बेमौसम बारिश के बाद फसल क्यों खराब हो जाती है?

“बारिश तो अच्छी थी, फिर नुकसान क्यों हुआ?” भारत के कई इलाकों में हर साल किसानों को यही उलझन होती […]

बेमौसम बारिश

“बारिश तो अच्छी थी, फिर नुकसान क्यों हुआ?” भारत के कई इलाकों में हर साल किसानों को यही उलझन होती है। मौसम से अलग समय पर थोड़ी सी बारिश हो जाती है। बारिश ज़्यादा नहीं होती, कभी-कभी सिर्फ़ एक-दो दिन की। सूखे के बाद यह राहत जैसी भी लगती है। लेकिन कुछ ही दिनों या हफ़्तों में फसल में दिक्कतें दिखने लगती हैं। फूल झड़ जाते हैं, फलियां कम बनती हैं, पत्तियां पीली पड़ जाती हैं, फफूंद लग जाती है और पैदावार घट जाती है।

किसान का सवाल बिल्कुल सीधा है- अगर बारिश हल्की और थोड़े समय की थी, तो फसल को नुकसान क्यों हुआ? इसका जवाब बारिश की मात्रा में नहीं, बल्कि बारिश के समय, फसल की अवस्था और पौधे व मिट्टी के अंदर चलने वाली जैविक प्रक्रियाओं में छुपा है। बेमौसम बारिश इसलिए नुकसान करती है क्योंकि उस समय फसल इसके लिए तैयार नहीं होती। 

बेमौसम बारिश क्या है और इसका असर अलग क्यों होता है?

बेमौसम बारिश वह होती है जो फसल के तय समय के अलावा हो जाती है। यह ज़रूरी नहीं कि बहुत तेज़ हो। अगर फसल में फूल आने, परागण होने या दाना बनने के समय थोड़ी सी भी बारिश हो जाए, तो वह भी नुकसान पहुंचा सकती है।

मौसमी बारिश को फसल अपने विकास में पहले से “मानकर चलती है।” बेमौसम बारिश इस संतुलन को तोड़ देती है। पौधा बारिश को सिर्फ मिलीमीटर में नहीं समझता। वह तापमान, नमी, पत्तियों पर पानी ठहरने का समय और मिट्टी में हवा की स्थिति के आधार पर प्रतिक्रिया करता है। इसी वजह से जनवरी या फरवरी की थोड़ी बारिश भी मानसून की भारी बारिश से ज़्यादा नुकसान कर सकती है। 

फसल की अवस्था बारिश की मात्रा से ज़्यादा अहम होती है। एक आम सोच है कि हल्की बारिश से नुकसान नहीं होता। विज्ञान यह साफ़ कहता है कि यह सोच गलत है।

फसल इन अवस्थाओं में सबसे ज़्यादा संवेदनशील होती है:

• फूल आने का समय

• परागण का समय

• शुरुआती फल या दाना बनने का समय

इन अवस्थाओं में पौधा यह तय कर रहा होता है कि कितने फूल बचेंगे और कितने दाने बनेंगे। अगर इस समय थोड़ी देर का भी झटका लग जाए, तो नुकसान स्थायी हो जाता है। बाद में कितनी भी सिंचाई या खाद दी जाए, नुकसान पूरा नहीं भरता इसीलिए खड़ी और फूल वाली फसल पर बेमौसम बारिश ज़्यादा असर डालती है। 

फूल झड़ना: जब बारिश सीधे पैदावार गिरा देती है

फूल बहुत नाज़ुक होते हैं। वे गलत समय की बारिश सहन नहीं कर पाते।

जब फूलों के समय बेमौसम बारिश होती है

• पंखुड़ियां गिर जाती हैं

• पराग (पोलन) बह जाता है

• फूल का मुंह ठीक से काम नहीं करता

• फूल फल बनने से पहले ही गिर जाते हैं

इसे फूल झड़ना कहा जाता है।

यह समस्या खासकर सरसों, चना, मसूर, अरहर, टमाटर, मिर्च और बैंगन में दिखती है। एक बार फूल गिर गया, तो पैदावार हमेशा के लिए कम हो जाती है। बाद में नए फूल उतने नहीं बन पाते, खासकर ठंडे मौसम में।

परागण फेल होना: दिखने में फसल ठीक, पर दाना नहीं

कई बार फूल पौधे पर लगे रहते हैं, फिर भी दाना या फल कम बनता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बेमौसम बारिश परागण को नुकसान पहुंचाती है।

बारिश का परागण पर असर

• पराग में ज़्यादा पानी भर जाता है

• पराग का बढ़ना रुक जाता है

• निषेचन नहीं हो पाता

फूल बाहर से ठीक दिखता है, लेकिन अंदर दाना नहीं बनता। यह समस्या दालों, तिलहनों और सब्ज़ियों में आम है। किसान को इसका पता कटाई के समय चलता है।

बारिश के बाद फफूंद क्यों बढ़ जाती है?

