Padma Awards 2026: खेतों से उठी मेहनत, किसानों को मिला प्रतिष्ठित Padma Shri सम्मान

Padma Awards 2026: इस वर्ष भारत सरकार ने 131 प्रतिष्ठित व्यक्तियों को पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री पुरस्कारों […]

Padma Awards 2026

Padma Awards 2026: इस वर्ष भारत सरकार ने 131 प्रतिष्ठित व्यक्तियों को पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री पुरस्कारों के लिए चुना गया है, जिनमें विशेष रूप से कृषि क्षेत्र के वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों का दबदबा रहा है।  कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में चुने गए 9 सम्मानितों में 5 नामी वैज्ञानिक और 4 प्रगतिशील किसान शामिल हैं, जिन्होंने अपने जीवन का सर्वोच्च योगदान किसानों के कल्याण और कृषि नवाचारों पर केंद्रित किया है। आइए किसान ऑफ़ इंडिया पर जानते हैं सम्मानित किसानों की कहानियों को।

Padma shri सम्मान से सम्मानित होने वाले किसान

श्रीरंग देवाबा लाड (महाराष्ट्र)

श्रीरंग देवाबा लाड  ने अपने जीवन में कृषि नवाचार का उदाहरण पेश किया है। उन्होंने ‘दादा लाड टेक्नोलॉजी’ विकसित की, एक ऐसी पद्धति जिसने कपास की उपज को लगभग तीन गुना बढ़ा दिया, जिससे हजारों किसानों को ऋण मुक्त और उच्च लाभ कमाने में मदद मिली है। उनकी प्रेरणादायक यात्रा बताती है कि पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय सोच से बड़े पैमाने पर प्रभावकारी बदलाव लाया जा सकता है। कृषि इनोवेटर श्रीरंग देवबा लाड को इस साल ‘अनसंग हीरोज’ कैटेगरी में पद्म श्री पुरस्कार के लिए चुना गया है। उन्होंने  मीडिया से बातचीत करते हुए  कहा कि पद्म सम्मान मुझे किसानों के लिए और काम करने के लिए प्रेरित करेगा। आगे उन्होंने कहा कि उनके लिए यह सम्मान व्यक्तिगत खुशी की बात नहीं है, बल्कि किसानों और खेती के विकास के लिए और काम करते रहने के लिए प्रेरित करेगा।

जोगेश देउरी (असम)

असम के जोगेश देउरी को ‘मूंगा रेशम’ (Muga Silk) के संरक्षण के लिए जाना जाता है। जोगेश देउरी ने मूगा रेशम (Muga Silk) को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। उनके नेतृत्व में निर्मित ‘इंटीग्रेटेड बोडोलैंड सिल्क पार्क’ ने लगभग 1,600 से अधिक गांवों को एक साझा आर्थिक मंच पर लाया, जिससे ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी और आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्योग को सहारा देने वाली एक मिसाल बन चुका है। उन्होंने पारंपरिक रेशम कीट पालन को आधुनिक तकनीक से जोड़कर हजारों ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाई है। मूंगा रेशम, जो केवल असम में पाया जाता है, उसे वैश्विक पहचान दिलाने में जोगेश का बड़ा हाथ है।

रघुपत सिंह (उत्तर प्रदेश)

रघुपत सिंह, जिनका सम्मान मरणोपरांत दिया गया, ने लगभग पाँच दशकों तक 55 से अधिक दुर्लभ और संकटग्रस्त किस्मों को संरक्षित और 100 से अधिक नई किस्मों का विकास किया। उनके संरक्षण कार्य ने लगभग 3 लाख से अधिक किसानों को प्रत्यक्ष लाभ पहुँचाया। रघुपत सिंह को लोग सम्मान से ‘कृषि पंडित’ बुलाते थे। उनकी शोध करने की क्षमता किसी बड़े वैज्ञानिक से कम नहीं थी। उन्होंने बिना किसी बड़ी लैब के, केवल अपने अनुभव और मेहनत से ऐसी फसलें उगाईं जिन्हें देखकर लोग दांतों तले उंगलियां दबा लेते थे। उन्होंने 7 फीट लंबी लौकी, ढाई फुट की सेम और एक ऐसा अनोखा अदरक विकसित किया, जिससे आम जैसी खुशबू और स्वाद आता था। उन्होंने 100 से ज्यादा फसलों की नई प्रजातियां तैयार कीं। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों से जो भी सीखा, उसे अपने खेत में प्रयोग के तौर पर उतारा और खेती को एक चमत्कार बना दिया।

रामा रेड्डी मामिदि (तेलंगाना)

रामा रेड्डी मामिदि , जिन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया, ने ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और सहकारी आंदोलनों को मजबूती दी। उन्होंने महिला डेयरी सहकारी समितियों के माध्यम से न केवल आर्थिक स्वतंत्रता दिलाई, बल्कि सहकारी कानूनों के सुधार में भी अहम भूमिका निभाई। तेलंगाना निवासी  रामा रेड्डी मामिदि पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के ऐसे दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता थे, जिन्होंने इस क्षेत्र को महज़ रोज़गार का साधन नहीं, बल्कि लंबे समय तक टिकाऊ और लाभकारी व्यवसाय के रूप में देखने की नई सोच दी। उनका विश्वास था कि जब किसान और पशुपालक संगठित होते हैं, तो वे किसी भी व्यवस्था पर निर्भर हुए बिना अपनी आर्थिक दशा खुद बदल सकते हैं। इसी विचारधारा के तहत उन्होंने सहकारी समितियों को सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर काम किया। रामा रेड्डी का उद्देश्य केवल दूध उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं था। उनका लक्ष्य था ग्रामीण अर्थव्यवस्था की पूरी श्रृंखला को मजबूत करना, ताकि किसान, महिलाएं और पशुपालक सभी आत्मनिर्भर बन सकें। सहकारिता के माध्यम से उन्होंने गांवों में ऐसा तंत्र खड़ा किया, जिसने किसानों को बाज़ार, मूल्य और अधिकार और तीनों स्तरों पर मजबूती दी।

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

इसे भी पढ़िए: Climate Crisis: भारत का किसान प्रकृति के प्रकोप के सामने क्यों हार रहा? बाढ़, सूखा और बादल फटना बना नई ख़तरनाक ‘सामान्य’ स्थिति

 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top