Tech Revolution In Indian Agriculture: 7 Deep-tech’ Technologies से कृषि क्रांति की तैयारी, World Economic Forum की स्टडी

विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum - WEF) ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट में भारत के कई case studies पेश करते हुए कहा है कि Artificial Intelligence (AI) और Robotics जैसी सात उभरती हुई' Deep-tech' Technologies दुनिया की कृषि व्यवस्था को पूरी तरह बदल कर रख देंगी।

Tech Revolution In Indian Agriculture: 7 Deep-tech' Technologies से कृषि क्रांति की तैयारी, World Economic Forum की स्टडी

दुनिया की एक बड़ी आबादी का पेट भरने वाला भारत अब दुनिया को Agriculture के future का रास्ता दिखाने के लिए तैयार है। विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum – WEF) ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट में भारत के कई case studies पेश करते हुए कहा है कि Artificial Intelligence (AI) और Robotics जैसी सात उभरती हुई’ Deep-tech’ Technologies दुनिया की कृषि व्यवस्था को पूरी तरह बदल कर रख देंगी। ये तकनीकें न सिर्फ प्रोडक्टिविटी बढ़ाएंगी, बल्कि किसानों की आजीविका सुरक्षित करने और कृषि को Climate change के प्रभावों से मजबूत बनाने में भी अहम भूमिका निभाएंगी।

क्यों ज़रूरी है कृषि में Deep-tech’ Technologies 

WEF की रिपोर्ट’Shaping the Deep-Tech Revolution in Agriculture’ एक ऐसे वक्त आई है जब दुनिया भर की कृषि एक साथ कई संकटों का सामना कर रही है। गांवों से शहरों की ओर पलायन तेज हो रहा है,Climate change बढ़ रहा हैं और प्राकृतिक संसाधनों, ख़ासकर मिट्टी और पानी तेजी से घट रहा है। Food and Agriculture Organization of the United Nations (FAO) के मुताबिक, 2050 तक बढ़ती आबादी को खिलाने के लिए दुनिया को काफी अधिक Food Grain Production करना होगा। ये तब होगा जब दुनिया की एक-तिहाई ज़मीन बंजर हो चुकी होगी, 71 फीसदी Groundwater sources सूख चुके होंगे और औसत किसान की उम्र 60 साल के आसपास होगी। इन चुनौतियों से निपटने के लिए पारंपरिक तरीके अब नाकाफी साबित हो रहे हैं।

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वो 7 जादुई तकनीकें कौन सी हैं?

WEF ने जिन सात डीप-टेक तकनीकों को गेम-चेंजर बताया है, वे हैं:

1.जेनरेटिव AI (Generative AI)

2.रोबोटिक्स (Robotics)

3.सैटेलाइट-इनेबल्ड रिमोट सेंसिंग (Satellite-Enabled Remote Sensing)

4.कंप्यूटर विजन (Computer Vision)

5.एज इंटरनेट ऑफ थिंग्स (Edge IoT)

6.CRISPR जीन एडिटिंग (CRISPR Gene Editing)

7.नैनोटेक्नोलॉजी (Nanotechnology)

भारत के Case Studies 

रिपोर्ट में भारत के कुछ ठोस उदाहरणों से दिखाया गया है कि ये तकनीकें कैसे काम कर रही हैं:

1.CRISPR से बनी चावल की नस्लें: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने पारंपरिक तरीकों के बजाय CRISPR जीन एडिटिंग तकनीक का इस्तेमाल करके दो नई चावल की किस्में विकसित की हैं। DRR 100 नामक किस्म सूखा, Salinity and climate stress को बेहतर झेलती है, जिससे 19 फीसदी अधिक पैदावार होती है और 20 फीसदी कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन होता है। पूसा DST राइस 1 किस्म खारी और क्षारीय मिट्टी में 9.66% से 30.4 फीसदी तक ज़्यादा पैदावार देती है।

2.रिमोट सेंसिंग से फसल बीमा: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में अब फसल नुकसान का आकलन करने के लिए मैनुअल विधि की जगह Satellite imagery, high-resolution drones, and mobile apps का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे दावों का निपटारा तेज, पारदर्शी और सटीक हुआ है। किसानों को वक्त रहते जरूरी फाइनेंशियल मदद मिल पा रही है।

3.Bhashini: AI को भारतीय भाषाओं की ताकत: भारत सरकार की ‘Bhashini’ पहल एक Digital Public Infrastructure है जो AI को भारतीय भाषाओं में काम करने लायक बनाती है। इसकी मदद से डीप-टेक स्टार्टअप्स अपने उत्पादों में लोकल लैंग्वेज की आवाज और टेक्स्ट सुविधा जोड़ सकते हैं। इससे अंग्रेजी न जानने वाले करोड़ों किसानों तक तकनीक की पहुंच आसान होगी और उन्हें सीधे फायदा मिलेगा।

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भविष्य के खुले दरवाज़े 

WEF का मानना है कि इन सात तकनीकों के एक साथ इस्तेमाल (convergence) से और बड़े बदलाव आएंगे, जैसे Swarm technology of autonomous robotics, precision farm management and carbon reporting। भारत ने already इन तकनीकों का फायदा 8.95 लाख से ज्यादा किसानों तक पहुंचाने का काम शुरू कर दिया है। अब सरकारों को agile policies और regulatory sandboxes बनाने की जरूरत है ताकि तकनीकी प्रगति की रफ्तार के साथ कदम मिलाकर चला जा सके।

 

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