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‘निवार’ तूफान के चलते दक्षिण भारत के कई राज्यों के लिए चेतावनी जारी

भारतीय मौसम विभाग ने घासपूस की झोपड़ियों, कच्चे घरों को अत्यधिक नुकसान, उड़ने वाली वस्तुओं, ऊंची ज्वारीय लहरें, पेड़ों और बिजली के खंभों के गिरने को लेकर चेतावनी जारी की है। समुद्र में मछली मारने का काम पूरी तरह से रोकने की सलाह दी गई है।

दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बेहद गंभीर चक्रवाती तूफान ‘निवार‘- (तमिलनाडु और पुदुचेरी के लिए चक्रवात चेतावनी – रेड मैसेज), दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में कडलूर से 90 किमी. पूर्व-दक्षिण-पूर्व, पुदुचेरी से लगभग 150 किमी. पूर्व-दक्षिण-पूर्व और चेन्नई से 220 किमी. दक्षिण-दक्षिण पूर्व में ‘निवार’ केंद्रित है।

चक्रवात के उत्तर- पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने और 25 तारीख की आधी रात को पुदुचेरी के आसपास कराईकल और ममल्लापुरम के बीच तमिलनाडु और पुदुचेरी के तटों को पार करने और 26 नवंबर, 2020 की सुबह 120-130 किलोमीटर प्रति घंटे से लेकर 145 घंटे की रफ्तार वाली तेज हवाओं के साथ एक बेहद गंभीर तूफान में बदलने का अनुमान लगाया गया है। चक्रवात की चेन्नई, कराईकल और श्रीहरिकोटा में डॉप्लर वेदर राडार से निगरानी की जा रही है।

25 तारीख को तटीय और उत्तर आंतरिक तमिलनाडु और 25 तारीख को पुदुचेरी, आंध्र प्रदेश के नेल्लोर और चित्तूर जिलों में और 26 नवंबर, 2020 को तमिलनाडु के रानीपेट, तिरुवन्नमलई, तिरुपति, वेल्लोर जिलों, आंध्र प्रदेश के चित्तूर, कुरनूल, प्रकासम और कुडप्पा जिलों और तेलंगाना से सटे दक्षिण-पूर्व हिस्सों में छिट-पुट जगहों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना जताई जा रही है।

भारतीय मौसम विभाग ने घासपूस की झोपड़ियों, कच्चे घरों को अत्यधिक नुकसान, उड़ने वाली वस्तुओं, ऊंची ज्वारीय लहरें, पेड़ों और बिजली के खंभों के गिरने को लेकर चेतावनी जारी की है। समुद्र में मछली मारने का काम पूरी तरह से रोकने की सलाह दी गई है।

आईएमडी ने तट से टकराने के बाद अगले छह घंटे तक तूफान की तीव्रता बने रहने और धीरे-धीरे कमजोर पड़ने की संभावना जताई है। बंगाल की दक्षिण-पश्चिम खाड़ी के ऊपर बना चक्रवाती तूफान “निवार” कल पश्चिम-उत्तर पश्चिम दिशा में बढ़ गया और 24 नवंबर, 2020 की मध्य रात्रि को एक गंभीर चक्रवात में बदल गया। उत्तर पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए आज, 25 नवंबर, 2020, दोपहर (2.30 बजे) यह बेहद गंभीर चक्रवात बना गया है और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर कुडलूर से 90 किमी. पूर्व-दक्षिण-पूर्व, पुदुचेरी से लगभग 150 किमी. पूर्व-दक्षिण-पूर्व और चेन्नई से 220 किमी. दक्षिण-दक्षिणपूर्व में केंद्रित है।

चक्रवात के उत्तर- पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने और 25 तारीख की आधी रात को पुदुचेरी के आसपास कराईकल और ममल्लापुरम के बीच तमिलनाडु और पुदुचेरी के तटों को पार करने और 26 नवंबर, 2020 की सुबह 120-130 किलोमीटर प्रति घंटे से लेकर 145 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली तेज हवाओं के साथ एक बेहद गंभीर तूफान में बदलने की संभावना है।

चक्रवात की चेन्नई, कराईकल और श्रीहरिकोटा में डॉप्लर वेदर राडार से निगरानी की जा रही है।

