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खेती में आमदनी बढ़ाने की शानदार स्कीम है प्रधानमंत्री कुसुम योजना

सिर्फ़ 10% की निजी पूँजी से लगाएँ सोलर पम्प, 60% अनुदान और 30% कर्ज़ बैंक से पाने की सुविधा

प्रधानमंत्री कुसुम योजना (Pradhanmantri Kusum Yojana) का एक और आकर्षक पहलू ये है कि इसके ज़रिये किसान अपनी ज़मीन पर सौर ऊर्जा के उत्पादन का प्लांट भी लगा सकते हैं। प्लांट से पैदा होने वाली बिजली को आसपास के किसानों या सीधे बिजली वितरण कम्पनियों को भी बेचा जा सकता है। ऐसे करके प्लांट लगाने वाले किसान या भूमि मालिक को 60 हज़ार रुपये से लेकर एक लाख रुपये सालाना तक की आमदनी भी हो सकती है।

प्रधानमंत्री कुसुम योजना: सिंचाई के लिए डीज़ल या बिजली से चलने वाले पम्पिंग सेट्स के इस्तेमाल से खेती की लागत ख़ासी बढ़ जाती है। ऐसे में सौर ऊर्जा से चलने वाले पम्पिंग सेट्स किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होते, क्योंकि सौर ऊर्जा से चलने वाले पम्पिंग सेट्स में सिर्फ़ एक बार पूँजीगत निवेश करना पड़ता है।

इसके बाद नियमित रूप से डीज़ल वग़ैरह ख़रीदने या बिजली का बिल भरने की चिन्ता ख़त्म हो जाती है। इतना ही नहीं, सौर ऊर्जा से पैदा होने वाली बिजली से देश के कुल बिजली उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी होती है।

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कुसुम योजना की अहमियत (What is pradhanmantri kusum yojana)

इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखकर केन्द्रीय गैरपरम्परागत और नवीकृत ऊर्जा मंत्रालय यानी Ministry of New and Renewable Energy (MNRI) ने कुसुम योजना शुरू की है। कुसुम यानी (Kusum) या प्रधानमंत्री किसान सुरक्षा अभियान की घोषणा तो मार्च 2019 में हुई। लेकिन इसके दिशा-निर्देश जुलाई 2019 में जारी हुए। इसके ज़रिये सोलर पम्प लगाने के लिए किसानों को 60 फ़ीसदी अनुदान या आर्थिक मदद देकर प्रोत्साहित किया जाता है।

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कुसुम योजना का लाभ देश भर के किसान उठा सकते हैं। इसके पहले चरण में डीज़ल से चल रहे 17.5 लाख पम्पिंग सेट्स को सौर ऊर्जा से चलाने का लक्ष्य रखा गया है। फ़िलहाल, राजस्थान के किसानों के बीच कुसुम योजना ख़ूब लोकप्रिय हो रही है। वहाँ ज़्यादा से ज़्यादा से ज़्यादा किसान इसका फ़ायदा उठाने के लिए आगे आ रहे हैं क्योंकि राजस्थान के ज़्यादातर इलाकों में भूजल का स्तर ख़ासा नीचे है।

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अपने भूजल का स्तर की वजह से राजस्थान में डीज़ल या बिजली वाले पम्पिंग सेट्स से सिंचाई करना ज़्यादा ख़र्चीला बन जाता है। इससे खेती की लागत बढ़ जाती है और किसानों को बाज़ार से मिलने वाला मुनाफ़ा घट जाता है। क्योंकि बाज़ार में तो आमतौर पर किसी उपज की माँग और पूर्ति के नियमों से ही दाम निर्धारित होते हैं। इसमें वो किसान अपेक्षाकृत बेहतर दशा में होते हैं, जिनकी फसल की लागत कम होती है।

कुसुम योजना का आकर्षक पहलू (pradhanmantri kusum yojana benefits)

कुसुम योजना का एक और आकर्षक पहलू ये है कि इसके ज़रिये किसान अपनी ज़मीन पर सौर ऊर्जा के उत्पादन का प्लांट भी लगा सकते हैं। प्लांट से पैदा होने वाली बिजली को आसपास के किसानों या सीधे बिजली वितरण कम्पनियों को भी बेचा जा सकता है। ऐसे करके प्लांट लगाने वाले किसान या भूमि मालिक को 60 हज़ार रुपये से लेकर एक लाख रुपये सालाना तक की आमदनी भी हो सकती है। ये बैंक का कर्ज़ उतारने में काफ़ी मददगार हो सकता है।

किसान या भूमि मालिक को 60 हज़ार रुपये से लेकर एक लाख रुपये सालाना तक की आमदनी

सोलर पम्पिंग सेट के 60 फ़ीसदी सब्सिडी

कुसुम योजना के तहत किसानों को सोलर पैनल लगाने के खर्च पर 60 फ़ीसदी सब्सिडी मिलती है। बाक़ी 30 प्रतिशत का कर्ज़ बैंक से हासिल किया जा सकता है और किसान को सिर्फ़ 10% पूँजी का ही इन्तज़ाम अपने बूते करना पड़ता है। कुसुम योजना के तहत 3 से 7.5 हार्स पॉवर (HP) का पम्पिंग सेंट लगाया जा सकता है। इसके लिए किसान को पम्प की शक्ति के अनुसार डिमांड राशि चुकानी पड़ती है। मसलन,

पम्पिंग सेट की शक्ति  –  डिमांड राशि (रुपये)

3 HP – 20,549

5 HP – 33,749

7.5 HP – 46,687

किसानों को सोलर पैनल लगाने के खर्च पर 60 फ़ीसदी सब्सिडी मिलती है

कुसुम योजना के लिए कैसे करें आवेदन (Pradhanmantri kusum yojana online registration)

सौर ऊर्जा का लाभ उठाने के इच्छुक किसानों को कुसुम योजना की वेबसाइट http://rreclmis.energy.rajasthan.gov.in/kusum.aspx पर जाकर अपना ब्यौरा भरना होगा। यहीं उसे बाक़ी की सारी जानकारी भी मिलेगी।

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