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दशकों से गांवों से शहरों की ओर किसानों का पलायन भारत की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। हर साल लाखों युवा बेहतर रोज़गार की तलाश में अपने घर, ज़मीन छोड़कर शहरों का रुख़ करते आ रहे हैं। ये ट्रेंड गांवों को खोखला करता जा रहा है और शहरों पर काफी ज़्यादा दबाव बढ़ता जा रहा है। लेकिन क्या ये सिलसिला बदला जा सकता है? इसका जवाब है ‘हां’, और इसका रास्ता गांवों में ही उगने वाली फसलों और वनस्पति से निकलने वाली बायोएनर्जी (Bioenergy) या Biofuels से होकर गुज़रता है।
गांव छोड़ने की मजबूरी और युवा किसान
पलायन का सबसे मेन वजह ग्रामीण इलाकों में आमदनी के लिए साधनों का अभाव है। सिर्फ कृषि पर उनकी निर्भरता और कम रोज़गार के कारण युवा शहरों की ओर रूख़ करते आ रहे हैं। बायोफ्यूल सेक्टर इस परेशानी का एक समाधान लेकर आता है। ये गांवों में ही एक नई तरह की ‘Green economy’ खड़ी कर सकता है। बायोफ्यूल प्लांट (Biofuel plant) लगाने, कच्चे माल की सप्लाई करने, प्रोडक्शन से जुड़े कामों के लिए गांवों में ही नए रोज़गार पैदा होंगे। इससे युवाओं को शहर जाने की मजबूरी नहीं रहेगी।
शहरों को मिलेगी राहत, पर्यावरण को फायदा
अनियंत्रित पलायन (Uncontrolled migration) से शहरों का इन्फ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) चरमरा रहा है। प्रदूषण, ट्रैफिक और स्लम की समस्या गंभीर होती जा रही है। Bioenergy इस दिशा में भी राहत देती है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Union Minister Nitin Gadkari) ने साफ कहा है कि 100 फीसदी बायो इथेनॉल (Bioethanol) ही फ्यूचर है।
Biofuel से पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम होगी, जिससे प्रदूषण घटेगा और शहरों पर पापुलेशन का दबाव भी कम होगा। सरकार का टारगेट 22 लाख करोड़ रुपये के Fossil fuels के आयात (Import) को कम करने का है।
उड़ चुका है बायोफ्यूल एयरोप्लेन
भारत बायोफ्यूल के क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। 2018 में देहरादून से दिल्ली तक बायोफ्यूल से हवाई जहाज़ उड़ान भरकर इतिहास रचा जा चुका है। अब मैंगलोर रिफाइनरी (MRPL) ने 450-500 करोड़ रुपये की लागत से एक बड़ा बायोफ्यूल प्लांट लगाने का काम शुरू कर दिया है, जो 2027 तक तैयार होगा। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी ऑटो कंपनियों से क्लीन फ्यूल की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ाने और R&D में निवेश बढ़ाने की अपील की है।
Bioenergy: भारत के बैलेंस डेवलपमेंट की चाभी
Bioenergy सिर्फ ऊर्जा का ऑप्शन नहीं, बल्कि भारत के बैलेंस डेवलपमेंट की चाभी है। ये गांवों में रोज़गार और आमदनी का सोर्स बनकर पलायन रोकेगी, शहरों को पल्यूशन फ्री करेगी। जैसे-जैसे बायोफ्यूल का प्रोडक्शन बढ़ेगा, गांवों की तस्वीर बदलेगी।
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