खेत-खलिहानों में Digital Revolution की हलचल अब दिखने लगी है। यही हलचल ‘विकसित भारत’ की सबसे मजबूत नींव साबित होगी। ये बात NITI Aayog के सदस्य प्रो. रमेश चंद ने Industry Conferences में कही। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि Technology-based smart agriculture ही भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की चाभी है।
क्या है स्मार्ट एग्रीकल्चर का ख़ाका?
प्रो. चंद के मुताबिक, भारत का कृषि तकनीकी परिदृश्य (Agri-Tech Landscape) तेजी से बदल रहा है। इसमें सिर्फ Genetic Modification (GM) या Precision Farming ही नहीं, बल्कि डेटा साइंस और आईसीटी (Information and Communication Technology) आधारित सलाहकार प्रणालियां भी शामिल हैं। इस बदलाव के साथ कदम मिलाने के लिए आज के किसान के पास Capital, knowledge and the right partnerships की उपलब्धता ज़रूरी है।
हर New technology solutions और challenges दोनों लेकर आती है। प्रो. चंद ने चेतावनी देते हुए कहा, “हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि Innovation, sustainability and environmental balance का भी सम्मान करे। उन्होंने बताया कि भारत अब सिर्फ फूड सेफ्टी हासिल करने वाला देश नहीं रह गया है, बल्कि अब वह मूल्य संवर्धन (Value Addition) और जलवायु-अनुकूल कृषि (Climate-Smart Agriculture) की ओर बढ़ रहा है।
ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल रही है
नीति आयोग (NITI Aayog) के मेंबर ने एक महत्वपूर्ण आंकड़े शेयर किए , देश की 46 फीसदी आबादी को रोजगार देने वाला कृषि क्षेत्र, ‘विकसित भारत मिशन’ का सबसे बड़ा Contributor बन रहा है। इस विकास की गूंज अब छोटे शहरों और टियर-2 क्षेत्रों जैसे असम और मध्य प्रदेश में साफ सुनाई दे रही है। ये दिखाता है कि कृषि विकास अब सिर्फ पारंपरिक कृषि प्रदेशों तक सीमित नहीं है।
Sustainable Agriculture पर जोर
कृषि आयुक्त प्रवीण कुमार सिंह ने इस मौके पर कहा कि फोकस कृषि को उत्पादक और टिकाऊ (Sustainable) दोनों बनाने पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि upag.gov.in जैसे प्लेटफॉर्म, जो कृषि आंकड़ों, फसल बीमा, उपज और किसान क्रेडिट कार्ड के डेटा को एक साथ जोड़ रहे हैं, का इस्तेमाल Informed decisions लेने के लिए किया जाना चाहिए।
उन्होंने ‘कचरे से धन’ (Waste-to-Wealth) की पहलों को भी हाइलाइट किया, जैसे फसल अवशेषों को कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) में बदलना। कुसुम (KUSUM) जैसी योजनाओं के जरिए energy efficiency को फसल उत्पादन से जोड़ा जा रहा है।
जलवायु परिवर्तन और कृषि की चुनौती
यूपीएल लिमिटेड के सागर कौशिक ने वैश्विक संदर्भ में कहा कि COP30 और संयुक्त राष्ट्र के जलवायु एजेंडे जैसे ग्लोबल कोशिश हमें याद दिलाते हैं कि कृषि जलवायु समस्या का कारण नहीं, बल्कि समाधान का हिस्सा बननी चाहिए।
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