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असम के कार्बी आंगलोंग क्षेत्र में कृषि विकास और किसानों की आजीविका को सशक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की गई है। कार्बी आंगलोंग ऑटोनॉमस काउंसिल (KAAC) और कृषि क्षेत्र की विशेषज्ञ कंपनी एर्डे एग्रो इकोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
इस समझौते के तहत एक संयुक्त उपक्रम कंपनी “हिल एग्रो डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HADCL)” का गठन किया गया है, जो क्षेत्र के किसानों के आर्थिक विकास, कृषि मूल्य श्रृंखला (Value Chain) को मजबूत करने और स्थायी कृषि मॉडल को बढ़ावा देने की दिशा में काम करेगी। ये साझेदारी Public-Private Partnership (PPP) मॉडल पर आधारित है, जिसमें सरकारी निगरानी और निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता एक साथ आकर किसानों के हित में ठोस परिणाम लाने का लक्ष्य रखती है।
HADCL के गठन से मजबूत होगी कृषि संरचना
HADCL में एर्डे एग्रो की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत और कार्बी काउंसिल की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत रखी गई है। ये साझेदारी सुनिश्चित करेगी कि विकास की योजनाएं केवल कागज पर न रहें, बल्कि ज़मीन पर दिखें और किसानों तक सीधा लाभ पहुंचे। HADCL क्षेत्रीय स्तर पर किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर विपणन साधन, और प्रोसेसिंग सुविधाएं प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। ये कंपनी न केवल कार्बी आंगलोंग, बल्कि पूरे उत्तर-पूर्वी भारत के किसानों के लिए एक रोल मॉडल बनने जा रही है।
फ़ूड पार्क और लॉजिस्टिक्स हब से बढ़ेगा बाजार तक पहुंच
HADCL के तहत एक अत्याधुनिक फ़ूड पार्क और रीजनल लॉजिस्टिक्स हब स्थापित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य स्थानीय कृषि उत्पादों को मूल्य संवर्धन (Value Addition) के साथ बाजार तक पहुंचाना है। इस परियोजना के तहत अदरक, हल्दी, काली मिर्च और बर्ड्स आई मिर्च जैसी फ़सलों की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग यूनिट स्थापित की जाएंगी।
इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलेगा, फ़सल की बर्बादी घटेगी और क्षेत्र में कृषि आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा। HADCL की ये पहल किसानों को बाजार से जोड़ने, भंडारण सुविधाएं उपलब्ध कराने और प्रोसेसिंग के जरिए उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है।
किसानों के लिए सीधी मदद और वित्तीय सुरक्षा
HADCL सिर्फ़ संरचनात्मक विकास तक सीमित नहीं रहेगा। ये कंपनी किसानों के लिए ‘फार्मर स्कीम सपोर्ट सेल’ की स्थापना करेगी, जो केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं — जैसे बीज सब्सिडी, खाद पर छूट, और कृषि उपकरण सहायता — की जानकारी और लाभ किसानों तक पहुंचाएगा।
इसके अलावा, किसानों को जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुक़सान से बचाने के लिए इवेंट-बेस्ड क्रॉप इंश्योरेंस सिस्टम की शुरुआत की जाएगी। ये पारंपरिक बीमा योजनाओं से अलग होगा और समय पर वित्तीय सहायता प्रदान करेगा, ताकि किसान किसी संकट में भी सुरक्षित रहें।
10,000 से अधिक किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
HADCL का लक्ष्य पहले चरण में 10,000 से अधिक किसानों को सीधा लाभ पहुंचाना है। ये केवल एक बार की सहायता नहीं होगी, बल्कि दीर्घकालिक रूप से किसानों की आय बढ़ाने, प्रशिक्षण प्रदान करने और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने में सहयोग करने की पहल होगी। एर्डे एग्रो और KAAC की इस साझेदारी से न केवल किसान बल्कि स्थानीय युवाओं को भी रोजगार के अवसर मिलेंगे। पहले वर्ष में लगभग 200 लोगों को सीधा रोजगार मिलेगा, जबकि दो वर्षों के भीतर 1,500 से अधिक नए रोजगार सृजित किए जाएंगे।
HADCL से जुड़े आर्थिक लाभ और विस्तार की योजना
परियोजना से पहले वर्ष में ₹6 करोड़ का राजस्व प्राप्त होने की संभावना है, जो दो वर्षों में बढ़कर ₹17 करोड़ तक पहुंच सकता है। HADCL के तहत कार्बी आंगलोंग में एक सेंट्रल एग्रीकल्चर हब स्थापित किया जाएगा, जो आने वाले समय में पाँच अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करेगा। इस तरह ये पहल पूरे पूर्वोत्तर भारत की कृषि-अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
किसानों के लिए आत्मनिर्भरता की राह
HADCL के गठन से किसानों के जीवन में एक नई उम्मीद जगी है। ये केवल एक व्यावसायिक साझेदारी नहीं, बल्कि किसानों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में ठोस प्रयास है। इस परियोजना से क्षेत्र के किसान अब केवल कच्चा माल बेचने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे कृषि-उद्योग के भागीदार बनेंगे, जिससे उनकी आय में स्थायी वृद्धि होगी।
निष्कर्ष
HADCL का गठन ये दर्शाता है कि जब सरकार, निजी क्षेत्र और किसान एक साथ मिलकर काम करते हैं, तो कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन संभव है। कार्बी आंगलोंग की ये पहल न केवल क्षेत्र के किसानों की तकदीर बदलेगी, बल्कि उत्तर-पूर्व भारत को एक कृषि समृद्धि केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। ये कहा जा सकता है कि HADCL सिर्फ़ एक कंपनी नहीं, बल्कि एक ऐसा पुल है जो किसानों को समृद्धि, तकनीक और आत्मनिर्भरता की राह से जोड़ रहा है।
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