बारिश अपने आप बीमारी नहीं लाती। नमी और हवा की कमी फफूंद को मौका देती है। बेमौसम बारिश के बाद:

• पत्तियां देर तक गीली रहती हैं

• नमी बनी रहती है

• हवा का चलना कम हो जाता है

यह स्थिति फफूंद के लिए सबसे अच्छी होती है।

सरसों में अल्टरनेरिया, गेहूं में रतुआ, सब्ज़ियों में पाउडरी मिल्ड्यू और दालों में फल सड़न जैसी बीमारियां इसी वजह से बढ़ती हैं। फसल कमज़ोर नहीं होती, माहौल फफूंद के पक्ष में हो जाता है।

नाइट्रोजन का नुकसान: खाद चुपचाप बह जाती है

नाइट्रोजन मिट्टी में सबसे जल्दी इधर-उधर होने वाला पोषक तत्व है।

बेमौसम बारिश से होने वाले नुकसान

• नाइट्रोजन जड़ों से नीचे बह जाती है

• ऑक्सीजन की कमी से गैस बनकर उड़ जाती है

• यूरिया का असर घट जाता है

नतीजा यह होता है कि पत्तियां पीली पड़ती हैं और दाना भरना कम हो जाता है। किसान फिर से खाद डाल देता है, लेकिन असली नुकसान पहले ही हो चुका होता है।

मिट्टी में हवा की कमी और जड़ों का दम घुटना

जड़ों को पानी के साथ-साथ हवा भी चाहिए। अचानक बारिश से मिट्टी के छेद पानी से भर जाते हैं और हवा का आना रुक जाता है। इससे:

• जड़ों की ताकत घटती है

• पोषक तत्व उठाना कम हो जाता है

• बारीक जड़ें मरने लगती हैं

इसीलिए कई बार गीली मिट्टी में भी फसल मुरझाई हुई दिखती है।

नुकसान तुरंत क्यों नहीं दिखता?

किसानों को सबसे ज़्यादा यही बात उलझाती है। बारिश आज हुई और नुकसान 10–15 दिन बाद दिखा। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि:

• आज गिरे फूलों का असर बाद में दिखता है

• नाइट्रोजन की कमी दाना भरते समय सामने आती है

• फफूंद अंदर-ही-अंदर फैलती है

• जड़ों की चोट धीरे-धीरे ऊपर असर दिखाती है

कारण और असर के बीच समय का फ़र्क होता है।

कौन-सी फसलें ज़्यादा प्रभावित होती हैं?

सरसों, दालें और सब्ज़ियां सबसे ज़्यादा संवेदनशील होती हैं। गेहूं फूल आने के समय संवेदनशील होता है। गन्ना और चारा फसलें तुलनात्मक रूप से कम प्रभावित होती हैं। असली फ़र्क फसल की अवस्था से पड़ता है।

“बारिश हमेशा अच्छी होती है” – यह एक भ्रम है

बारिश तभी अच्छी होती है जब वह फसल की ज़रूरत के समय आए। गलत समय की बारिश फूल गिरा देती है, बीमारी बढ़ाती है, खाद बहा देती है और जड़ों को नुकसान पहुँचाती है। ज़्यादा बारिश का मतलब ज़्यादा पैदावार नहीं होता।

किसान कौनसे शुरुआती संकेत देखें?

बेमौसम बारिश के बाद अगर फूल गिरें, पत्तियां पीली हों, फफूंद दिखे, फसल देर से संभले या फलियां कम बनें – तो यह तनाव के संकेत हैं।

बारिश के बाद खेत में क्या करें?

भारी मात्रा में खाद तुरंत न डालें। पानी की निकासी ठीक रखें। बीमारी पर जल्दी नज़र रखें। ज़रूरत से ज़्यादा सिंचाई न करें। फसल को धीरे-धीरे संभलने का मौका दें।

जलवायु परिवर्तन और समय का झटका

जलवायु परिवर्तन का मतलब सिर्फ कम या ज़्यादा बारिश नहीं है। इसका मतलब है गलत समय पर बारिश। ऐसे झटके अब बढ़ रहे हैं। जो किसान फसल के विज्ञान को समझेंगे, वे बेहतर तरीके से संभल पाएंगे।

किसानों के लिए  संदेश

बारिश सिर्फ़ पानी नहीं है, यह एक जैविक घटना है। गलत समय पर आई बारिश से:

• फूल गिरते हैं

• परागण फेल होता है

• फफूंद बढ़ती है

• खाद बह जाती है

इसीलिए किसान पूछते हैं – “बारिश अच्छी थी, फिर नुकसान क्यों हुआ?” इसका जवाब किस्मत में नहीं, विज्ञान में है। इस विज्ञान को समझकर किसान खेत को बेहतर पढ़ सकता है, सही फ़ैसले ले सकता है और बदलते मौसम में अपनी पैदावार बचा सकता है। 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

इसे भी पढ़िए: Climate Crisis: भारत का किसान प्रकृति के प्रकोप के सामने क्यों हार रहा? बाढ़, सूखा और बादल फटना बना नई ख़तरनाक ‘सामान्य’ स्थिति

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top