जारी चेतावनी में कहा गया है

(i) बारिश

25 और 26 नवंबर के दौरान तटवर्ती और उत्तर आंतरिक तमिलनाडु, पुदुचेरी और कराईकल, दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में और 26 नवंबर, 2020 को दक्षिण-पूर्व तेलंगाना में पर्याप्त व्यापक से स्तक व्यापक बारिश/बिजली कड़कने जैसी गतिविधियां होने की संभावना है। 25 नवंबर को तटवर्ती और उत्तर आंतरिक तमिलनाडु और पुदुचेरी (तंजावुर, तिरुवरुर, नागापट्टिनम, कुडलूर, चेन्नई, कांचीपुरम, चेंगलपट्टू, मायलादुथुरई, अरियालुर, पेरम्बलुर, कल्लकुची, विल्लुपुरम, तिरुवन्नामलई, पुदुचेरी और कराईकल जिले) में, 25 नवंबर को आंध्र प्रदेश के नेल्लोर और चित्तूर जिलों में और 26 नवंबर, 2020 को तमिलनाडु के रानीपेट, तिरुवन्नमलई, तिरुपत्तूर, वेल्लोर जिलों में; आंध्र प्रदेश के चित्तूर, कुरनूल, प्रकाशम और कुडप्पा जिलों और सटे हुए दक्षिण-पूर्व तेलंगाना में छिट-पुट जगहों पर अत्यधिक भीषण बारिश होने का अनुमान है।

(ii) हवा की चेतावनी

बंगाल की दक्षिण-पश्चिम खाड़ी के ऊपर 115-125 किमी प्रति घंटा से लेकर 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के सात तूफानी हवाएं चल रही हैं। 25 नवंबर की शाम से लेकर 26 नवंबर की सुबह तक इसकी रफ्तार बढ़कर 120-130 किमी प्रति घंटे से लेकर 145 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

उत्तर तमिलनाडु के साथ और दूर की जगहों पर, तमिलनाडु और पुदुचेरी कराईकल तट पर 60-70 किमी प्रति घंटे से लेकर 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल रही हैं और दक्षिण तमिलनाडु और दक्षिण आंध्र प्रदेश तट और मन्नार की खाड़ी में तूफानी हवाओं की रफ्तार 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे से लेकर 50 किमी प्रति घंटे तक पहुंच रही है।

यह धीरे-धीरे बढ़ेगा और उत्तरी तमिलनाडु और पुदुचेरी (नागापट्टिनम, कराईकल, मायलादुथुरई, कुडलूर, पुदुचेरी, विल्लुपुरम और चेंगलपट्टू) में तूफानी हवा की रफ्तार 120-130 किलोमीटर प्रति घंटे से लेकर 145 किमी प्रति घंटे हो जाएगी। 25 नवंबर की रात से 26 नवंबर, 2020 की सुबह तक तिरुवरुर, कांचीपुरम, चेन्नई, तिरुवल्लूर जिलों में 80-90 किलोमीटर प्रति घंटा से लेकर 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है।

25 नवंबर की रात और 26 नवंबर, 2020 की सुबह तक पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी से सटे इलाकों और दक्षिण आंध्र प्रदेश (नेल्लोर और चित्तूर जिलों), मन्नार की खाड़ी और दक्षिण तमिलनाडु के दक्षिण तटीय जिलों में तूफानी हवाओं की रफ्तार 65-75 किमी प्रति घंटे से 85 किलो मीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंच जाने की संभावना है।

(iii) समुद्र की स्थिति

दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में समुद्र की स्थिति बहुत ही अस्थिर है और तमिलनाडु, पुदुचेरी और दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट और दूर समुद्र में स्थिति बहुत ही मुश्किल है। 25 नवंबर की रात और 26 नवंबर 2020 की सुबह तक यह धीरे-धीरे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उत्तर तमिलनाडु, पुदुचेरी तटों के साथ-साथ और दूर समुद्र में स्थिति बहुत सामान्य हो जाएगी।

(iv) तूफान के मजबूत होने की चेतावनी

खगोलीय ज्वार से 1-1.5 मीटर तक ऊंची ज्वारीय लहरें उठने की वजह से तूफान के समुद्र तट से टकराने वाली जगहों के आस-पास तमिलनाडु के उत्तर तटीय जिलों और पुदुचेरी के निचले इलाकों में जलभराव होने की संभावना है।

(v) (ए) तमिलनाडु के नागपट्टिनम, मायलादुथुरई, कुडलूर, विल्लुपुरम और चेंगलपट्टु जिलों और कराईकल और पुदुचेरी नुकसान होने की आशंका

