर रिसर्च कर रही हैं, जिनमें दालें, टमाटर, केला शामिल हैं। पहली सफलताएं मिल चुकी हैं-1.पुसा राइस DST1: इसमें वो जीन Lock किया गया जो पौधे को तनावग्रस्त बनाता था। नतीजा, सूखा सहनशीलता बढ़ी।

2.DRR धान 100: साम्बा महसूरी किस्म में OsCKX2 नामक जीन में बदलाव कर 19 फीसदी अधिक उपज हासिल की गई।

3.सरसों की ‘वरुणा’ किस्म: इसमें ग्लुकोसिनोलेट नामक तत्व कम किया गया ताकि तेल का स्वाद बेहतर हो और पौधा मजबूत रहे।

किसान और उपभोक्ता दोनों को फ़ायदा

इस तकनीक का सीधा फायदा किसानों को मिलेगा। उन्हें अधिक पैदावार, कम बीमारियां और जलवायु के झटके सहने वाली फसलें मिलेंगी। उपभोक्ताओं को अधिक पौष्टिक और बेहतर गुणवत्ता वाला भोजन मिलेगा। देश के लिए ये Food security and agricultural exports  बढ़ाने का बड़ा हथियार साबित हो सकता है।

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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