World Aquaculture India 2025: हैदराबाद में जुटे दुनियाभर के Expert, ‘Blue Revolution’ से Aquaculture में भारत बनेगा विश्व गुरु

हैदराबाद में 11 से 13 नवंबर तक 'World Aquaculture India 2025' नाम का एक बड़ा International Conference और प्रदर्शनी चल रही है। इसका आयोजन वर्ल्ड एक्वाकल्चर सोसाइटी (World Aquaculture Society) कर रही है।

World Aquaculture India 2025: हैदराबाद में जुटे दुनियाभर के Expert, 'Blue Revolution' से Aquaculture में भारत बनेगा विश्व गुरु

दुनिया भर के मछली पालन (Aquaculture) के Expert, वैज्ञानिक और Policy Maker इन दिनों हैदराबाद में जुटे हैं। यहां 11 से 13 नवंबर तक ‘World Aquaculture India 2025’ नाम का एक बड़ा International Conference और प्रदर्शनी चल रही है। इसका आयोजन वर्ल्ड एक्वाकल्चर सोसाइटी (World Aquaculture Society) कर रही है। ये आयोजन इसलिए बेहद ख़ास है क्योंकि ये दुनिया को ये बता रहा है कि फ्यूचर में दुनिया की बढ़ती आबादी के लिए समुद्री भोजन (Seafood) की जरूरत कैसे पूरी होगी।

क्यों है ये सम्मेलन इतना ज़रूरी?

एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की आबादी लगातार बढ़ रही है और समुद्र में मछलियों का भंडार अपनी सीमा तक पहुंच गया है। अब सिर्फ समुद्र से मछलियां पकड़कर हम फ्यूचर की मांग पूरी नहीं कर सकते। ऐसे में Aquaculture यानी वैज्ञानिक तरीके से तालाबों, पिंजरों वगैरह में मछली पालन ही एकमात्र रास्ता बचता है। भारत इस दिशा में एक ‘Blue Revolution’ यानी ‘नीली क्रांति’ लाना चाहता है, जिसका मकसद है मछली पालन के ज़रिए न सिर्फ देश की जरूरतें पूरी करना बल्कि एक्सपोर्ट बढ़ाकर अर्थव्यवस्था को मज़बूत करना है।

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MPEDA की अहम भूमिका

इसी टारगेट के साथ Marine Products Export Development Authority (MPEDA) इस सम्मेलन में एक ख़ास सत्र चला रही है, जिसकी थीम है-  “Harnessing India’s Blue Revolution for Export Growth”। MPEDA का जोर इस बात पर है कि मछली पालन और निर्यात टिकाऊ (Sustainable) तरीके से हो। यानी, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना, लंबे वक्त तक चलने वाला विकास हो। इसके लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो रही है, जैसे:

1.Export oriented fish farming: कैसे ऐसी मछलियां पाली जाएं जिनकी विदेशों में सबसे ज्यादा मांग है।

2.Value Addition: कच्ची मछली के बजाय उससे बने प्रोडक्ट जैसे फिललेट, पिकल्स आदि बनाकर उसकी कीमत बढ़ाना।

3.Innovation and expansion: मछली पालन में नई तकनीकों और रिसर्च का इस्तेमाल।

4.Export potential of states: देश के अलग-अलग राज्यों में मछली निर्यात की कितनी संभावना है, इसका आकलन।

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नीली क्रांति को मिल रही मज़बूती

इस कार्यक्रम का उद्घाटन NFDB (नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. बिजय कुमार बेहरा ने किया। उन्होंने कहा कि PMMSY (Prime Minister’s Fisheries Resource Scheme) के तहत भारत इनोवेशन, तकनीकी विकास और जिम्मेदार मछली पालन प्रथाओं के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। NFDB ‘ब्लू इकॉनमी’ यानी समुद्री अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
इस मौके पर ICAR, FAO, तेलंगाना सरकार के फिशरीज विभाग और MPEDA के अध्यक्ष श्री डी. वेंकट स्वामी जैसे गणमान्य लोग भी मौजूद थे।

आगे की राह

MPEDA को उम्मीद है कि इन sessions के दौरान हुई बातचीत और विचार-विमर्श से उद्योग के जिम्मेदार और टिकाऊ विकास के लिए ठोस सिफारिशें सामने आएंगी। दुनिया भर के expert यहां अपने आइडिया, अनुभव और सफलता की कहानियां शेयर कर रहे हैं ताकि seafood export sector  की Global challenges का सामना किया जा सके और इसे नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सके।

 

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