  • घासपूस के घरों की पूर्ण तबाही/कच्चे घरों को भारी नुकसान। पुराने पक्का घरों को कुछ-कुछ नुकसान, उड़ जाने वाली वस्तुओं से ज्यादा खतरा।
  • बिजली और संचार के खंबों के मुड़ने या उखड़ने का खतरा
  • कच्ची को ज्यादा नुकसान और पक्की सड़कों को कम नुकसान। निकासी के रास्तों पर बाढ़। रेलवे की ओवरहेड पावरलाइन और सिग्नलिंग सिस्टम को नुकसान।
  • खेतों में खड़ी फसलों, बागों, हरे नारियल के फलों के गिरने और ताड़ के पेड़ों के साथ-साथ आम जैसे शाखाओं वाले पेड़ों को भारी नुकसान
  • छोटी नावों, देसी नावें अपनी बांधी जाने वाली जगहों से उखड़ सकती हैं।

दृश्यता बुरी तरह से प्रभावित

  • तमिलनाडु के तिरुवरूर, कांचीपुरम, चेन्नई, तिरूवल्लौर जिलों और आंध्र प्रदेश के आसपास के इलाकों में नुकसान की आशंका
  • घासफूस के घरों/झोपड़ियों को नुकसान, हवा के साथ छत के जाने की आशंका और बिना जोड़कर रखी गई लोहे की चादरों के उड़ने का खतरा।
  • बिजली और संचार लाइनों को नुकसान।
  • कच्ची सड़कों को नुकसान और पक्की सड़कों को कुछ नुकसान। निकासी के रास्तों पर जलजमाव।
  • पेड़ों की शाखा टूटने, पेड़ों के उखड़ने, केले और पपीते के पेड़ों, बागवानी, फसलों और बागों को गंभीर नुकसान। पेड़ों की सूखी शाखाओं या हिस्सों के गिरने का खतरा।
  • तटीय फसलों को भारी नुकसान। बाधों/नमक के गड्ढों को नुकसान।

(vi) मछुआरों के लिए चेतावनी और सुझाई गई गतिविधियां

  • मछली पकड़ने के काम पर पूरी तरह से रोक।
  • तटीय क्षेत्रों को खाली करने में तेजी लाना। तटीय क्षेत्रों में झोपड़ी में रहने वालों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना।
  • प्रभावित क्षेत्रों में लोग सुरक्षित स्थानों पर और घर के भीतर रहें।
  • रेल, सड़क और हवाई यातायात का सावधानी से संचालन ।
  • मोटर नौकाओं और छोटे जहाजों में आवागमन असुरक्षित।

(vii) चक्रवात के समुद्र तट से टकराने के बाद आंतरिक जिलों (रानीपेट, तिरुवन्नमलई, तिरुपत्तुर, वेल्लोर और चित्तूर) के लिए पूर्वानुमान

तूफान के तट से टकराने के बाद भी, इसके तंत्र में लगभग 6 घंटे तक चक्रवाती तीव्रता बने रहने और इसके धीरे-धीरे कमजोर होने की संभावना है।

इसके असर से 26 नवंबर को अधिकांश/ज्यादातर जगहों पर भारी से लेकर भारी बारिश और छिटपुट जगहों पर अत्यधिक बारिश होने की आशंका है. इसमें तमिलनाडु के रानीपेट, तिरुवन्नमलई, तिरुपत्तूर, वेल्लोर जिले, आंध प्रदेश के चित्तूर, कुरनूल, प्रकासम और कुडप्पा जिले और इससे सटे दक्षिण-पूर्वी तेलंगाना का क्षेत्र शामिल हैं।

26 नवंबर की सुबह तमिलनाडु के आंतरिक जिलों (रानीपेट, तिरुवन्नमलई, तिरुपत्तूर, वेल्लोर) और आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में 65-75 किमी प्रति घंटे से लेकर 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाओं के चलने की संभावना है। तमिलनाडु के रानीपेट, तिरुवन्नमलई, तिरुपत्तूर, वेल्लोर जिलों और आंध्र प्रदेश के चित्तूर, कुरनूल, प्रकासम और कुडप्पा जिलों में नुकसान होने की आशंका है।

  • छतों के हवा के साथ उड़ने की आशंका के साथ घासपूस के घरों/झोपड़ियों को आंशिक नुकसान, छत पर बिना बांधे रखी लोहे की चादरें उड़ सकती हैं।
  • बिजली और संचार लाइनों को आंशिक नुकसान।
  • कच्ची सड़कों को नुकसान और पक्की सड़कों को भी कुछ नुकसान। नाकासी के मार्गों पर जलजमाव।
  • पेड़ की शाखाओं के टूटना, छोटे पेड़ों के उखाड़ने का जोखिम। केले और पपीते के पेड़ों, बागवानी और फसलों व बागों को नुकसान।
  • लोगों को घर के अंदर/सुरक्षित स्थानों पर रहने और राज्य सरकार के अफसरों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के साथ सहयोग करने की सलाह दी गई है।
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।
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