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भारत की कृषि व्यवस्था (agricultural system) में एक ऐतिहासिक बदलाव की नींव रखी जा रही है। देश के किसानों की आमदनी बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और Climate change के खतरों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने दो बड़े मिशनों (Digital Agriculture Mission और Natural Farming Mission) की शुरुआत की है। इसी कड़ी में 11 नवंबर 2025 को कृषि भवन, नई दिल्ली में एक अहम बैठक हुई, जहां डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन और नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग (Digital Agriculture Mission and National Mission on Natural Farming) की प्रगति की गहन समीक्षा (In-depth review) की गई।
इस बैठक की अध्यक्षता कृषि सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी (Agriculture Secretary Dr. Devesh Chaturvedi) ने की और उत्तरी भारत के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। ये बैठक इसलिए भी ख़ास है क्योंकि ये दोनों मिशन मिलकर भारत के किसान को ‘आधुनिक तकनीक’ और ‘प्रकृति की शक्ति’ का मिला-जुला लाभ देने जा रहे हैं।
नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग
ये मिशन किसानों को रासायनिक खेती (chemical farming) के चंगुल से निकालकर प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर खेती करने की राह दिखा रहा है। इसके तहत 7.5 लाख हेक्टेयर में नैचुरल फार्मिंग (natural farming) शुरू करने, 10,000 बायो-इनपुट केंद्र बनाने और 1 करोड़ किसानों को जागरूक करने का टारगेट है। सबसे बड़ी बात ये है कि इससे किसानों की लागत तो कम होगी ही, साथ ही मिट्टी की सेहत भी सुधरेगी और ‘जहर मुक्त’ अनाज का प्रोडक्शन होगा, जिसके लिए एक आसान सर्टिफिकेशन और ब्रांडिंग (Easy certification and branding) की व्यवस्था भी की जाएगी। आंध्र प्रदेश, हिमाचल और गुजरात जैसे राज्य पहले ही इसके सफल मॉडल पेश कर चुके हैं।
डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन: किसान की जेब में डिजिटल साथी
ये मिशन किसानों के लिए तकनीक की एक नई दुनिया खोल रहा है। इसके तीन मुख्य आधार हैं-
1.एग्रीस्टैक (AgriStack)
इसे किसानों का ‘Digital Aadhaar’ कह सकते हैं। इसमें हर किसान का एक यूनिक ‘फार्मर आईडी’ बनेगा, जो उसकी ज़मीन, फसल, पशुधन और सरकारी योजनाओं का लाभ जैसी सारी जानकारियों से जुड़ा होगा। अगले तीन साल में 11 करोड़ किसानों को यह आईडी दी जाएगी।
2.कृषि निर्णय सहायता प्रणाली (Agricultural Decision Support System)
यह सिस्टम मौसम, मिट्टी की नमी और फसलों की सेहत का डेटा जुटाकर किसान को सही समय पर सही सलाह देगा, जैसे- कब पानी देना है, कब खाद डालना है या कब फसल काटनी है।
3.मृदा स्वास्थ्य कार्ड का डिजिटलीकरण (Digitization of Soil Health Card)
देश की 14.2 करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि का हाई-रिज़ॉल्यूशन सॉइल मैप तैयार किया जाएगा, ताकि किसान को अपने खेत की मिट्टी की सटीक जानकारी मिल सके।
बैठक का मकसद: तालमेल बनाएंगे, रास्ता आसान करेंगे
11 नवंबर की इस Regional Review Meeting का मुख्य उद्देश्य इन महत्वाकांक्षी मिशनों को ज़मीन पर उतारने में आ रही चुनौतियों को दूर करना और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाना था। अलग-अलग राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने अनुभव शेयर किए और इस बात पर जोर दिया कि योजनाओं का फायदा सीधे अंतिम छोर के किसान तक पहुंचे।
साफ है कि सरकार का Dual strategy पर फोकस है। डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन किसान को सही जानकारी और सुविधा देकर उसकी उपज बढ़ाएगा, जबकि नेचुरल फार्मिंग मिशन उसकी लागत कम करके और उपज का दाम बढ़ाकर उसकी आमदनी बढ़ाएगा। जब ये दोनों मिशन एक साथ पूरी तरह लागू हो जाएंगे, तो भारत का किसान न केवल आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि दुनिया के लिए एक टिकाऊ और प्रकृति-सम्मत कृषि मॉडल भी पेश करेगा।
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