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वैश्विक खाद्य सुरक्षा मानकों के सबसे प्रभावशाली मंच 48वें कोडेक्स एलिमेंटेरियस कमीशन में भारत ने एक बार फिर अपनी मज़बूत और निर्णायक उपस्थिति दर्ज कराई है। इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सत्र में भारत को एशिया क्षेत्र की ओर से कार्यकारी समिति (CCEXEC) के लिए सर्वसम्मति से चुना गया, जो भारत की बढ़ती वैश्विक साख और क्षमता का स्पष्ट संकेत है। अब भारत CAC50 (2027) तक एशिया की तकनीकी और व्यापारिक प्राथमिकताओं का नेतृत्व करेगा। यह पुनर्निर्वाचन बताता है कि एशियाई देश भारत को 48वें कोडेक्स एलिमेंटेरियस कमीशन में एक भरोसेमंद प्रतिनिधि और वैश्विक खाद्य मानकों का मज़बूत संरक्षक मानते हैं।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल की मज़बूत भागीदारी
48वें कोडेक्स एलिमेंटेरियस कमीशन में भारत के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजित पुनहानी ने किया। उनके साथ भारत के कई केंद्रीय मंत्रालयों और प्रमुख संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे, जिनमें शामिल हैं—
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
- वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
- मसाला बोर्ड
- MPEDA
- ICMR-NIN
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)
- फिक्की (FICCI)
यह टीम समन्वित रूप से भारत के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय हितों की रक्षा करते हुए वैश्विक मानकों के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देती रही।
क्यों महत्वपूर्ण है 48वें कोडेक्स एलिमेंटेरियस कमीशन में भारत की भूमिका?
कोडेक्स दुनिया में खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को तय करने वाला सबसे बड़ा मंच है। ऐसे में 48वें कोडेक्स एलिमेंटेरियस कमीशन में भारत का पुनर्निर्वाचन कई दृष्टि से महत्वपूर्ण है—
1. एशिया के खाद्य हितों की मज़बूत आवाज़
भारत अब पूरे एशिया क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा जरूरतों, कृषि पैटर्न और व्यापारिक प्राथमिकताओं को वैश्विक स्तर पर मज़बूती से रख सकेगा।
2. भविष्य के वैश्विक खाद्य मानकों में भारत की निर्णायक भूमिका
अब भारत तकनीकी चर्चाओं में एक नेतृत्वकारी भूमिका निभाएगा, जिससे भविष्य के खाद्य मानकों में एशिया की ज़रूरतें बेहतर तरीके से शामिल होंगी।
3. निर्यातकों को मिलेगा बड़ा लाभ
जब मानक बनाने वाली चर्चा में भारत सक्रिय रहता है, तो यह भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाता है।
48वें कोडेक्स एलिमेंटेरियस कमीशन में भारत का सक्रिय योगदान
सत्र के दौरान भारत ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्ट और प्रभावी योगदान दिया।
- भारत ने खाद्य योजकों, कीटनाशक अवशेषों, पशु दवाओं, विश्लेषण विधियों और खाद्य संदूषकों से संबंधित डेटा सिस्टम को अद्यतन करने पर जोर दिया।
- AI आधारित ट्रांसलेशन और डेटा प्रबंधन प्रणाली के उपयोग का समर्थन किया ताकि कोडेक्स की कार्यप्रणाली अधिक तेज़ और पारदर्शी बने।
- भारत ने क्षेत्रीय डेटा को मानकों में शामिल करने पर जोर दिया, ताकि एशियाई संदर्भ को बेहतर प्रतिनिधित्व मिल सके।
48वें कोडेक्स एलिमेंटेरियस कमीशन के दौरान भारत की इस सक्रिय भूमिका ने देश को एक तकनीकी नेता के रूप में स्थापित किया।
मानकों के विकास में भारत के महत्वपूर्ण योगदान
48वें कोडेक्स एलिमेंटेरियस कमीशन में भारत ने कई वैश्विक मानकों को आगे बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाई—
• ताज़े खजूर के लिए मानक को स्टेप-8 में अपनाया गया
यह व्यापार प्रथाओं के सामंजस्य और गुणवत्ता में सुधार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
• ताज़े करी पत्तों के लिए वैश्विक मानक आगे बढ़ा
यह मसालों और ताजे उत्पादों के वैश्विक व्यापार में बड़ा कदम है।
• कीटनाशकों से जुड़ी संदर्भ सामग्रियों के लिए दिशानिर्देश अपनाए गए
यह लैब क्षमता और MRLs निर्धारण की विश्वसनीयता बढ़ाएगा।
• काजू गिरी के लिए वैश्विक मानक आगे बढ़ाने में भारत सफल रहा
यह भारत जैसे निर्यातक देशों के लिए बड़ी उपलब्धि है।
• ऊँट के दूध के लिए नए कमोडिटी स्टैंडर्ड का समर्थन
यह नया बाजार और शोध का अवसर खोलेगा।
CCEXEC में भारत की भविष्य की भूमिका
अब भारत 48वें कोडेक्स एलिमेंटेरियस कमीशन के निर्णयों के आधार पर एशिया क्षेत्र के लिए—
- खाद्य सुरक्षा
- गुणवत्ता
- फेयर ट्रेड
- और वैश्विक मानकों की पारदर्शिता
के मामलों में एक मज़बूत नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभाएगा।
भारत की प्रतिबद्धता: सुरक्षित भोजन और निष्पक्ष व्यापार
सत्र के अंत में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट कहा कि भारत बहुपक्षीय मंचों पर—
- खाद्य सुरक्षा
- गुणवत्ता सुधार
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण
- और फेयर व्यापार
को और अधिक मज़बूत करने की दिशा में कार्य करता रहेगा।
48वें कोडेक्स एलिमेंटेरियस कमीशन में भारत की सफलता न केवल खाद्य मानकीकरण में देश की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि वैश्विक मंच अब भारत की तकनीकी क्षमता और नेतृत्व को और अधिक महत्व दे रहे हैं।
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